जालोर के सायला में मां कात्यायनी देवी राज्य स्तरीय पशु मेला: 15 से 19 फरवरी 2026 तक होगा भव्य आयोजन
जालोर जिले के सायला में मां कात्यायनी देवी मंदिर प्रांगण (विराना रोड) पर 15 से 19 फरवरी 2026 तक राज्य/जिला स्तरीय पशु मेला आयोजित होगा। पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस मेले में बकरी, भेड़, ऊंट, दुधारू गाय-भैंस, सांड, बछड़ी, घोड़ा आदि पशुओं की प्रतियोगिताएं, प्रदर्शन और खरीद-बिक्री होगी। पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध होंगे और उत्साह से तैयारी चल रही है।
जालोर जिले के सायला उपखंड में मां कात्यायनी देवी मंदिर के पास विराना रोड पर एक बड़ा पशु मेला आयोजित होने जा रहा है। यह मेला 15 फरवरी से 19 फरवरी 2026 तक चलेगा। पशुपालन विभाग की ओर से मुख्य रूप से आयोजित इस मेले का संयुक्त तत्वावधान जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग द्वारा किया जा रहा है। राज्य सरकार की बजट घोषणा के अनुरूप यह राज्य स्तरीय (कुछ स्रोतों में जिला स्तरीय भी उल्लेखित) पशु मेला पशुपालकों के लिए उन्नत नस्ल के पशुओं की खरीद-बिक्री, प्रतियोगिताओं और पशुपालन संबंधी जानकारी का महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
इस मेले में विभिन्न प्रकार के पशुओं की प्रतियोगिताएं और प्रदर्शन होंगे, जिनमें शामिल हैं: बकरा और बकरी,नर व मादा भेड़,मादा व नर ऊंट,दुधारू गाय व गोवंश,सांड,भैंस,बछड़ी,भैंसा, सांड व बछेड़ा,घोड़ा व घोड़ी। ये प्रतियोगिताएं पशुपालकों को अपनी उन्नत नस्ल के पशुओं को प्रदर्शित करने और पुरस्कार जीतने का अवसर प्रदान करेंगी। मेले का उद्देश्य पशुपालकों की आय बढ़ाना, उन्नत नस्ल के पशुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत बनाना है।
राजस्थान सरकार ने पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य के हर जिले में चरणबद्ध रूप से पशु मेले आयोजित करने का फैसला लिया है। पहले चरण में 11 जिलों में ऐसे मेले तय किए गए हैं, जिसमें जालोर का यह मेला शामिल है। सायला में यह आयोजन मां कात्यायनी देवी मंदिर प्रांगण में होगा, जो धार्मिक महत्व के साथ-साथ पशुपालकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
वर्तमान में मेले की तैयारियां जोरों पर हैं। मेला समिति के अध्यक्ष और एसडीएम सूरज भान विश्नोई के नेतृत्व में दुकानों का आवंटन, सफाई व्यवस्था, प्रचार-प्रसार और पैम्फलेट वितरण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। पशुपालकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है, और वे अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं।यह मेला न केवल पशु व्यापार का केंद्र बनेगा, बल्कि पशुपालन विभाग द्वारा उन्नत तकनीकों, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और अन्य योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। आसपास के जिलों के पशुपालक भी इसमें सक्रिय रूप से हिस्सा ले सकते हैं।