‘टॉक्सिक’ कहकर छोड़ी AAP… फिर क्यों भड़की सियासत? राघव चड्ढा पर लगे बड़े आरोप

AAP छोड़ने के बाद राघव चड्ढा घिरे सवालों में—सौरभ भारद्वाज के गंभीर आरोप, क्या है पूरा सच?

Apr 28, 2026 - 11:10
‘टॉक्सिक’ कहकर छोड़ी AAP… फिर क्यों भड़की सियासत? राघव चड्ढा पर लगे बड़े आरोप

नई दिल्लीआम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राघव चड्ढा को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। 27 अप्रैल को चड्ढा द्वारा AAP को “टॉक्सिक” बताने और पार्टी छोड़ने के फैसले को कॉर्पोरेट जॉब स्विच से तुलना करने के बाद पार्टी के भीतर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

AAP नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो जारी कर चड्ढा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें पहचान दी, यहां तक कि उनकी निजी जिंदगी तक में योगदान दिया। भारद्वाज ने तंज कसते हुए कहा, “अगर हम आपको सांसद नहीं बनाते, तो आपकी शादी भी नहीं हुई होती। आज जो पहचान है, वो पार्टी की देन है।”

‘कॉर्पोरेट स्विच’ बयान पर पलटवार

राघव चड्ढा ने अपने वीडियो में कहा था कि AAP का वर्क कल्चर “टॉक्सिक” हो गया था, इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने इसे एक सामान्य कॉर्पोरेट नौकरी बदलने जैसा बताया।

इस पर जवाब देते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि किसी भी कंपनी को छोड़ने से पहले नोटिस पीरियड दिया जाता है, लेकिन चड्ढा ने “धोखा देने का रास्ता चुना।” उन्होंने आरोप लगाया कि चड्ढा पिछले एक साल से भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहे थे।

बीजेपी से साजिश के आरोप

भारद्वाज ने दावा किया कि राघव चड्ढा संसद में जिन मुद्दों को उठा रहे थे, उन पर पहले से ही भाजपा काम कर रही थी। उन्होंने इसे एक “बड़ी साजिश” का हिस्सा बताया।

उनके अनुसार, एयरपोर्ट पर महंगे समोसे, गिग वर्कर्स के अधिकार, पैटरनिटी लीव और ट्रैफिक जैसी समस्याओं को उठाना एक रणनीति के तहत किया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर चड्ढा को इन मुद्दों पर संसद में नहीं रोका।

सोशल मीडिया पर भी विरोध

BJP जॉइन करने के बाद राघव चड्ढा को सोशल मीडिया पर भी विरोध का सामना करना पड़ा। खासतौर पर युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता पर असर देखने को मिला। इंस्टाग्राम पर #unfollowraghavchadha ट्रेंड करने लगा और रिपोर्ट्स के मुताबिक 24 घंटे के भीतर उनके करीब 10 लाख फॉलोअर्स कम हो गए।

दल-बदल कानून पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सबसे बड़ा सवाल दल-बदल विरोधी कानून को लेकर खड़ा हो गया है। AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 ने पार्टी छोड़ दी है, जो कुल संख्या का दो-तिहाई है।

इनमें से राघव चड्ढा समेत कुछ सांसद BJP में शामिल हो चुके हैं, जबकि बाकी के भी उसी राह पर जाने की चर्चा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन सांसदों की सदस्यता जाएगी या फिर दो-तिहाई बहुमत के आधार पर वे अपनी सीट बचा पाएंगे।

संविधान के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई विधायक या सांसद एक साथ दल बदलते हैं, तो इसे “विभाजन” नहीं बल्कि “विलय” माना जा सकता है, जिससे उनकी सदस्यता बच सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला संबंधित सदन के सभापति या अध्यक्ष द्वारा लिया जाता है।

आगे क्या?

राघव चड्ढा के इस कदम ने न सिर्फ AAP को बड़ा झटका दिया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दल-बदल कानून के तहत क्या निर्णय लिया जाता है और इस सियासी टकराव का क्या असर पड़ता है।

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