बाइक छोड़ कार में बैठे, रास्ते में हादसा: झुंझुनूं में 3 दोस्तों की मौत, एक गंभीर घायल
झुंझुनूं में देर रात भजन संध्या से लौट रहे चार दोस्तों की कार के सामने मवेशी आने से भीषण हादसा हो गया। कार कई बार पलटकर खेत में जा गिरी, जिसमें तीन युवकों की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हो गया। सभी दोस्तों ने रात ज्यादा होने के कारण बाइक छोड़कर कार से यात्रा करने का फैसला किया था।
झुंझुनूं जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे में तीन दोस्तों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा उस समय हुआ जब चारों दोस्त देर रात एक धार्मिक कार्यक्रम से लौट रहे थे। घायल युवक को गंभीर हालत में जयपुर के SMS अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
परिजनों के अनुसार, चारों दोस्त घर से करीब 13 किलोमीटर दूर सोनासर स्थित हीरा की ढाणी में भजन संध्या में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम देर रात करीब 1 बजे समाप्त हुआ। रात अधिक होने के कारण तीन दोस्तों ने बाइक से लौटने का प्लान बदल दिया। उनके साथी जितेंद्र वालिया ने सुझाव दिया कि इतनी रात में बाइक से सफर करना सुरक्षित नहीं है, इसलिए सभी उसकी कार से ही लौटें। इसके बाद चारों दोस्तों ने बाइक मंदिर परिसर में खड़ी कर दी और कार से झुंझुनूं के लिए रवाना हो गए।
घर से करीब 5 किलोमीटर पहले सोनासर-धनुरी मार्ग पर अचानक कार के सामने मवेशी आ गए। चालक ने वाहन को बचाने की कोशिश की, लेकिन कार अनियंत्रित हो गई और करीब चार बार पलटी खाते हुए सड़क से नीचे खेत में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि एक युवक का शव कार से करीब 10 फीट दूर खेत में मिला।
पुलिस के अनुसार, इस हादसे में चोमालो का मोहल्ला निवासी सुनील शुक्ला (33), रानी सती मंदिर के पास रहने वाले गौरव सैनी (21) और विजय ढंड (35) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, जितेंद्र वालिया (30) गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे पहले झुंझुनूं अस्पताल ले जाया गया और बाद में जयपुर रेफर किया गया।
मृतकों के परिवारों में इस घटना के बाद मातम छा गया है। विजय ढंड अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला था। उसके ऊपर माता-पिता, दो छोटे भाइयों और एक बहन की जिम्मेदारी थी। वह हलवाई का काम करता था और अभी अविवाहित था। आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी, ऐसे में उसकी मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है।
वहीं, गौरव सैनी अपने बीमार पिता की देखभाल करता था और इलाज का खर्च भी वही उठाता था। उसकी मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। गौरव का एक छोटा भाई है, जो अभी कमाने लायक नहीं है।
सुनील शुक्ला भी अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा रहा था। वह शादी-विवाह में पंडित का काम करता था और सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। मोहल्ले में उसकी सक्रियता और मिलनसार स्वभाव के कारण लोग उसे खास पहचानते थे।