“यह हादसा नहीं, मर्डर है…” बरगी क्रूज त्रासदी पर उठा गुस्सा, 13 मौतों के बाद टूरिज्म विभाग पर गंभीर सवाल!
क्रूज पलटा, 13 जानें गईं… लेकिन असली सवाल अभी बाकी—क्या ये हादसा था या बड़ी लापरवाही?
बरगी डैम में 30 अप्रैल को हुआ क्रूज हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई गंभीर सवालों और गुस्से का केंद्र बन गया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। जैसे-जैसे सर्च ऑपरेशन आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे पीड़ित परिवारों और उनके करीबियों का आक्रोश भी तेज होता जा रहा है।
“यह एक्सीडेंट नहीं, मर्डर है…”
हादसे में जान गंवाने वाले कामराज के दोस्त और सहकर्मी ने प्रशासन और टूरिज्म विभाग पर सीधा हमला बोला है। उनका कहना है “यह हादसा नहीं, मर्डर है… हमें मुआवजा नहीं, न्याय चाहिए। एमपी टूरिज्म डिपार्टमेंट पूरी तरह जिम्मेदार है।” उन्होंने सवाल उठाए कि अभी तक कितने अधिकारियों पर कार्रवाई हुई? बोट ऑपरेटर को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? उनका आरोप है कि यह सीधी-सीधी लापरवाही है, जिसकी कीमत लोगों ने अपनी जान देकर चुकाई।
मौत का आंकड़ा बढ़ता गया, परिवार उजड़ गए
हादसे के चौथे दिन भी सर्च ऑपरेशन जारी रहा।
- सुबह 9:40 बजे कामराज आर. का शव मिला
- सुबह 6 बजे उनके 8 साल के भतीजे मयूरन की डेडबॉडी बरामद हुई
इससे पहले भी अलग-अलग दिनों में शव मिलते रहे—
- पहले दिन: 4 शव
- दूसरे दिन: 5 शव
- तीसरे दिन: 2 शव
- चौथे दिन: 2 शव
मृतकों में 4 बच्चे और 8 महिलाएं शामिल हैं। सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि एक ही परिवार के कई सदस्य इस हादसे में खत्म हो गए।
कैसे हुआ हादसा?
30 अप्रैल की शाम करीब 5 बजे, पर्यटकों से भरा क्रूज अचानक तेज हवाओं और लहरों के बीच पलट गया।
- क्रूज में करीब 47 लोग सवार थे, जबकि टिकट सिर्फ 29 के ही थे
- हादसा किनारे से लगभग 300 मीटर दूर हुआ
- उस समय हवा की रफ्तार करीब 74 किमी/घंटा थी
मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के सलाहकार के मुताबिक, अचानक आए मिनी बवंडर और ऊंची लहरों के कारण क्रूज का संतुलन बिगड़ा और वह पलट गया।
सबसे बड़ा सवाल—अलर्ट के बावजूद ऑपरेशन क्यों?
मामले में सबसे गंभीर सवाल यही है कि जब मौसम विभाग ने पहले ही येलो अलर्ट जारी किया था, तो क्रूज को चलाने की अनुमति क्यों दी गई?
क्या रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम मौजूद था?
क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया?
क्या ओवरलोडिंग ने हादसे को और घातक बनाया?
इन सवालों के जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हैं।
शवों को भेजा गया तमिलनाडु
हादसे में जान गंवाने वाले तमिलनाडु के पर्यटकों के शवों को जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट से कार्गो विमान के जरिए त्रिची भेजा गया। परिजन भी उनके साथ रवाना हुए। प्रशासन बाकी शवों को भी उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है।
जिंदा बचे बच्चों की दर्दनाक कहानी
इस हादसे में एक ही परिवार के कई सदस्य डूब गए। परिवार के 7 लोगों में से सिर्फ दो बच्चे 10 साल का पूवीथरन और उसकी 12 साल की कजन जिंदा बच पाए।पूवीथरन ने उस भयावह मंजर को याद करते हुए बताया कि कैसे अचानक तेज हवा आई और कुछ ही सेकंड में सबकुछ खत्म हो गया।
सवालों के घेरे में सिस्टम
यह हादसा सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों को भी उजागर करता है।
- ओवरलोडिंग
- मौसम अलर्ट के बावजूद संचालन
- सुरक्षा मानकों की कमी
इन सभी पहलुओं ने मिलकर इस हादसे को और भयावह बना दिया।
न्याय की मांग तेज
पीड़ित परिवार अब मुआवजे से ज्यादा जवाबदेही और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह मामला सिर्फ “हादसा” नहीं बल्कि “अन्याय” बना रहेगा।