अजमेर की अरावली पहाड़ी पर लगी आग: वन विभाग और स्थानीय लोगों की त्वरित कार्रवाई से टला बड़ा हादसा
अजमेर के पुष्कर रेंज में अरावली पहाड़ी पर सूखी झाड़ियों में लगी आग को वन विभाग की टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से फायर लेन काटकर समय पर काबू पा लिया। इस तकनीक से आग का फैलाव रोका गया और बड़ा नुकसान टल गया।
अजमेर जिले के पुष्कर रेंज में स्थित अरावली पहाड़ियों पर हाल ही में सूखी झाड़ियों में अचानक भीषण आग लग गई। यह घटना सर्दियों के मौसम में आम है, जब सूखी घास और झाड़ियां आग पकड़ने के लिए आसान शिकार बन जाती हैं। आग की लपटें दूर तक दिखाई दे रही थीं, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा हो गया। हालांकि, वन विभाग की टीम की सतर्कता और स्थानीय निवासियों की सक्रिय मदद से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा वनक्षेत्र जलने से बच गया।
घटना का विवरण सूचना मिलते ही पुष्कर रेंज के वन रेंजर जय सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। आग सूखी झाड़ियों से शुरू होकर तेजी से फैल रही थी। पहाड़ी इलाका होने के कारण अग्निशमन वाहनों का पहुंचना मुश्किल था, इसलिए टीम को मैनुअल तरीके से आग बुझाने का सहारा लेना पड़ा। स्थानीय ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और टीम की मदद की। कई घंटों की कड़ी मेहनत के बाद आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई और वन्यजीवों को भी ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा।रेंजर जय सिंह ने बताया कि सर्दियों में ऐसी घटनाएं बढ़ जाती हैं क्योंकि झाड़ियां पूरी तरह सूखी होती हैं और हवा के झोंकों से आग तेजी से फैलती है। अक्सर असामाजिक तत्वों द्वारा फेंकी गई बीड़ी-सिगरेट की टुकड़ी या अन्य कारणों से आग लग जाती है। समय पर कार्रवाई न हुई होती तो आग पूरे वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकती थी।
फायर लेन तकनीक से आग पर काबू इस घटना में आग को रोकने के लिए वन विभाग ने 'फायर लेन' नामक विशेष तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया। फायर लेन एक प्रभावी बैरियर होती है जो आग के फैलाव को रोकती है।फायर लेन क्या है? यह ज्वलनशील सामग्री (जैसे सूखी घास, झाड़ियां, पत्तियां और छोटे पौधे) को पूरी तरह हटाकर बनाई गई एक चौड़ी नंगी पट्टी होती है। आमतौर पर इसकी चौड़ाई 10 से 60 फीट तक रखी जाती है, ताकि मिट्टी का उजला हिस्सा सामने आ जाए।कैसे बनाई जाती है? हाथ के औजारों (जैसे कुल्हाड़ी, फावड़े) या मशीनों की मदद से झाड़ियां काटी जाती हैं। कभी-कभी नियंत्रित आग (कंट्रोल्ड बर्न) जलाकर पट्टी को और मजबूत बनाया जाता है।काम कैसे करती है? आग जब इस पट्टी तक पहुंचती है तो उसके पास जलने के लिए कोई ईंधन नहीं बचता, जिससे वह आगे नहीं बढ़ पाती। इससे अग्निशमन टीम को सुरक्षित जगह मिलती है और आग को एक सीमित क्षेत्र में रोककर बुझाया जा सकता है।
अरावली पहाड़ियों का महत्व और जोखिम अरावली श्रृंखला राजस्थान की पर्यावरणीय रीढ़ है। पुष्कर और अजमेर क्षेत्र की ये पहाड़ियां न केवल जैव विविधता से भरपूर हैं बल्कि थार मरुस्थल के फैलाव को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यहां औषधीय पौधे, दुर्लभ वनस्पतियां और विभिन्न वन्यजीव पाए जाते हैं। हालांकि, सर्दियों में सूखे की वजह से आग का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसी घटनाएं न केवल वनस्पति को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि मिट्टी का क्षरण बढ़ाती हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करती हैं।वन विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं और फायर लेन पहले से बनाई जाती हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की सतर्कता और सहयोग ही ऐसी आपदाओं से बचाव की कुंजी है। इस घटना से एक बार फिर साबित हुआ कि त्वरित प्रतिक्रिया और सही तकनीक से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।