जोधपुर एयरपोर्ट पर BJP विधायक का स्वागत है होने पर बिश्नोई संत लालदास ने क्यों जताई नाराजगी?

हरियाणा के BJP विधायक रणधीर पनिहार का जोधपुर एयरपोर्ट पर बिश्नोई समाज के कुछ लोगों द्वारा माला और साफा पहनाकर भव्य स्वागत किया गया। इससे बिश्नोई समाज के प्रमुख संत लालदास महाराज नाराज हो गए, क्योंकि पहले देवेंद्र बूड़िया ने पनिहार पर बदसलूकी और इस्तीफा देने के दबाव के गंभीर आरोप लगाए थे। समाज में एक धड़ा इसे सम्मान मान रहा है, तो दूसरा इसे समाज के स्वाभिमान पर चोट बता रहा है।

Dec 15, 2025 - 16:12
जोधपुर एयरपोर्ट पर BJP विधायक का स्वागत है होने पर बिश्नोई संत लालदास ने क्यों जताई नाराजगी?

हरियाणा के हिसार जिले की नलवा सीट से भाजपा विधायक रणधीर पनिहार हाल ही में जोधपुर पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनका कुछ लोगों द्वारा फूल-मालाओं और बिश्नोई समाज की पारंपरिक साफा पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। यह स्वागत सामान्य लग रहा था, लेकिन बिश्नोई समाज के प्रमुख संत लालदास महाराज ने इसे लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि "जिस व्यक्ति को समाज ने सबक सिखाना था, उसे सम्मान देकर गलती की गई"।

विवाद की जड़: पुराना आरोप और समाज का अपमान

यह विवाद नया नहीं है, बल्कि 2024 में शुरू हुए एक बड़े झगड़े से जुड़ा है। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र बूड़िया ने नवंबर 2024 में गंभीर आरोप लगाए थे कि:हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई के प्रचार के लिए 10 करोड़ रुपये का चंदा जुटाने का दबाव बनाया गया। 

जब वे ऐसा नहीं कर पाए, तो दिल्ली के हरियाणा भवन में रणधीर पनिहार ने उनके साथ बदसलूकी की, अपमानित किया और इस्तीफा देने के लिए दबाव डाला।

बूड़िया ने यह भी कहा कि पनिहार ने उन्हें दो दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने की कोशिश की।

बूड़िया ने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो जारी कर अपनी आपबीती सुनाई और जोधपुर में समाज के लोगों से मीटिंग की। इस घटना की सीसीटीवी फुटेज होने का भी दावा किया गया।

 रणधीर पनिहार का पक्ष

विधायक रणधीर पनिहार ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने कहा:"ये आरोप मनगढ़ंत और झूठे हैं। ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं।" 

"देवेंद्र बूड़िया आज भी मेरे दोस्त हैं, हमारी मुलाकातें होती रहती हैं।"

पनिहार कुलदीप बिश्नोई के करीबी माने जाते हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि कुलदीप के लिए वे अपनी विधायक सीट तक छोड़ने को तैयार हैं।

समाज में विभाजन और पुराना संदर्भ

बिश्नोई समाज का एक धड़ा इस स्वागत को "अपनों का सम्मान" मानकर सामान्य बता रहा है। 

दूसरा धड़ा, खासकर संत लालदास महाराज जैसे लोग, इसे समाज के स्वाभिमान और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष (बूड़िया) की गरिमा पर हमला मान रहे हैं।

2024 में इस विवाद के चलते महासभा में बड़ा उलटफेर हुआ था। कुलदीप बिश्नोई को संरक्षक पद से हटाया गया, 'बिश्नोई रत्न' उपाधि वापस ली गई और बाद में कुलदीप ने खुद इस्तीफा दे दिया।

देवेंद्र बूड़िया पर बाद में अलग रेप केस दर्ज हुआ, जिसमें वे गिरफ्तार भी हुए, लेकिन यह वर्तमान स्वागत विवाद से सीधे अलग है।

यह घटना बिश्नोई समाज में व्यक्तिगत रिश्तों, चुनावी समीकरणों और संगठन की गरिमा के बीच चल रही तनातनी को फिर से उजागर कर रही है। समाज के अंदर बहस छिड़ गई है कि क्या पुराने आरोपों के बावजूद ऐसे स्वागत उचित हैं या यह समाज के फैसलों का अपमान है।