नौकरी के नाम पर 22 लाख की ठगी: दो सगे भाइयों को RAS अटेंडर और नगर निगम इंस्पेक्टर की जॉब का झांसा देकर उड़ाए पैसे

जयपुर के जामडोली में एक परिचित लल्लूराम ने दो सगे भाइयों को RAS अटेंडर (80 हजार मासिक सैलरी) और नगर निगम इंस्पेक्टर की नौकरी लगवाने का झांसा देकर 22 लाख रुपये ठग लिए। परिवार ने 15 लाख + 7 लाख दिए, अलवर में 5 दिन की फर्जी ट्रेनिंग करवाई, फर्जी चेक दिए लेकिन नौकरी नहीं लगी। तीन साल बाद धोखे का पता चला तो पुलिस में FIR दर्ज।

Mar 16, 2026 - 14:17
नौकरी के नाम पर 22 लाख की ठगी: दो सगे भाइयों को RAS अटेंडर और नगर निगम इंस्पेक्टर की जॉब का झांसा देकर उड़ाए पैसे

जयपुर। सरकारी नौकरी के लालच में एक परिवार को 22 लाख रुपये की चपत लग गई है। जयपुर के जामडोली इलाके में रहने वाले सुनील कुमार के दो छोटे भाइयों को अफसर स्तर की नौकरी लगवाने के नाम पर परिचित लल्लूराम ने धोखाधड़ी की। आरोपी ने 80 हजार रुपये मासिक वेतन वाली RAS अटेंडर और नगर निगम इंस्पेक्टर की पोस्ट बताकर परिवार को लालच दिया, फर्जी ट्रेनिंग करवाई और कुल 22 लाख रुपये ऐंठ लिए। तीन साल बीत जाने के बाद भी नौकरी नहीं लगी तो पीड़ित परिवार ने धोखे का भंडाफोड़ किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

कैसे शुरू हुई ठगी की साजिश?

मार्च 2023 में दौसा जिले के रहने वाले परिचित लल्लूराम जामडोली (आगरा रोड, जयपुर) में सुनील कुमार के घर आए। बातचीत के दौरान उन्होंने परिवार को बताया कि नगर निगम में वैकेंसी निकल रही है और उनके अधिकारियों से अच्छी जान-पहचान है। उन्होंने सुनील के दोनों छोटे भाइयों को नौकरी लगवाने का वादा किया।एक भाई को RAS (राजस्थान प्रशासनिक सेवा) का अटेंडर लगाने का झांसा दिया, जिसकी मासिक सैलरी 80 हजार रुपये बताई।दूसरे भाई को नगर निगम में इंस्पेक्टर की पोस्ट पर लगाने की बात कही।

आरोपी ने जॉब लगवाने के बदले पहले 15 लाख रुपये की मांग की। सरकारी नौकरी का लालच देखकर पीड़ित परिवार ने रिश्तेदारों से पैसे उधार लेकर आरोपी लल्लूराम को 15 लाख रुपये दे दिए।

फर्जी ट्रेनिंग का ड्रामा

अगस्त 2023 में आरोपी ने दोनों भाइयों को अलवर में 5 दिनों की ट्रेनिंग के लिए भेजा। ट्रेनिंग के दौरान रहने-खाने का खर्च भी 5 हजार रुपये अतिरिक्त वसूले। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद लल्लूराम ने परिवार को आश्वस्त किया कि नौकरी जल्द लग जाएगी और चिंता न करने को कहा।लेकिन महीनों बीतते गए, नौकरी नहीं लगी। जब दबाव बढ़ा तो आरोपी ने बहाना बनाया कि उसके जानकार अधिकारी का ट्रांसफर हो गया है, इसलिए 7 लाख रुपये और देने होंगे। परिवार ने फिर पैसे जुटाकर 7 लाख रुपये और दे दिए। कुल मिलाकर 22 लाख रुपये आरोपी के हवाले हो गए।

चेक देकर बनाया विश्वास, लेकिन फर्जी निकले

लंबे समय तक टालमटोल करने के बाद अप्रैल 2024 में लल्लूराम ने विश्वास दिलाने के लिए दौसा एसबीआई बैंक के तीन चेक दिए, जिनमें कुल 5.50 लाख रुपये भरे हुए थे। उसने कहा कि जल्द ही नौकरी लग जाएगी, थोड़ा इंतजार कर लो।पीड़ित जब बैंक गए तो पता चला कि चेक वाले अकाउंट में पैसे ही नहीं हैं। पैसे वापस मांगने पर आरोपी बार-बार समय मांगता रहा और टालता रहा। आखिरकार परिवार को धोखाधड़ी का पूरा एहसास हुआ।

पुलिस में शिकायत दर्ज

रविवार को सुनील कुमार ने जामडोली थाने में लल्लूराम के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया। हेड कॉन्स्टेबल लालाराम ने इसकी पुष्टि की है। पुलिस अब आरोपी की तलाश कर रही है और मामले की जांच कर रही है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.