जमीन बेचकर मायरे का सामान खरीदा, चुरा ले गए बदमाश: तलवार और डंडे लेकर आए, बुजुर्ग पति-पत्नी को रस्सी से बांधा, गहने और कैश ले गए
उदयपुर के बाघपुरा थाना क्षेत्र के सरादित गांव में 5-6 नकाबपोश बदमाशों ने रात 1 बजे बुजुर्ग लिम्बाराम अहारी (75) और सूरज देवी (70) को तलवार-डंडों के बल पर रस्सी से बांधकर लूट लिया। बेटी के मायरे के लिए जमीन बेचकर खरीदा गया ढाई लाख नकद, जेवरात और सामान चोरी कर लिया गया। पुलिस ने डकैती का केस दर्ज कर जांच शुरू की।
उदयपुर, 21 नवंबर 2025: राजस्थान के उदयपुर जिले के बाघपुरा थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना ने ग्रामीण इलाकों में दहशत फैला दी है। बीती रात करीब 1 बजे सरादित गांव के एक एकाकी घर में घुसे 5 से 6 नकाबपोश बदमाशों ने एक बुजुर्ग दंपति को क्रूरता से लूट लिया। 75 वर्षीय लिम्बाराम अहारी और उनकी 70 वर्षीय पत्नी सूरज देवी को तलवारों और डंडों के बल पर बंधक बनाकर न केवल उनके घर का सारा सामान लूट लिया, बल्कि उनकी जिंदगी भर की कमाई भी छीन ली। यह घटना तब घटी जब दंपति अपनी बेटी के मायरे के लिए जमीन बेचकर खरीदी गई चीजें संभाल रहे थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन बदमाशों का अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है।
घटना का पूरा विवरण: रात के सन्नाटे में धावा सरादित गांव उदयपुर के पहाड़ी जंगलों के बीच बसा एक छोटा सा छितरी आबादी वाला इलाका है, जहां बिजली-पानी जैसी सुविधाएं भी मुश्किल से पहुंच पाती हैं। यहां लिम्बाराम अहारी और उनकी पत्नी सूरज देवी कई वर्षों से अकेले रहते आ रहे हैं। दोनों के बच्चे बाहर रहते हैं, और दंपति मुख्य रूप से खेती-बाड़ी और पशुपालन से गुजारा चलाते हैं। शुक्रवार को उनकी बेटी का मायरा था, जिसके लिए वे विशेष रूप से उत्साहित थे।मायरे की तैयारियों के चक्कर में लिम्बाराम ने कुछ दिनों पहले अपनी एक छोटी सी जमीन बेच दी थी। इस पैसे से उन्होंने बेटी के लिए लगभग ढाई लाख रुपये मूल्य के जेवरात, नकदी, नए कपड़े, बर्तन, मिठाई और अन्य घरेलू सामग्री खरीद ली थी। ये सारी चीजें घर के एक कमरे में सुरक्षित रखी गई थीं। बुजुर्ग दंपति ने सोचा भी नहीं था कि उनकी खुशियां इतनी जल्दी छिन जाएंगी।बीती रात करीब 1 बजे, जब गांव में सन्नाटा पसर चुका था, तभी अचानक घर के बाहर हलचल हुई। लिम्बाराम ने दरवाजे पर खटखटाहट सुनी, लेकिन बाहर अंधेरा होने के कारण वे सतर्क नहीं हो सके। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, 5 से 6 नकाबपोश बदमाश अंदर घुस पड़े। उनके हाथों में चमकती तलवारें, लोहे के डंडे और रस्सियां थीं। बदमाशों ने बिना देर किए बुजुर्ग दंपति पर हमला बोल दिया। लिम्बाराम को डंडे से पीटा, जबकि सूरज देवी को धमकाते हुए चुप रहने को कहा। विरोध करने पर बदमाशों ने दोनों को मजबूती से रस्सी से बांध दिया—लिम्बाराम को एक कुर्सी पर और सूरज देवी को बिस्तर पर।बंधे हुए दंपति के सामने ही बदमाशों ने घर की तलाशी ली। मायरे के लिए रखे गए सोने-चांदी के जेवरात, ढाई लाख रुपये नकद, महंगे कपड़े, बर्तन और अन्य सामान को उन्होंने बैगों में भर लिया। पूरे घटनाक्रम में करीब 20-25 मिनट लगे, लेकिन बुजुर्गों के लिए ये पल घंटों जैसे बीते। बदमाशों ने जाते-जाते धमकी दी कि अगर पुलिस को बताया तो जान से मार देंगे। सुबह होते ही पड़ोसियों ने दंपति को बंधे हुए देखा और उन्हें आजाद किया।
पीड़ितों का दर्द: जीवन भर की कमाई पर हाथ साफ लिम्बाराम अहारी (75) ने बताया, "हमने बेटी के मायरे के लिए सब कुछ बेच-खरीदकर जमा किया था। जमीन बेची, जेवर बनवाए, कपड़े सिलवाए। ये सब हमारी खुशियां थीं। अब सब चला गया। बदमाशों ने हमें बुरी तरह पीटा, हाथ-पैरों में चोटें आई हैं।" उनकी पत्नी सूरज देवी (70) रोते हुए बोलीं, "रात को डर से नींद नहीं आ रही थी। वे तलवार लहराते हुए आए, हम क्या करते? बस प्रार्थना की कि जिंदा बच जाएं।" दंपति को मामूली चोटें आई हैं, लेकिन मानसिक आघात गहरा है। डॉक्टरों ने उन्हें दवा दी है, लेकिन डर के मारे वे अब घर से बाहर निकलने को तैयार नहीं।यह घटना ग्रामीण इलाकों में बढ़ते अपराध की पोल खोलती है। सरादित जैसे दूरस्थ गांवों में पुलिस चौकी का अभाव और सड़कें न होने से अपराधी आसानी से भाग जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल के रास्ते से बदमाश अक्सर आते-जाते हैं, लेकिन शिकायतें दर्ज नहीं होतीं।
पुलिस की कार्रवाई: जांच तेज, लेकिन सुराग नहीं बाघपुरा थाना प्रभारी ने बताया कि सुबह 6 बजे पीड़ितों की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। "हमने 5-6 संदिग्धों के खिलाफ धारा 395 (डकैती), 323 (मारपीट), 452 (घर में घुसकर लूट) और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया, जहां से कुछ सुराग मिले हैं। सीसीटीवी फुटेज और आसपास के गांवों में पूछताछ की जा रही है। जल्द ही बदमाशों को गिरफ्तार कर लेंगे।" पुलिस ने ग्रामीणों से अपील
की है कि संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दें। साथ ही, जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है।
समाज का संदेश: सुरक्षा पहले, सतर्कता जरूरी यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। बुजुर्गों के लिए विशेष सुरक्षा योजनाओं की जरूरत है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। विशेषज्ञों का कहना है कि मायरे जैसे अवसरों पर चोरी की वारदातें बढ़ जाती हैं, इसलिए सामान को बैंक लॉकर में रखना चाहिए। स्थानीय पंचायत ने भी बैठक बुलाई है, जहां गांव की सुरक्षा पर चर्चा होगी।