हरियाणा में SHO को 1 घंटे कोर्ट लॉकअप में रखा: वर्दी में सलाखों के पीछे दिखे, गवाही के लिए नहीं पहुंचे तो कैथल कोर्ट ने दिया आदेश

हरियाणा के कैथल कोर्ट ने सिरसा के बरागुढ़ा थाने के SHO इंस्पेक्टर राजेश कुमार को हत्या के मामले में गवाही न देने के कारण एक घंटे के लिए कोर्ट लॉकअप में बंद करने का आदेश दिया। वर्दी में सलाखों के पीछे दिखे इंस्पेक्टर को बार-बार नोटिस और गैर-जमानती वारंट के बावजूद कोर्ट में हाजिर न होने पर यह सजा मिली। कोर्ट ने उनकी सैलरी अटैच करने के भी निर्देश दिए।

Ashok Shera
Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026 Editor
September 12, 2025 • 9:08 AM  7.7k
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हरियाणा में SHO को 1 घंटे कोर्ट लॉकअप में रखा: वर्दी में सलाखों के पीछे दिखे, गवाही के लिए नहीं पहुंचे तो कैथल कोर्ट ने दिया आदेश
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हरियाणा में SHO को 1 घंटे कोर्ट लॉकअप में रखा: वर्दी में सलाखों के पीछे दिखे, गवाही के लिए नहीं पहुंचे तो कैथल कोर्ट ने दिया आदेश

हरियाणा के कैथल जिले की एक अदालत ने गुरुवार (11 सितंबर 2025) को एक चौंकाने वाला फैसला सुनाया, जिसमें सिरसा जिले के बरागुढ़ा थाने में तैनात स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) इंस्पेक्टर राजेश कुमार को एक घंटे के लिए कोर्ट लॉकअप में बंद कर दिया गया। यह कार्रवाई एक हत्या के मामले में बार-बार गवाही देने से बचने के कारण की गई। इंस्पेक्टर राजेश कुमार, जो पूरे घटना के दौरान अपनी वर्दी में सलाखों के पीछे नजर आए, इस घटना से न केवल पुलिस महकमे में बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गए हैं। आइए इस घटना को विस्तार से समझते हैं।

#### घटना का पूरा विवरण
कैथल की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहित अग्रवाल की अदालत में "स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम गौरव" नामक एक हत्या (मर्डर) के मामले की सुनवाई चल रही थी। इस मामले में इंस्पेक्टर राजेश कुमार जांच अधिकारी (IO) के रूप में नियुक्त थे। उनका काम था कि कोर्ट में मामले से जुड़ी गवाही दर्ज कराना, लेकिन वे लगातार कई सुनवाइयों में अनुपस्थित रहे। कोर्ट ने उन्हें कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन इंस्पेक्टर राजेश पर कोई असर नहीं हुआ।

- पहले चरण की कार्रवाई: कोर्ट ने इंस्पेक्टर की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। इसके बावजूद वे कोर्ट में हाजिर नहीं हुए।
- दूसरा कदम: अदालत ने कैथल के पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिए कि इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाए। साथ ही, उनकी सैलरी अटैच करने के आदेश भी जारी हो गए। यह कदम पुलिस अधिकारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी था, क्योंकि इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती, बल्कि विभागीय स्तर पर भी बदनामी होती।
- गुरुवार की घटना: आखिरकार, इन सख्त आदेशों के बाद इंस्पेक्टर राजेश कुमार सुबह 10:30 बजे कैथल कोर्ट पहुंचे। लेकिन जैसे ही वे अदालत में प्रवेश किए, जज मोहित अग्रवाल ने उन्हें तुरंत कस्टडी में लेने का आदेश दे दिया। कोर्ट के आदेशानुसार, पुलिस ने उन्हें वर्दी सहित कोर्ट परिसर के बक्शी खाना (लॉकअप) में बंद कर दिया, जो बंदियों के लिए बनाया गया है। यह लॉकअप सलाखों से घिरा होता है, जहां सामान्यतः अपराधियों को रखा जाता है।

इंस्पेक्टर को ठीक 11:30 बजे तक यानी पूरे एक घंटे तक सलाखों के पीछे रखा गया। इस दौरान वे अपनी पूरी वर्दी में दिखे, जो इस घटना को और भी शर्मनाक बना देता है। साढ़े 11 बजे उन्हें लॉकअप से बाहर निकाला गया, कोर्ट में पेश किया गया, जहां उनकी गवाही दर्ज की गई। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

#### मामले का बैकग्राउंड: क्यों था यह हत्या का केस?
यह मामला कैथल के सिवान थाने से जुड़ा एक पुराना हत्या का केस है, जो "स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम गौरव" के नाम से अदालत में दर्ज है। विवरणों के अनुसार, यह एक सनसनीखेज हत्याकांड था, जिसमें आरोपी गौरव पर गंभीर आरोप थे। इंस्पेक्टर राजेश कुमार को इस मामले की जांच सौंपी गई थी, और उनकी गवाही मामले के फैसले के लिए महत्वपूर्ण थी। लेकिन जांच अधिकारी के रूप में उनकी लापरवाही ने कोर्ट की प्रक्रिया को लंबा खींच दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जांच अधिकारियों की अनुपस्थिति से न्याय में देरी होती है, जो आरोपी और पीड़ित दोनों के हितों को प्रभावित करती है।

#### पुलिस महकमे में हलचल
इस घटना ने हरियाणा पुलिस में खलबली मचा दी है। कई पुलिसकर्मी इसे एक सबक मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे अतिरिक्त सख्ती बता रहे हैं। कैथल SP को जारी निर्देशों के तहत पुलिस ने पूरी प्रक्रिया का पालन किया, लेकिन यह पहली बार नहीं है जब किसी पुलिस अधिकारी को कोर्ट की अवमानना के लिए ऐसी सजा मिली हो। इससे पहले भी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को लॉकअप भेजने के आदेश दिए हैं, लेकिन जिला स्तर पर यह दुर्लभ है।

 कोर्ट का संदेश: न्याय प्रक्रिया का सम्मान अनिवार्य
जज मोहित अग्रवाल ने आदेश में स्पष्ट कहा कि गैर-जमानती वारंट और सैलरी अटैच होने के बाद भी हाजिर न होना कोर्ट की अवमानना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस अधिकारी भी कानून के दायरे में हैं और उनकी लापरवाही न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करती है। यह घटना न केवल इंस्पेक्टर राजेश के लिए शर्मिंदगी का कारण बनी, बल्कि पूरे पुलिस विभाग के लिए एक चेतावनी है।

यह घटना हरियाणा के न्यायिक इतिहास में दर्ज हो गई है, जहां एक वर्दीधारी अधिकारी को सलाखों के पीछे देखा गया। उम्मीद है कि इससे भविष्य में जांच अधिकारियों में जिम्मेदारी का भाव आएगा। यदि आपके पास इस मामले से जुड़ी कोई अतिरिक्त जानकारी है, तो साझा करें।

Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026 Editor

"द खटक" एडिटर-इन-चीफ

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