हड्डियों के कैंसर से जूझती 27 वर्षीय प्रियंका ने ICU में मनाया जज़्बे का जश्न

27 साल की प्रियंका ने हड्डियों के दुर्लभ कैंसर से जूझते हुए भी आखिरी पलों में मुस्कान बिखेरी, ICU में केक काटकर अपने जीवन का उत्सव मनाया। उनकी हिम्मत और जिंदादिली ने परिवार, डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ को भावुक कर दिया।

Sep 11, 2025 - 16:32
Sep 11, 2025 - 17:04
हड्डियों के कैंसर से जूझती 27 वर्षीय प्रियंका ने ICU में मनाया जज़्बे का जश्न

उदयपुर के एक अस्पताल के ICU में उस दिन एक अनोखा नजारा था। 27 साल की प्रियंका, जिसे प्यार से पीहू बुलाया जाता था, मशीनों से घिरी हुई थी। हड्डियों का दुर्लभ कैंसर, इविंग सार्कोमा, उसे जकड़े हुए था। फिर भी, उसने अपने आखिरी पलों को उदासी से नहीं, बल्कि खुशी से सजाने का फैसला किया।

उसने अपने पिता से एक केक मंगवाया, जिस पर लिखा था "पीहू-लकी", और अपने पति लक्ष्यराज के साथ मिलकर इसे काटा। उसने सबको केक खिलाया और कहा, "मैं हंसते हुए जाना चाहती हूं।" यह कहानी है प्रियंका की, जिसने 2 सितंबर 2025 को दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन अपनी हिम्मत और मुस्कान से सभी के दिलों में जगह बना ली।

कैंसर की वजह से वह फाइनल एग्जाम नहीं दे पाई

पश्चिम बंगाल के हुबली में ज्वेलर नरपत सिंह की बेटी प्रियंका अपने परिवार की सबसे प्यारी थी। चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थी, लेकिन अपने मासूम चेहरे और जिद्दी स्वभाव से सबकी फेवरेट थी। पिता नरपत सिंह बताते हैं, "पीहू का छोटा सा चेहरा और उसकी प्यारी जिद आज भी याद आती है। वो हर बार अपनी बात मनवा लेती थी।" प्रियंका ने हुबली से BBA की पढ़ाई पूरी की और CA इंटरमीडिएट का एग्जाम पास किया। हालांकि, कैंसर की वजह से वह फाइनल एग्जाम नहीं दे पाई। जनवरी 2023 में उनकी शादी रानीवाड़ा के भाटवास गांव के बिल्डर लक्ष्यराज सिंह से हुई।

डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि अब ज्यादा समय नहीं बचा

शादी के कुछ समय बाद ही प्रियंका के पैरों में दर्द शुरू हुआ। शुरुआत में परिवार ने इसे सामान्य समझा, लेकिन जब दर्द बढ़ता गया, तो फरवरी 2023 में मुंबई में MRI टेस्ट करवाया गया। जांच में पता चला कि प्रियंका को इविंग सार्कोमा, एक दुर्लभ प्रकार का हड्डी का कैंसर है। यह खबर सुनकर परिवार स्तब्ध रह गया। नरपत सिंह के बेटे जयपाल तुरंत मुंबई पहुंचे। मार्च 2023 में प्रियंका की पहली सर्जरी हुई, फिर जून 2024 में दूसरी। इसके बाद परिवार उसे राजस्थान के उदयपुर ले आया, जहां 2 अगस्त 2025 को तीसरी सर्जरी हुई। लेकिन डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि अब ज्यादा समय नहीं बचा है।

पापा, एक केक लाओ

8 अगस्त को प्रियंका को घर लाया गया, लेकिन दर्द फिर से बढ़ गया। 9 अगस्त को उसे उदयपुर के पेसिफिक अस्पताल में दोबारा भर्ती करना पड़ा। प्रियंका को अपनी स्थिति का अंदाजा था, फिर भी उसने हार नहीं मानी। 25 अगस्त को जब परिवार और ससुराल वाले उससे मिलने आए, तो उसने सबसे एक अनोखी मांग की। उसने कहा, "पापा, एक केक लाओ। मैं अपने आखिरी पलों को सेलिब्रेट करना चाहती हूं।" उस दिन ICU में उत्सव का माहौल था। प्रियंका ने अपने हाथों से सबको केक खिलाया और कहा, "मैं जल्दी ठीक होकर घर आऊंगी।" उसकी हिम्मत देखकर अस्पताल का स्टाफ भी भावुक हो गया। परिवार और ससुराल वाले गैलरी में जाकर रोए, लेकिन प्रियंका के सामने कोई कमजोर नहीं पड़ना चाहता था।

मुस्कान और हौसला देखकर हर कोई हैरान

डॉक्टरों ने कहा, "हमने कई कैंसर मरीज देखे, लेकिन प्रियंका कुछ अलग थी। उसमें जीने का जज्बा था।" वह सपने देखती थी—CA बनने का, घूमने का, अपने पति और पिता के साथ समय बिताने का। उसकी मुस्कान और हौसला देखकर हर कोई हैरान था। पिता नरपत सिंह कहते हैं, "वो मशीनों में जकड़ी थी, फिर भी हंस रही थी। उसने हमें सिखाया कि जिंदगी को हर हाल में मुस्कुराकर जीना चाहिए।"

1 बजे, उसने आखिरी सांस ली

2 सितंबर 2025 की दोपहर प्रियंका की हालत बिगड़ने लगी। अपने भाई जयपाल से उसने आखिरी बार कहा, "तूने सुबह से खाना नहीं खाया। जा, खाना खा ले, मैं कहीं नहीं जा रही।" इसके 20 मिनट बाद, दोपहर 1 बजे, उसने आखिरी सांस ली। उस समय भी उसके चेहरे पर वही मुस्कान थी। पिता कहते हैं, "प्रियंका ने हमें सिखाया कि जिंदगी कितनी भी मुश्किल हो, उसे हंसते हुए जीना चाहिए।"

प्रियंका उर्फ पीहू की कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की प्रेरणा है जो मुश्किलों से जूझ रहा है। उसने दिखाया कि दर्द के बीच भी मुस्कान बिखेरी जा सकती है। उसकी हिम्मत और जिंदादिली आज भी उसके परिवार और दोस्तों के दिलों में जिंदा है।

Web Desk Web Desk The Khatak