सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान पंचायत चुनाव देरी मामले में हस्तक्षेप से किया इनकार, याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में पंचायत चुनावों में हो रही कथित देरी पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता बिहारीलाल रणवा एवं अन्य की SLP को खारिज करते हुए कहा कि कोर्ट इस मामले में दखल देने के इच्छुक नहीं है। याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट या अन्य उपयुक्त मंच पर जाने की स्वतंत्रता है। याचिका में आरोप था कि सरकार 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने के पूर्व आश्वासन और हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इससे अब 15 अप्रैल 2026 की समय-सीमा पर दबाव बढ़ गया है, और कोई देरी होने पर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की जा सकती है।

Mar 12, 2026 - 19:16
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान पंचायत चुनाव देरी मामले में हस्तक्षेप से किया इनकार, याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने का निर्देश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में हो रही कथित देरी पर सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता बिहारीलाल रणवा एवं अन्य की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को स्पष्ट रूप से कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया में समय सीमा या निर्देशों का उल्लंघन होता है, तो वे राजस्थान हाईकोर्ट या किसी अन्य उपयुक्त मंच के समक्ष जा सकते हैं।

याचिकाकर्ताओं का मुख्य आरोप

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि राजस्थान सरकार पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को जानबूझकर विलंबित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि राज्य सरकार ने पहले सुप्रीम कोर्ट में आश्वासन दिया था कि चुनाव प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 तक पूरी कर ली जाएगी। ऐसे में याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप की मांग की थी ताकि निर्धारित समय-सीमा के भीतर चुनाव सुनिश्चित हो सकें।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा, "इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए हम इच्छुक नहीं हैं।" अदालत ने जोर दिया कि यदि कोई उल्लंघन या देरी का मुद्दा उठता है, तो याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के समक्ष स्वतंत्र रूप से याचिका दायर कर सकते हैं। इससे स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर सीधे दखल देने से परहेज किया और मामले को हाईकोर्ट स्तर पर ही रखा।

पृष्ठभूमि: हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट के 14 नवंबर 2025 के फैसले से जुड़ा है, जिसमें 439 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं (पंचायत) और निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक पूर्ण कर दिए जाएं। साथ ही, सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन (delimitation) की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया गया था।

इस हाईकोर्ट आदेश के खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं। सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने भी शीर्ष अदालत में आश्वासन दिया था कि समय-सीमा के भीतर चुनाव करा लिए जाएंगे। परिसीमन से जुड़ी कुछ चुनौतियां पहले ही खारिज हो चुकी हैं, जिससे 15 अप्रैल की डेडलाइन पर अब कोई बड़ा कानूनी बाधा नहीं बची है।

वर्तमान स्थिति और प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पंचायत चुनाव की समय-सीमा पर दबाव बढ़ गया है। राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार को अब 15 अप्रैल 2026 तक पूरी प्रक्रिया (परिसीमन, मतदाता सूची संशोधन, नामांकन, मतदान आदि) पूरी करनी होगी। यदि कोई देरी होती है, तो याचिकाकर्ता हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर सकते हैं।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.