एक युवती पर दो पतियों का दावा: अनोखी प्रेम कहानी की कानूनी जंग, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर
जम्मू-कश्मीर की शकीला अख्तर पर राजस्थान के जितेंद्र सिंह और जम्मू-कश्मीर के शब्बीर अहमद खान दोनों ने पति होने का दावा किया है। जितेंद्र ने राजस्थान हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर कर 16 फरवरी 2025 को फिरोजपुर में हुई शादी के दस्तावेज पेश किए, जबकि शब्बीर ने श्रीनगर हाईकोर्ट में 12 जून 2024 के निकाहनामा के साथ सुरक्षा की मांग की। पुलिस को युवती नहीं मिल रही, सुनवाई 10 और 13 मार्च 2026 को प्रस्तावित। यह अनोखी प्रेम कहानी अब दो हाईकोर्ट में उलझ गई है।
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले की रहने वाली युवती शकीला अख्तर की प्रेम कहानी अब एक जटिल कानूनी विवाद में तब्दील हो गई है। इस मामले में दो अलग-अलग युवकों—राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के सुदरासन गांव निवासी जितेंद्र सिंह और जम्मू-कश्मीर के शब्बीर अहमद खान—ने शकीला को अपनी पत्नी बताते हुए अलग-अलग हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। यह अनोखी स्थिति राजस्थान और जम्मू-कश्मीर दोनों राज्यों को सीधे प्रभावित कर रही है, जहां पुलिस और अदालतें युवती की तलाश और सुरक्षा के मुद्दे पर सक्रिय हैं।
जितेंद्र सिंह का पक्ष और राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका
जितेंद्र सिंह ने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दायर की है। उनका दावा है कि उन्होंने शकीला अख्तर से 16 फरवरी 2025 को पंजाब के फिरोजपुर में शादी की थी। याचिका में उन्होंने शादी से संबंधित दस्तावेज, लिव-इन रिलेशनशिप सर्टिफिकेट और अन्य प्रमाण पेश किए हैं।
जितेंद्र के अनुसार, वह एक निजी कंपनी में ठेके पर काम करने जम्मू गए थे, जहां शकीला से उनकी नजदीकियां बढ़ीं। परिवार की सहमति से दोनों ने फिरोजपुर में शादी रचाई और साथ रहने लगे। कुछ समय बाद शकीला के परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। जम्मू पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया और शकीला को जम्मू ले गई, लेकिन शकीला ने जितेंद्र के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। इसके बावजूद उसे जितेंद्र के साथ नहीं भेजा गया। इस स्थिति में जितेंद्र ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया।
कोर्ट की कार्यवाही: याचिका पर पहली सुनवाई 30 अक्टूबर 2025 को हुई, जहां प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर शकीला को पेश करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद 23 फरवरी 2026 तक कुल 7 तारीखों पर सुनवाई हो चुकी है।
ताजा अपडेट: 23 फरवरी 2026 के आदेश में सरकारी वकील ने शकीला की तलाश के लिए और समय मांगा। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने अगली सुनवाई 10 मार्च 2026 तय की।
आज की सुनवाई: मंगलवार (10 मार्च 2026) को यह मामला जस्टिस फरजंद अली की कोर्ट में सूचीबद्ध है। डीडवाना के बरड़वा थाने के एसएचओ महेंद्र सिंह जांच दस्तावेजों के साथ कोर्ट में पेश होंगे।
पुलिस सर्च: हाईकोर्ट के निर्देश पर बरड़वा थाना पुलिस ने CRPF की मदद से जम्मू-कश्मीर में व्यापक तलाश अभियान चलाया, जिसमें अनंतनाग सहित कई इलाकों की छानबीन की गई। लेकिन शकीला या शब्बीर अहमद खान का कोई सुराग नहीं मिला।
शब्बीर अहमद खान का पक्ष और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में याचिका
दूसरी ओर, शब्बीर अहमद खान ने श्रीनगर हाईकोर्ट (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट) में याचिका दायर की है। उन्होंने शकीला को अपनी पत्नी बताते हुए निकाहनामा पेश किया, जिसमें दावा है कि दोनों का निकाह 12 जून 2024 को हुआ था। याचिका में कहा गया है कि शकीला के परिजन इस निकाह को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए दोनों की जान-माल की सुरक्षा प्रदान की जाए।हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को निर्धारित है।
मामले में अजीब मोड़ और चुनौतियां
यह प्रेम कहानी अब दो राज्यों की अदालतों में उलझ गई है, जहां एक ही युवती पर दो अलग-अलग शादियों के दावे हैं। पुलिस को शकीला नहीं मिल रही है, और जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों में स्थानीय सहयोग न मिलने से सर्च अभियान मुश्किल हो रहा है। दोनों पक्षों के दावों के बीच सच्चाई का पता लगाना अदालतों और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।