पानी की टंकी का बिल पास कराने के बदले मांगी रिश्वत, ACB ने तीन अभियंताओं पर दर्ज किया मामला

नागौर जिले के नावां क्षेत्र में पानी की टंकी निर्माण कार्य का बिल पास करने के बदले लाखों रुपये की रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। ACB ने जांच के बाद PHED के दो सहायक अभियंताओं और एक कनिष्ठ अभियंता के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Jun 7, 2026 - 11:18
पानी की टंकी का बिल पास कराने के बदले मांगी रिश्वत, ACB ने तीन अभियंताओं पर दर्ज किया मामला

नागौर। डीडवाना-कुचामन जिले के नावां क्षेत्र में जलदाय विभाग (PHED) के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। पानी की टंकी निर्माण कार्य का बिल पास करने के बदले संवेदक (ठेकेदार) से लाखों रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने दो सहायक अभियंताओं (AEN) और एक कनिष्ठ अभियंता (JEN) के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

ACB की जांच में सामने आया कि निर्माण कार्य का भुगतान जारी करने के लिए पहले छह लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। बाद में बातचीत के बाद यह रकम पांच लाख रुपये पर तय हुई। शिकायत मिलने के बाद ACB ने लंबे समय तक मामले की निगरानी की और पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद कार्रवाई की।

कॉल रिकॉर्डिंग बनी अहम सबूत

नागौर ACB चौकी की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) कल्पना सोलंकी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद एजेंसी लगातार मामले की जांच कर रही थी। जांच के दौरान रिश्वत मांगने से जुड़ी कॉल रिकॉर्डिंग भी मिली, जिसने आरोपों को मजबूत आधार प्रदान किया।

जांच में PHED की एईएन शांति देवी, जेईएन सतवीर और तत्कालीन प्रोजेक्ट जेईएन आशीष मीणा की भूमिका सामने आई। इसके बाद तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की आगे की जांच अजमेर ACB चौकी के सीआई नरेंद्र सिंह को सौंपी गई है।

कई बार ट्रैप की कोशिश, हर बार बच निकले आरोपी

ACB अधिकारियों के अनुसार रिश्वत मांगने की शिकायत पर सितंबर 2025 में एईएन शांति देवी और जेईएन सतवीर के खिलाफ सत्यापन किया गया था। वहीं तत्कालीन प्रोजेक्ट जेईएन आशीष मीणा के खिलाफ जनवरी 2026 में जांच की गई।

एसीबी ने फरवरी 2026 में आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना बनाई थी, लेकिन कार्रवाई से पहले ही अभियंताओं को इसकी भनक लग गई। आरोप है कि उन्होंने परिवादी से कहा कि उन्हें जानकारी मिल चुकी है कि वह ACB के संपर्क में है, इसलिए फिलहाल मामला शांत होने तक कोई लेन-देन नहीं होगा।

इसके बाद मार्च में भी ट्रैप की कोशिश की गई, लेकिन कार्रवाई से पहले ही आरोपी सतर्क हो गए और योजना सफल नहीं हो सकी।

पहले 3 लाख, फिर बिल भुगतान के बाद 2 लाख की डील

जांच में यह भी सामने आया कि कुल पांच लाख रुपये की रिश्वत में से तीन लाख रुपये पहले और बाकी दो लाख रुपये बिल भुगतान होने के बाद देने की बात तय हुई थी। हालांकि रिश्वत की राशि का लेन-देन नहीं हो पाया, लेकिन जांच एजेंसी को मांग से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मिल गए।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई

ACB का कहना है कि ट्रैप कार्रवाई सफल नहीं होने के बावजूद रिश्वत मांगने के पर्याप्त प्रमाण मिलने पर तीनों अभियंताओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। अब मामले में दस्तावेजी साक्ष्य, कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी का मानना है कि यह मामला सरकारी कार्यों में भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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