राजस्थान के लोक गायक मोती खान को वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड्स से 'वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस' अवार्ड
राजस्थान के बाड़मेर जिले के छोटे से गांव हड़वा के मांगणियार गायक मोती खान, जिन्होंने इंडियन आइडल में अपनी मधुर आवाज से देश-विदेश में पहचान बनाई, अब वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड्स द्वारा प्रतिष्ठित 'वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस' अवार्ड से सम्मानित हो रहे हैं। पिता सिंधल खान मिरासी से पारंपरिक गायकी सीखने वाले मोती खान की यह उपलब्धि पूरे मांगणियार समाज और राजस्थानी लोक संगीत प्रेमियों के लिए गर्व की बात है।
बाड़मेर जिले की तहसील शिव के छोटे से गांव हड़वा में लोक संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने वाले एक युवा कलाकार की प्रेरणादायक कहानी आज पूरे देश और विदेश में चर्चा का विषय बन रही है। मिरासी (मांगणियार) समाज से ताल्लुक रखने वाले श्री सिंधल खान मिरासी के घर जन्मे श्री मोती खान ने अपनी कड़ी मेहनत, लगन और मधुर आवाज के बल पर न केवल भारतीय लोक संगीत को नई ऊंचाइयां दी हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी पहचान बनाई है। अब उन्हें वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड्स द्वारा प्रतिष्ठित 'वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस' अवार्ड से सम्मानित किया जा रहा है, जो उनके समर्पण और योगदान का प्रमाण है।
छोटे गांव से इंडियन आइडल तक का सफर
मोती खान का जन्म बाड़मेर के हड़वा गांव में हुआ। बचपन से ही घर में पारंपरिक मांगणियार लोक गायकी का वातावरण था। पिता श्री सिंधल खान मिरासी से उन्होंने अपनी परंपरागत गायकी को सीखा और समझा। मात्र दसवीं कक्षा तक स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उनका मन संगीत की ओर पूरी तरह झुक गया। घर पर रेडियो और टेलीविजन से गीत सुनते हुए उन्होंने इंडियन आइडल बनने का सपना देखा।
बड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने ऑडिशन के लिए आवेदन किया और कॉम्पिटिशन में हर चरण को फाइट करते हुए सफलता हासिल की। इंडियन आइडल जूनियर सीजन में उन्होंने अपनी मधुर आवाज और राजस्थानी लोक शैली से जजों और दर्शकों का दिल जीता। शो के दौरान वे न केवल गायकी के लिए बल्कि हर जज और एंकर को पगड़ी भेंट करने की अपनी खास अदायगी के लिए भी चर्चित रहे।
इंडियन आइडल के बाद मोती खान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने हमेशा आगे बढ़ने का फैसला किया और लगातार कदम बढ़ाए। मृदु भाषी, विनम्र, सरल स्वभाव और हमेशा हंसमुख रहने वाले मोती खान ने अपनी मस्त जिंदगी के साथ संगीत को नई दिशा दी।
देश-विदेश में मधुर आवाज का जादू
इंडियन आइडल फेम के बाद मोती खान ने राजस्थानी लोक और सूफी संगीत को मुख्यधारा में लाने का काम किया। उन्होंने देश भर में हजारों कार्यक्रम प्रस्तुत किए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई मंचों पर अपनी सुरीली आवाज से करोड़ों लोगों का दिल जीता।
अबू धाबी के BAPS हिंदू मंदिर जैसे प्रतिष्ठित स्थानों पर उनका प्रदर्शन हुआ।वे बॉलीवुड गीतों पर भी अपनी लोक शैली में परफॉर्मेंस देते रहे।दुबई, अमेरिका, यूके सहित कई देशों में उनके लाइव शो हुए।उनकी गायकी में राजस्थान की रेगिस्तानी संस्कृति, मांगणियार परंपरा और सूफियाना अंदाज़ का अनोखा मेल है, जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस अवार्ड: एक नई उपलब्धि
आज बड़ी खुशी की बात है कि युवा लोक कलाकार मोती खान को वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड्स द्वारा 'वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस' अवार्ड प्रदान किया जा रहा है। यह सम्मान उनके संगीत क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, निरंतर मेहनत और लाखों प्रशंसकों को दी गई प्रेरणा के लिए दिया जा रहा है।
यह उपलब्धि न केवल मोती खान के करोड़ों चाहने वालों के लिए बल्कि पूरे मिरासी (मांगणियार) समाज के लिए भी गर्व की बात है। यह पुरस्कार साबित करता है कि छोटे गांव से निकलकर भी कड़ी मेहनत और सच्चे समर्पण से वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं
हम सभी श्री मोती खान को इस सम्मान पर हार्दिक बधाई और मुबारकबाद देते हैं। उनकी इस सफलता पर पूरे राजस्थान और भारत को गर्व है।मोती खान की कहानी युवा पीढ़ी के लिए एक मिसाल है — कि सपनों को पूरा करने के लिए न तो बड़े शहरों की जरूरत है और न ही भारी संसाधनों की। बस लगन, मेहनत और अपनी जड़ों से जुड़ाव काफी है।