सांभर क्षेत्र में मौसम का यू-टर्न: बूंदाबांदी से किसानों की बढ़ी धड़कनें, रबी की फसल पर संकट के बादल

"सांभर क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ के कारण अचानक मौसम बदला और हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। रबी की फसलों (गेहूं, सरसों, चना) की कटाई के बीच बारिश और ठंडी हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जानें तापमान में कितनी गिरावट दर्ज की गई और कृषि विशेषज्ञों की क्या सलाह है।"

Mar 19, 2026 - 15:24
सांभर क्षेत्र में मौसम का यू-टर्न: बूंदाबांदी से किसानों की बढ़ी धड़कनें, रबी की फसल पर संकट के बादल

सांभर लेक/जयपुर। सांभर क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों में गुरुवार सुबह मौसम ने अचानक करवट बदल ली। आसमान में छाए घने काले बादलों और हल्की बूंदाबांदी ने किसानों की चिंता को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। वर्तमान में रबी की फसलों की कटाई का सीजन चरम पर है, ऐसे में बेमौसम की यह बारिश 'सोने जैसी' फसल के लिए आफत साबित हो सकती है।

पश्चिमी विक्षोभ का असर, तापमान में गिरावट

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की सक्रियता की वजह से क्षेत्र के मौसम में यह अचानक बदलाव आया है। इसके प्रभाव से न केवल बादल छाए हुए हैं, बल्कि ठंडी हवाओं के साथ हल्की बारिश भी दर्ज की गई है।

मौसम के इस बदलाव का असर पारे पर भी दिखा है:

  • अधिकतम तापमान: 26°C

  • न्यूनतम तापमान: 17°C

कटी पड़ी फसलों पर 'खराबे' का डर

सांभर के ग्रामीण इलाकों में गेहूं, सरसों और चने की फसलें पककर पूरी तरह तैयार हैं। अधिकांश खेतों में कटाई का काम जोरों पर चल रहा है, तो कई जगह फसलें कटकर खलिहानों और खेतों में खुले में पड़ी हैं।

किसानों की मुख्य चिंताएं:

  1. गुणवत्ता पर असर: हल्की बूंदाबांदी से भी अनाज का रंग काला पड़ सकता है और चमक कम हो सकती है।

  2. नमी का खतरा: कटी हुई फसल भीगने से उसमें नमी बढ़ जाएगी, जिससे भंडारण और बाजार में सही दाम मिलने में समस्या आएगी।

  3. आर्थिक नुकसान: साल भर की कड़ी मेहनत के बाद ऐन वक्त पर बारिश किसानों के मुनाफे पर पानी फेर सकती है।

"हमने सुबह से ही काम तेज कर दिया है। मौसम का कोई भरोसा नहीं है, इसलिए कोशिश है कि जितनी जल्दी हो सके फसल को सुरक्षित स्थान या तिरपाल के नीचे पहुँचा दिया जाए।" — स्थानीय किसान

कृषि विशेषज्ञों की सलाह: बरतें ये सावधानियां

खराब मौसम को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है:

  • सुरक्षित भंडारण: कटी हुई उपज को खुले में न छोड़ें। यदि संभव हो तो उसे पक्के गोदामों में रखें।

  • तिरपाल का प्रयोग: खेतों में पड़ी फसल को अच्छी तरह से तिरपाल या प्लास्टिक शीट से ढक दें ताकि बारिश का पानी अंदर न जाए।

  • कटाई में जल्दबाजी: यदि फसल पूरी पक चुकी है, तो मौसम साफ होते ही अतिरिक्त श्रमिक लगाकर कटाई का काम जल्द निपटाएं।

प्रशासन की नजर

अचानक बदले इस मिजाज के बाद प्रशासन और कृषि विभाग भी अलर्ट मोड पर है। अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि नुकसान का सही आकलन किया जा सके। फिलहाल, किसानों के लिए अगले 24 से 48 घंटे काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं।

Kashish Sain Bringing truth from the ground