जनगणना की ड्यूटी ने रोका ‘बड़ा फैसला’! राजस्थान में 1.60 लाख शिक्षकों के ट्रांसफर पर संकट
राजस्थान में जनगणना की तैयारियों के बीच शिक्षकों के तबादलों पर बड़ी रोक के संकेत मिल रहे हैं। 1.60 लाख कार्मिकों की ड्यूटी ने सरकार के फैसले को मुश्किल में डाल दिया है।
राजस्थान में जनगणना 2027 की तैयारियों ने एक बार फिर शिक्षा विभाग के हजारों कर्मचारियों की उम्मीदों पर ब्रेक लगा दिया है। लंबे समय से तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए यह खबर झटका देने वाली साबित हो सकती है।
दरअसल, राज्य में 1 मई 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू होने जा रहा है। इस चरण में मकान सूचीकरण और गणना का कार्य किया जाएगा। 1 से 15 मई तक स्वगणना का विकल्प दिया गया है, जबकि 16 मई से 14 जून तक प्रगणक घर-घर जाकर डेटा जुटाएंगे।
इस पूरे अभियान के लिए प्रदेश में करीब 1 लाख 60 हजार प्रगणक और पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं—और इनमें सबसे बड़ी संख्या शिक्षा विभाग के कर्मचारियों, खासकर शिक्षकों की है।
यहीं से शुरू होती है असली समस्या
जनगणना जैसे बड़े और संवेदनशील कार्य में लगे इन कर्मचारियों के तबादले करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार से यह अपील की गई है कि जिन कार्मिकों को जनगणना में लगाया गया है, उनके ट्रांसफर पर फिलहाल रोक लगाई जाए।
जनगणना कार्य निदेशालय के अनुसार, पहले चरण में काम करने वाले यही कर्मचारी 2027 में होने वाले दूसरे चरण में भी शामिल रहेंगे, जो फरवरी से अप्रैल 2027 तक चलेगा। ऐसे में साफ संकेत हैं कि जब तक पूरा जनगणना कार्य खत्म नहीं होता, तब तक ट्रांसफर प्रक्रिया पर रोक जारी रह सकती है।
हर प्रगणक को लगभग 150 मकानों की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि कार्यभार भी कम नहीं है। हालांकि सरकार की ओर से इस काम के लिए अतिरिक्त मानदेय की व्यवस्था की गई है, लेकिन तबादले की आस लगाए बैठे शिक्षकों के लिए यह राहत नाकाफी लग रही है।
अब बड़ा सवाल यही है—
क्या जनगणना पूरी होने तक शिक्षकों को अपने ट्रांसफर का इंतजार करना होगा?
फिलहाल हालात यही संकेत दे रहे हैं कि शिक्षा विभाग के हजारों कर्मचारियों के तबादले फिलहाल “होल्ड” पर जा सकते हैं।