राजस्थान विधानसभा में भाटी का तीखा प्रहार: स्कूली बच्चियां पानी नहीं पीतीं, टॉयलेट न होने से डरती हैं; नेताओं-अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का कानून बने
राजस्थान विधानसभा में निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकारी स्कूलों की खराब हालत पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि टॉयलेट न होने से स्कूली बच्चियां पानी तक नहीं पीतीं, शिक्षकों की भारी कमी, जर्जर भवन और पेपर लीक जैसी समस्याएं हैं। भाटी ने मांग की कि पंच से सांसद, मंत्री-अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने की बाध्यता वाला कानून बने, तभी शिक्षा व्यवस्था सुधरेगी। उन्होंने पेपर लीक और OMR शीट घोटाले पर भी सवाल उठाए तथा 2047 तक विकसित भारत के सपने पर संदेह जताया।
जयपुर/बाड़मेर: राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान निर्दलीय विधायक (शिव विधायक) रवींद्र सिंह भाटी ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पेपर लीक, शिक्षकों की कमी, जर्जर स्कूल भवनों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर सरकार व पूर्व सरकारों दोनों पर तंज कसा। भाटी ने विशेष रूप से लड़कियों की समस्या पर जोर देते हुए कहा कि स्कूलों में शौचालय न होने के कारण बच्चियां पानी तक नहीं पीतीं, जिससे उनकी सेहत प्रभावित हो रही है।
पेपर लीक और जिम्मेदारी पर सवाल
भाटी ने कहा कि पेपर लीक के मामलों पर पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने तर्क दे रहे हैं, लेकिन आखिर जिम्मेदार कौन है? इतने वर्षों से पेपर लीक होते आ रहे हैं, फिर भी कोई सुधार नहीं। हाल ही में OMR शीट का नया मामला सामने आया है। उन्होंने पूछा- क्या इस तरह 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनेगा?
सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति
विधायक ने विपक्ष के नेताओं द्वारा बताए आंकड़ों का हवाला दिया- 1.50 लाख शिक्षकों की कमी, 3700 स्कूल जर्जर हालत में, 80 हजार कमरों और 44 हजार शौचालयों की जरूरत। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में विपक्ष के नेता शिक्षा मंत्री थे, अब वर्तमान सरकार है- यह कमी कब पूरी होगी?
सबसे मार्मिक बात भाटी ने लड़कियों के बारे में कही- "स्कूलों में टॉयलेट तक की सुविधा नहीं है, इसलिए बच्चियां पानी नहीं पीतीं।" वे डरती हैं कि पानी पीने से शौचालय जाना पड़ेगा, जहां सुविधा नहीं। हम अमृत काल मना रहे हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों की हालत ऐसी है कि कहीं भवन गिर रहे हैं, कहीं मासूम बच्चे सिस्टम की भेंट चढ़ रहे हैं। हम सब मूकदर्शक बने बैठे हैं।भाटी ने याद दिलाया कि सदन में बैठे अधिकांश माननीय सदस्य खुद सरकारी स्कूलों से पढ़कर आए हैं, लेकिन आज उन स्कूलों की क्या हालत है?
12वीं कक्षा एक टीचर के भरोसे
उन्होंने कहा कि 12वीं कक्षाओं को एक-एक शिक्षक के भरोसे छोड़ दिया गया है। बाबा साहेब अंबेडकर का उद्धरण देते हुए बोले- "शिक्षा वो शेरनी का दूध है, जो जितना पीएगा उतना दहाड़ेगा।" लेकिन इस हालत में हम तक्षशिला-नालंदा कैसे बनाएंगे? क्या इस तरह विश्वगुरु बन पाएंगे?
क्रांतिकारी प्रस्ताव: नेताओं-अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूल अनिवार्य
भाटी ने सबसे बड़ा सुझाव दिया- शिक्षा व्यवस्था तभी सुधरेगी जब कानून बनाकर अनिवार्य किया जाए कि पंच, सरपंच से लेकर प्रधान, प्रमुख, विधायक, सांसद, मंत्री और अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूलों में ही पढ़ें। जिस दिन यह कानून आएगा, उसी दिन से स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं आएंगी और गुणवत्ता सुधरेगी। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसा कानून लाए, वे पूरा सहयोग करेंगे। आज कोई सक्षम व्यक्ति अपने बच्चों को सरकारी स्कूल नहीं भेजता- केवल गरीब और वंचित बच्चे ही जाते हैं।