अरावली संरक्षण मुद्दे पर अशोक गहलोत का भाजपा सरकार पर तीखा हमला: '100 मीटर फॉर्मूला' को लेकर उठाए सवाल

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा पर भाजपा सरकार और केंद्र पर तीखा हमला बोला। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में केंद्र की समिति की सिफारिश स्वीकार कर अरावली को 100 मीटर ऊंचाई वाली भूमि तक सीमित किया, जिसे गहलोत ने खनन माफिया को बढ़ावा देने वाला बताया। उन्होंने कांग्रेस सरकार के अवैध खनन पर सख्ती के आंकड़े पेश किए और चेतावनी दी कि इससे थार मरुस्थल फैलेगा तथा राजस्थान का पर्यावरण खतरे में पड़ जाएगा। भाजपा ने इसे गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।

Dec 21, 2025 - 18:09
अरावली संरक्षण मुद्दे पर अशोक गहलोत का भाजपा सरकार पर तीखा हमला: '100 मीटर फॉर्मूला' को लेकर उठाए सवाल

जयपुर, 21 दिसंबर 2025: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर मौजूदा भाजपा सरकार और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा खनन माफिया से मिलीभगत कर रही है। गहलोत ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले और '100 मीटर' वाली परिभाषा को लेकर भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए, जिसे उन्होंने प्रदेश के पर्यावरण और भविष्य से खिलवाड़ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि सरकारी दस्तावेज ही भाजपा के झूठ को उजागर कर रहे हैं।

2010 बनाम 2025: '100 मीटर' परिभाषा का विवादास्पद इतिहास गहलोत ने याद दिलाया कि वर्ष 2003 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर अरावली पहाड़ियों को '100 मीटर' की ऊंचाई तक सीमित करने की परिभाषा अपनाई थी। इसे राज्य सरकार ने 16 फरवरी 2010 को सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट के जरिए प्रस्तुत किया, लेकिन कोर्ट ने महज तीन दिन बाद 19 फरवरी 2010 को इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। गहलोत ने कहा कि उनकी कांग्रेस सरकार ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए इसे स्वीकार किया और फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) से अरावली की मैपिंग करवाई।उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस सरकार ने पहली बार अवैध खनन रोकने के लिए रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग शुरू किया। 15 जिलों में सर्वे के लिए 7 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया। अवैध खनन की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक (SP) और जिला कलेक्टर को सौंपी गई, साथ ही पुलिस को भी कार्रवाई के अधिकार दिए गए, जिससे माफिया पर लगाम लगी।

गहलोत ने सवाल उठाया: "जो परिभाषा 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी, उसी '100 मीटर' फॉर्मूले को 2025 में केंद्र सरकार की समिति की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। राजस्थान की भाजपा सरकार ने इस रिपोर्ट का समर्थन क्यों किया? क्या यह दबाव था या कोई बड़ा खेल?"हालिया सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर 2025 के फैसले में केंद्र सरकार की समिति की सिफारिश स्वीकार की गई, जिसमें अरावली पहाड़ी को स्थानीय राहत से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भूमि रूप माना गया है। इससे राजस्थान में अरावली का करीब 90% हिस्सा संरक्षण से बाहर हो सकता है, जिसे पर्यावरणविद् और विपक्ष 'मौत की सजा' बता रहे हैं।

आंकड़े बताते हैं कांग्रेस की सख्ती और भाजपा की नरमी गहलोत ने अवैध खनन पर दोनों सरकारों के प्रदर्शन की तुलना करते हुए कहा कि उनकी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के नतीजे आंकड़ों में साफ दिखते हैं:जुर्माना वसूली: कांग्रेस सरकार (2019-2023) ने अवैध खनन से 464 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला, जबकि पिछली भाजपा सरकार (2013-2018) केवल 200 करोड़ तक सीमित रही। FIR दर्ज: कांग्रेस के 5 सालों में कुल 4,206 FIR दर्ज की गईं, जिनमें शुरुआती तीन सालों में ही 2019-20 में 930, 2020-21 में 760 और 2021-22 में 1,305 FIR शामिल हैं। वहीं, मौजूदा भाजपा सरकार के पहले साल (2024) में केवल 508 FIR दर्ज हुईं, जो कार्रवाई में गिरावट दिखाती है और माफिया के हौसले बुलंद करने का संकेत है। गहलोत ने कहा कि यह गिरावट साफ बताती है कि भाजपा सरकार खनन माफिया के प्रति नरम रुख अपना रही है।अरावली: राजस्थान की जीवनरेखा, न कि सिर्फ पहाड़पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि अरावली केवल पहाड़ियां नहीं, बल्कि राजस्थान की जीवनरेखा है। यह थार मरुस्थल को आगे बढ़ने से रोकती है, भूजल रिचार्ज करती है और उत्तर भारत की जलवायु को संतुलित रखती है। खेजड़ली कांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अमृता देवी की तरह हमें प्रकृति के लिए बलिदान की भावना से अरावली बचानी होगी।केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव (जो खुद राजस्थान से हैं) से अपेक्षा थी कि वे अरावली के संरक्षक बनेंगे, लेकिन फैसला इसके विपरीत है। गहलोत ने #SaveAravalli अभियान का समर्थन करते हुए लोगों से अपील की कि वे अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल बदलकर इस मुहिम में शामिल हों।

भाजपा का पलटवार भाजपा नेताओं, खासकर राजेंद्र राठौड़ ने गहलोत पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला 2002 की परिभाषा पर आधारित है, जिसे गहलोत की ही कैबिनेट ने मंजूर किया था। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी स्पष्ट किया कि नई परिभाषा से खनन में कोई छूट नहीं दी गई और 90% से अधिक अरावली संरक्षित रहेगी।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.