बाड़मेर: डॉक्टर से मारपीट के मामले में कोतवाली थाना एसआई लच्छाराम सस्पेंड, मेडिकल रिपोर्ट तलब किए बिना गिरफ्तारी की थी; आरोपी जमानत पर रिहा

बाड़मेर में 27 नवंबर को जिला अस्पताल की OPD में डॉक्टर दिनेश गढ़वीर के साथ मारपीट करने वाले आरोपी को मेडिकल रिपोर्ट तलब किए बिना गिरफ्तार कर जल्द जमानत दिलाने और गलत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की लापरवाही पर कोतवाली थाना एसआई लच्छाराम को एसपी नरेंद्र मीणा ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।

Dec 4, 2025 - 12:30
बाड़मेर: डॉक्टर से मारपीट के मामले में कोतवाली थाना एसआई लच्छाराम सस्पेंड, मेडिकल रिपोर्ट तलब किए बिना गिरफ्तारी की थी; आरोपी जमानत पर रिहा

बाड़मेर, 4 दिसंबर 2025: राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा का एक ताजा मामला सामने आया है, जिसमें एक डॉक्टर के साथ मारपीट करने वाले आरोपी को जल्दबाजी में जमानत दिलाने और जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में कोतवाली थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसआई) लच्छाराम को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) नरेंद्र मीणा ने की है। घटना ने न केवल स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

घटना का पूरा विवरण यह मामला 27 नवंबर 2025 को बाड़मेर के जिला अस्पताल में घटित हुआ। अस्पताल के आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर दिनेश गढ़वीर एक मरीज का इलाज कर रहे थे। इसी दौरान एक युवक ने डॉक्टर से विवाद शुरू कर दिया। छोटी-सी बात पर भड़क गया युवक ने डॉक्टर पर हाथ उठा दिया और उनके साथ जमकर मारपीट की। डॉक्टर गढ़वीर को चोटें आईं, लेकिन उन्होंने साहस दिखाते हुए तुरंत कोतवाली थाने पहुंचकर घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में आरोपी युवक का नाम और अन्य विवरण दर्ज किए गए थे।डॉक्टर ने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि आरोपी ने बिना किसी उकसावे के उन पर हमला किया, जिससे न केवल उनकी शारीरिक चोटें आईं, बल्कि मानसिक आघात भी पहुंचा। डॉक्टर गढ़वीर ने कहा, "मैं अपनी ड्यूटी निभा रहा था, लेकिन मरीज के परिजन ने अकारण हिंसा का सहारा लिया। पुलिस को उम्मीद थी कि मामला जल्द सुलझेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।" घटना के बाद डॉक्टर ने मेडिकल रिपोर्ट भी तैयार कराई, लेकिन पुलिस ने इसे तलब नहीं किया।

पुलिस की लापरवाही: सस्पेंशन के पीछे की वजहें पुलिस की जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। एसआई लच्छाराम ने डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट को बिना जांचे-पड़तावल के आरोपी को गिरफ्तार किया। इसके बाद, बिना पर्याप्त सबूतों के आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया गया। आरोप है कि मामले को गंभीरता से न लेते हुए गलत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया, जिससे आरोपी को आसानी से जमानत मिल गई। एसपी नरेंद्र मीणा ने जांच के बाद पाया कि एसआई ने प्रारंभिक जांच में लापरवाही बरती। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है, "डॉक्टर के साथ मारपीट की घटना दर्ज होने के बावजूद जांच अधिकारियों ने लापरवाही बरती और मामले को गंभीरता से नहीं लिया। मेडिकल रिपोर्ट तलब किए बिना गिरफ्तारी और जमानत की प्रक्रिया पूरी की गई, जो प्रक्रिया का उल्लंघन है।"एसपी मीणा ने इस लापरवाही को स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए खतरा माना। उन्होंने कहा, "डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके खिलाफ हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई हो और कोई ढिलाई न बरती जाए।" यह सस्पेंशन न केवल एसआई लच्छाराम के खिलाफ है, बल्कि पूरे थाने की जिम्मेदारी को दर्शाता है।

आरोपी की स्थिति और जमानत का विवाद आरोपी युवक, जिसका नाम अभी गोपनीय रखा गया है, को गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया। सवाल उठ रहा है कि इतनी जल्दबाजी में जमानत कैसे मिली? सूत्रों के अनुसार, गलत धाराओं के कारण मामला कमजोर साबित हुआ, जिसका फायदा आरोपी को मिला। डॉक्टर गढ़वीर ने जमानत के फैसले पर निराशा जताई और कहा, "ऐसे अपराधियों को सजा नहीं मिलेगी तो भविष्य में और डॉक्टर हिंसा का शिकार होंगे।" फिलहाल, आरोपी रिहा है, लेकिन एसपी के हस्तक्षेप के बाद मामला दोबारा खोला गया है। नई जांच में मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों को शामिल किया जा रहा है।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.