मंडी पहुंचा किसान, लेकिन गेहूं खरीदने से इनकार… जब रिकॉर्ड में सिंचित जमीन अचानक बन गई असिंचित, तो उठने लगे बड़े सवाल!
बांसवाड़ा के ठीकरीया गांव में राजस्व रिकॉर्ड की एक रहस्यमयी गड़बड़ी ने किसानों को संकट में डाल दिया है। खेतों में जहां फसलें लहलहा रही हैं, वहीं कागजों में जमीन को ‘असिंचित’ दर्ज कर दिया गया है, जिससे मंडी में गेहूं की खरीद रोक दी गई है। किसानों का कहना है कि पिछले साल यही उपज आसानी से बिक गई थी, लेकिन इस बार अचानक बदले रिकॉर्ड ने उनकी कमाई पर रोक लगा दी है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर खेत हरे हैं तो रिकॉर्ड सूखे क्यों दिखा रहे हैं, और इस गलती के पीछे क्या सच्चाई छिपी है।
जिले के ठीकरीया गांव में राजस्व रिकॉर्ड में कथित गलती के चलते किसानों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि पटवारी और गिरदावर की लापरवाही से उनकी सिंचित कृषि भूमि को रिकॉर्ड में ‘असिंचित’ दर्ज कर दिया गया, जिसके कारण मंडी में उनका गेहूं खरीदा नहीं जा रहा है।
किसानों ने इस मामले को लेकर सोमवार को कलेक्टर और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
2025 में बिका था गेहूं, अब रिकॉर्ड बना बाधा
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2025 में उनकी फसल कृषि उपज मंडी में आसानी से बिक गई थी क्योंकि उस समय भूमि रिकॉर्ड में जमीन को सिंचित माना गया था। लेकिन इस वर्ष जब किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचे, तो उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि खसरा और जमाबंदी में भूमि असिंचित दर्ज है।
इस बदलाव से किसान हैरान हैं और उनका कहना है कि बिना किसी भौतिक सत्यापन के रिकॉर्ड में बदलाव कर दिया गया, जिससे उनकी पूरी बिक्री प्रक्रिया प्रभावित हो गई।
खेत में हरियाली, फिर भी रिकॉर्ड में ‘सूखा’
किसानों ने प्रशासन को मौके पर बुलाकर स्थिति समझाने की कोशिश की। ग्रामीण अमरेंग पटेल ने बताया कि उनके खेतों में इस समय खरबूजे की फसल लहलहा रही है, जो साफ तौर पर सिंचाई की स्थिति को दर्शाती है।
इसके बावजूद, राजस्व रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया गया और अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
किसानों में आक्रोश, ज्ञापन में दी आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने अपने ज्ञापन में इसे ‘लिपिकीय त्रुटि’ बताते हुए कहा है कि इस गलती के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें रखी गई हैं—
- मौके का तत्काल भौतिक सत्यापन किया जाए
- भूमि रिकॉर्ड में सुधार कर सिंचित श्रेणी बहाल की जाए
- मंडी में गेहूं की खरीद तुरंत शुरू की जाए
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
प्रशासन पर नजरें, समाधान का इंतजार
मामला सामने आने के बाद अब सभी की नजरें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। किसानों का कहना है कि यह सिर्फ रिकॉर्ड की गलती नहीं, बल्कि उनकी आजीविका से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, जिसे जल्द सुलझाया जाना चाहिए।