जयपुर में बुलडोजर एक्शन पर भड़के बेनीवाल; सीएम भजनलाल को इतिहास की याद दिलाकर बोले- 'लोकतंत्र अंधी ताकत से नहीं चलता!'
जयपुर में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत धार्मिक स्थलों पर चले बुलडोजर और इंटरनेट बंदी ने अब बड़ा सियासी रूप ले लिया है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में सड़क विकास और अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई ने अब सूबे में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर प्रभावित इलाकों में धारा 163 लागू कर मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया था। प्रशासन के इस कड़े कदम और धार्मिक स्थलों को हटाए जाने के फैसले पर अब नागौर सांसद और आरएलपी (RLP) सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल का गुस्सा फूट पड़ा है।
बेनीवाल ने सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और राजस्थान सीएमओ को टैग करते हुए एक बेहद तीखा और विस्तृत राजनीतिक बयान जारी किया है।
भजनलाल सरकार को दिलाई वसुंधरा राजे के 'उस' दौर की याद
सांसद हनुमान बेनीवाल ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को इतिहास का आईना दिखाते हुए कहा कि विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर धार्मिक आस्थाओं से जुड़े स्थलों को जनता की सहमति के बिना अचानक हटाने की इस कार्रवाई ने राजस्थान के लोगों को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के शासनकाल की याद दिला दी है।
बेनीवाल ने स्पष्ट किया:
"प्रश्न केवल किसी एक मंदिर या किसी एक मस्जिद को गिराने का नहीं है, बल्कि करोड़ों आम नागरिकों की आंतरिक आस्था, उनकी सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का है। लोकतंत्र कभी भी बुलडोज़र की अंधी ताकत से नहीं चलता, बल्कि वह जनता के आपसी विश्वास और सम्मान से चलता है।"
कांग्रेस की 'रहस्यमयी चुप्पी' पर भी उठाए गंभीर सवाल
हनुमान बेनीवाल ने इस पूरे मामले में केवल सत्तारूढ़ बीजेपी को ही नहीं घेरा, बल्कि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर भी बड़ा हमला बोला है। बेनीवाल ने कहा कि जयपुर में मस्जिद और मंदिरों को ध्वस्त किए जाने की इस कार्रवाई पर कांग्रेस के बड़े और वरिष्ठ दिग्गजों ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है।
उन्होंने जनता की तरफ से सीधा सवाल पूछते हुए कहा— "क्या सत्तापक्ष (BJP) और मुख्य विपक्ष (Congress) के कुछ प्रमुख शीर्ष नेताओं के बीच धार्मिक आस्थाओं से जुड़े संवेदनशील मामलों में कोई अंदरूनी 'मौन सहमति' या फिक्सिंग बन चुकी है? वर्षों तक अल्पसंख्यकों के वोट से राजनीति चमकाने वाले बड़े कांग्रेसी नेता आज क्यों मौन हैं?"
बार-बार इंटरनेट बैन करने पर बिफरे सांसद, बताया गरीबों का नुकसान
जयपुर में इंटरनेट सेवाएं ठप किए जाने पर हनुमान बेनीवाल ने आम जनता और गरीब तबके के आर्थिक नुकसान का मुद्दा बेहद प्रखरता से उठाया। उन्होंने गृह मंत्रालय की रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के बाद राजस्थान पूरे देश में सबसे अधिक बार इंटरनेट बंद किए जाने वाला राज्य बन गया है, जो बेहद चिंता का विषय है।
बेनीवाल ने इंटरनेट बंदी से होने वाले नुकसानों को रेखांकित करते हुए कहा:
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डिजिटल पेमेंट ठप: इंटरनेट बंद होने से सारे यूपीआई (UPI) पेमेंट रुक जाते हैं, जिससे छोटे दुकानदारों और सब्जी विक्रेताओं का दैनिक व्यापार पूरी तरह बर्बाद हो जाता है।
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रोजगार पर लात: ओला, उबर जैसी कैब सेवाओं और स्विगी, जोमैटो जैसी ऑनलाइन फूड डिलीवरी से जुड़े हजारों युवाओं की रोज़ी-रोटी और दैनिक मजदूरी पूरी तरह रुक जाती है।
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यात्रियों की परेशानी: आम रेल और बस यात्रियों को ऑनलाइन टिकट, मोबाइल बैंकिंग और अन्य आवश्यक आपातकालीन सेवाओं के संचालन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
आरएलपी सुप्रीमो ने अंत में सरकार को नसीहत दी कि अगर अतिक्रमण हटाना या सड़क चौड़ीकरण करना बेहद अनिवार्य भी हो, तो भारी पुलिस बल तैनात कर सीधे तोड़फोड़ शुरू करने के बजाय संबंधित समुदायों, धर्मगुरुओं और प्रबुद्ध नागरिकों से बैठकर विस्तृत संवाद और सामाजिक सहमति बनानी चाहिए।