जालोर की बेटी डिम्पल चौहान ने रचा इतिहास: पांचवें प्रयास में UPSC में 131वीं रैंक हासिल कर बनीं IAS
राजस्थान के जालोर जिले की डिम्पल चौहान ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 131वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का गौरव प्राप्त किया। यह उनका पांचवां प्रयास था, जिसमें दिल्ली में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत रहते हुए भी उन्होंने कड़ी मेहनत से सफलता पाई। IIT गुवाहाटी से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त डिम्पल ने पिछले प्रयास में 800+ रैंक के बाद हार नहीं मानी और जालोर व राजस्थान का नाम रोशन किया।
राजस्थान के जालोर जिले की एक प्रतिभाशाली बेटी ने कड़ी मेहनत और अटूट इच्छाशक्ति से देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की है। डिम्पल चौहान ने UPSC CSE 2025 के परिणामों में 131वीं रैंक प्राप्त कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित होने का गौरव प्राप्त किया है। यह उनकी पांचवीं कोशिश थी, जिसमें आखिरकार उनका सपना साकार हुआ।
डिम्पल चौहान मूल रूप से जालोर की रहने वाली हैं। उनके पिता डॉ. रमेश चौहान जालोर के पूर्व डिप्टी चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (DYCMHO) रह चुके हैं और रेडियोलॉजिस्ट हैं, जबकि मां सरोज चौहान एक शिक्षिका (प्रिंसिपल) हैं। डिम्पल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जालोर में पूरी की, जहां उन्होंने आठवीं तक की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद उन्होंने उदयपुर और कोटा से आगे की पढ़ाई की। उन्होंने आईआईटी गुवाहाटी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की, जो उनकी शैक्षणिक क्षमता का प्रमाण है।
सफलता की इस राह में डिम्पल को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पिछले प्रयास में उनकी रैंक लगभग 800-878 के आसपास रही थी, जिससे वे IAS बनने से चूक गई थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दिल्ली में केंद्र सरकार के व्यापार एवं कर विभाग (ट्रेड एंड टैक्स) में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत रहते हुए भी उन्होंने UPSC की तैयारी जारी रखी। नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ-साथ पढ़ाई का संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन उनकी लगन और धैर्य ने उन्हें कामयाबी दिलाई।
डिम्पल ने कभी हार मानने की नहीं सोचा। उन्होंने कहा कि जब तक नाम के आगे 'IAS' नहीं लगेगा, तब तक रुकना नहीं है। चार असफल प्रयासों के बाद पांचवें में उन्होंने यह साबित कर दिया कि असफलता सिर्फ सीखने का अवसर होती है। उनकी इस सफलता से जालोर जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। परिवार, रिश्तेदार, स्थानीय लोग और जिले के निवासी उन्हें बधाई दे रहे हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार का गौरव है, बल्कि पूरे राजस्थान और खासकर जालोर के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी है।