जयपुर में कौन रच रहा था अंडरग्राउंड साज़िश? फर्जी पहचान से जुड़े ‘खरगोश’ कनेक्शन पर ATS की दबिश, 4 संदिग्ध हिरासत में…

जयपुर में आतंकी कनेक्शन का खुलासा! फर्जी पहचान से छिपे ‘खरगोश’ के मददगार 4 गिरफ्तार, अब पूरे नेटवर्क पर जांच की नजर…

Apr 21, 2026 - 07:06
जयपुर में कौन रच रहा था अंडरग्राउंड साज़िश? फर्जी पहचान से जुड़े ‘खरगोश’ कनेक्शन पर ATS की दबिश, 4 संदिग्ध हिरासत में…

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े खूंखार आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ के जयपुर कनेक्शन ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। ताजा कार्रवाई में राजस्थान एटीएस (ATS) ने आतंकी की मदद करने वाले चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।

इलेक्ट्रीशियन बनकर की 'रैकी', किसी को नहीं हुई भनक

जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आतंकी उमर हारिस सितंबर 2023 से अगस्त 2024 तक जयपुर के जयसिंहपुरा खोर इलाके में पहचान छिपाकर रहा। इस दौरान उसने खुद को एक 'इलेक्ट्रीशियन' के रूप में स्थापित किया। वह इलेक्ट्रॉनिक रिपेयरिंग के बहाने शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों, प्रमुख मंदिरों और पर्यटन स्थलों की रेकी करता रहा। सूत्रों के अनुसार, वह काम के बहाने लोगों के घरों में भी दाखिल होता था, जिससे सुरक्षा एजेंसियां बेहद चिंतित हैं।

शादी की और फिर बने फर्जी दस्तावेज

आतंकी ने अपनी जड़ें जमाने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची:

शादी का ढोंग: स्थानीय स्तर पर पहचान पुख्ता करने के लिए उसने जयपुर में एक महिला से शादी की।

फर्जी आधार कार्ड: स्थानीय नेटवर्क की मदद से सबसे पहले फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड बनवाया गया।

पुलिस वेरिफिकेशन को दिया चकमा: इसी आधार कार्ड के जरिए उसने 'सज्जाद' नाम से फर्जी पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी सफलतापूर्वक पूरी हो गई।

इंडोनेशिया और खाड़ी देशों तक पहुंचा आतंकी

फर्जी पासपोर्ट हासिल करने के बाद, उमर हारिस अगस्त 2024 में भारत से भागने में सफल रहा। वह पहले इंडोनेशिया गया और फिर खाड़ी देशों में छिप गया। इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर में एक ऑपरेशन के दौरान कुछ इनपुट हासिल किए।

ATS की ताबड़तोड़ कार्रवाई: 4 संदिग्ध हिरासत में

श्रीनगर पुलिस से मिले इनपुट के बाद राजस्थान एटीएस तुरंत सक्रिय हुई। एटीएस ने उन चार लोगों को डिटेन किया है जिन्होंने आतंकी को फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट बनवाने में प्रत्यक्ष रूप से मदद की थी। पूछताछ के बाद इन चारों को जम्मू-कश्मीर पुलिस को सौंप दिया गया है।

स्लीपर सेल की सक्रियता पर सवाल

उमर हारिस ने 2012 में पाकिस्तान से घुसपैठ की थी और वह जम्मू-कश्मीर, हरियाणा (नूंह) और पंजाब में भी सक्रिय रहा। जयपुर में एक साल तक बिना किसी सुराग के रहना यह संकेत देता है कि शहर में स्लीपर सेल का नेटवर्क काफी मजबूत हो चुका है। अब एजेंसियां इस बात की गहराई से जांच कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और क्या जयपुर में किसी बड़ी वारदात की साजिश रची जा रही थी?

अपील: सुरक्षा एजेंसियां आम जनता से अपील कर रही हैं कि किराएदार रखने या किसी को काम पर रखने से पहले उसकी पहचान की गहन जांच करें और पुलिस वेरिफिकेशन जरूर करवाएं।

Kashish Sain Bringing truth from the ground