जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) के ट्रोमा सेंटर में मरीजों की परेशानी: पैर कटने के बावजूद इलाज के लिए धनवंतरी ओपीडी के चक्कर काटने पड़ रहे

जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) के ट्रोमा सेंटर में गंभीर घायल मरीजों (जिनके पैर कट चुके या फ्रैक्चर हुए हैं) को अनावश्यक रूप से रेफरेंस के लिए धनवंतरी ओपीडी भेजा जा रहा है, जिससे परिजनों को एम्बुलेंस में चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जबकि रेफरेंस सिस्टम ऑनलाइन है और डॉक्टर खुद बेड पर आ सकते हैं। कई मामलों में पैर कटे मरीजों को भी बाहर भेजा गया, जो शर्मनाक है। ट्रोमा इंचार्ज डॉ. राजेंद्र मांडिया ने इसे गलत बताया और जांच का आश्वासन दिया।

Mar 13, 2026 - 16:12
जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) के ट्रोमा सेंटर में मरीजों की परेशानी: पैर कटने के बावजूद इलाज के लिए धनवंतरी ओपीडी के चक्कर काटने पड़ रहे

जयपुर। सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) का ट्रोमा सेंटर, जो राज्य का प्रमुख आपातकालीन और गंभीर घायल मरीजों का इलाज केंद्र है, में एक बार फिर व्यवस्था पटरी से उतरती नजर आ रही है। यहां भर्ती गंभीर रूप से जख्मी मरीजों—जिनके हाथ-पैर कट चुके हैं या फ्रैक्चर हो गए हैं—को इलाज शुरू करने या ऑपरेशन से पहले अनावश्यक रूप से रेफरेंस के लिए धनवंतरी ओपीडी (मुख्य भवन) भेजा जा रहा है। यह प्रक्रिया मरीजों और उनके परिजनों के लिए बेहद तकलीफदेह साबित हो रही है, जबकि अस्पताल में रेफरेंस सिस्टम पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध है और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर खुद मरीज के बेड पर जाकर जांच करते हैं।

ट्रोमा सेंटर में भर्ती मरीजों को डॉक्टरों द्वारा दूसरे विभागों (खासकर जनरल सर्जरी) के रेफरेंस के लिए मुख्य भवन में भेजा जा रहा है। गंभीर हालत वाले मरीजों को एम्बुलेंस में लादकर धनवंतरी ओपीडी पहुंचाया जा रहा है, जहां लंबा इंतजार करने के बाद रेफरेंस मिलता है। यह स्थिति तब है जब ट्रोमा सेंटर में ही जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और अन्य संबंधित विभागों के डॉक्टर नियमित रूप से उपलब्ध रहते हैं और सर्जरी भी करते हैं।

विशिष्ट मामलों में मरीजों की दुर्दशा

देशराज (30 वर्ष, टोंक जिला): 9 मार्च को सड़क दुर्घटना में एक पैर पूरी तरह कट गया और दूसरा पैर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। 12 मार्च को ट्रोमा सेंटर से रेफरेंस के लिए धनवंतरी ओपीडी भेज दिया गया। परिजनों को बड़ी मुश्किल से एम्बुलेंस में बैठाकर ले जाना पड़ा। वहां करीब एक घंटे इंतजार के बाद सर्जरी विभाग के डॉक्टर से मिलकर रेफरेंस लिया जा सका।गोविंद (21 वर्ष): दुर्घटना में दोनों पैर गंभीर रूप से जख्मी हो गए। ट्रोमा डॉक्टरों ने सर्जरी विभाग के रेफरेंस के लिए धनवंतरी ओपीडी भेज दिया, जिससे मरीज और परिजन परेशान हुए।साहिल: एक्सीडेंट में एक पैर में फ्रैक्चर हुआ। ट्रोमा से ओपीडी रेफरेंस भेजा गया, जहां परिजनों को उसे कंधे का सहारा देकर डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा।ये मामले दर्शाते हैं कि कितने गंभीर मरीजों को बेवजह चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जबकि उनकी हालत ऐसी है कि उन्हें तत्काल इलाज की जरूरत है।

ट्रोमा सेंटर इंचार्ज का बयान

ट्रोमा सेंटर के इंचार्ज और जनरल सर्जरी यूनिट के एचओडी डॉ. राजेंद्र मांडिया ने इस मुद्दे पर कहा कि सर्जरी विभाग के मरीजों को रेफरेंस के लिए धनवंतरी ओपीडी भेजना पूरी तरह गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्जरी का रेफरेंस ट्रोमा सेंटर में ही उपलब्ध है। अगर ऐसा हो रहा है तो यह गलती है और वे इसे जांच करवाएंगे।डॉ. मांडिया खुद ट्रोमा सेंटर के इंचार्ज हैं और यहां जनरल सर्जरी सहित अन्य विभागों के डॉक्टर नियमित विजिट और सर्जरी करते हैं। इसके बावजूद मरीजों को बाहर भेजना न केवल शर्मनाक है, बल्कि मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ भी माना जा रहा है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.