पाली में SHO उगमराज सोनी को कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में: मारपीट और अवैध हिरासत के गंभीर आरोप

पाली जिले में तैनात SHO उगमराज सोनी पर मारपीट और अवैध हिरासत के गंभीर आरोप लगे। पीड़ित की कोर्ट शिकायत पर सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह मामला पुलिस में दुर्लभ है, जहां SHO को सीधे जेल भेजा गया। विभाग से निलंबन या जांच की उम्मीद है, जिससे पुलिस जवाबदेही पर बहस छिड़ गई है।

Mar 7, 2026 - 16:40
पाली में SHO उगमराज सोनी को कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में: मारपीट और अवैध हिरासत के गंभीर आरोप

पाली जिले (राजस्थान) में तैनात एक थानाधिकारी (SHO) के खिलाफ पुलिस अधिकारी द्वारा ही कथित पुलिस ज्यादती का मामला सामने आया है, जो पुलिस विभाग में हलचल मचा रहा है। मामला पाली जिले में कार्यरत SHO उगमराज सोनी से जुड़ा है, जिन्हें अदालत ने मारपीट और अवैध हिरासत के आरोप में न्यायिक हिरासत (जेल) भेज दिया है। यह घटना पुलिस व्यवस्था में दुर्लभ मानी जा रही है, क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में अधिकारी को सीधे जेल नहीं भेजा जाता, बल्कि विभागीय जांच या निलंबन तक सीमित रहता है।

मामला क्या है?

आरोप है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति के साथ मारपीट की गई और उसे अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। पीड़ित पक्ष ने इस ज्यादती के खिलाफ सीधे कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में दावा किया गया कि SHO उगमराज सोनी ने अपनी पद की शक्ति का दुरुपयोग करते हुए व्यक्ति पर शारीरिक अत्याचार किया और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में लिया।

यह घटना पाली जिले के किसी थाने से जुड़ी बताई जा रही है, जहां उगमराज सोनी SHO के पद पर तैनात थे। (उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में उनका तबादला खिंवाड़ा थाने पर हुआ था, लेकिन मामला संभवतः पहले की तैनाती से संबंधित हो सकता है।)

कोर्ट की कार्रवाई

कोर्ट ने मामले को काफी गंभीर माना। अदालत ने SHO उगमराज सोनी को तलब किया और सुनवाई के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस अधिकारियों को उन्हें जेल पहुंचाना पड़ा। कोर्ट ने आरोपों की प्रारंभिक जांच के आधार पर यह फैसला सुनाया, जिसमें पीड़ित की शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों को आधार बनाया गया।

विभागीय स्थिति और आगे क्या?

ऐसे मामलों में पुलिस विभाग की सामान्य प्रक्रिया के अनुसार:संबंधित अधिकारी को तुरंत लाइन अटैच या निलंबित किया जाता है।विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू की जाती है, जिसमें उच्चाधिकारी आरोपों की पड़ताल करते हैं।यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो कड़ी कार्रवाई जैसे बर्खास्तगी तक हो सकती है।वर्तमान में विभाग से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पुलिस महकमे में इस घटना से काफी चर्चा और असहजता है।

क्यों माना जा रहा है बड़ा मामला?

किसी थानाधिकारी (SHO) को कोर्ट द्वारा सीधे जेल भेजना राजस्थान पुलिस में बहुत कम देखने को मिलता है।यह घटना पुलिस की जवाबदेही और आंतरिक अनुशासन पर सवाल उठाती है।आम जनता में पुलिस पर भरोसा बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच जरूरी होती है, अन्यथा विभाग की छवि प्रभावित हो सकती है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.