दोनों हाथ खो चुकी लीला ने पैरों से लिखकर बनाई नई पहचान… लेकिन बीएसटीसी कॉलेज ने एक फैसले से तोड़ दिया उसका सपना, कहानी सुनकर रह जाएंगे हैरान

दोनों हाथ खोने के बाद भी पैरों से लिखकर और पेंटिंग बनाकर आगे बढ़ी लीला… लेकिन बीएसटीसी कॉलेज के एक फैसले ने उसकी उम्मीदों को फिर हिला दिया।

May 3, 2026 - 18:20
दोनों हाथ खो चुकी लीला ने पैरों से लिखकर बनाई नई पहचान… लेकिन बीएसटीसी कॉलेज ने एक फैसले से तोड़ दिया उसका सपना, कहानी सुनकर रह जाएंगे हैरान

बाड़मेर जिले के हापो की ढाणी की रहने वाली 12 साल की लीला की जिंदगी उस समय पूरी तरह बदल गई थी, जब एक दर्दनाक हादसे में करंट लगने से उसके दोनों हाथ काटने पड़े। बचपन की इस घटना ने न सिर्फ उसका शरीर बदला बल्कि उसका पूरा बचपन और आत्मविश्वास भी हिला दिया।

शुरुआत में लीला स्कूल जाने से डरती थी। उसे लगता था कि बच्चे उसका मजाक उड़ाएंगे, लेकिन इसी मुश्किल समय में उसके एक शिक्षक ने उसे आगे बढ़ने की हिम्मत दी। परिवार ने भी पूरा साथ दिया और धीरे-धीरे लीला ने अपने डर को पीछे छोड़कर पढ़ाई शुरू की।

अपने मजबूत इरादों के दम पर लीला ने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उसने जोधपुर के बोरुंदा स्थित एक कॉलेज में बीएसटीसी (BSTC) के लिए एडमिशन लिया, ताकि वह टीचर बन सके। लेकिन यहां उसे एक और बड़ा झटका लगा—कॉलेज प्रशासन ने यह कहकर उसे बाहर कर दिया कि वह बिना दोनों हाथों के बीएसटीसी नहीं कर सकती। इस फैसले ने लीला को अंदर तक तोड़ दिया।

लेकिन लीला ने हार नहीं मानी। दोनों हाथ न होने के बावजूद उसने अपने पैरों से लिखना सीखा और आज वह बेहद सुंदर तरीके से पैरों से लिखती है। इतना ही नहीं, वह अपने पैरों से शानदार पेंटिंग भी बनाती है, जो उसकी प्रतिभा और जज्बे को दिखाती है।

लीला की मेहनत और हिम्मत की चर्चा तब और बढ़ी जब उसने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जन्मदिन पर उनकी तस्वीर अपने पैरों से बनाई। इसके बाद जोधपुर से गहलोत समर्थक उससे मिलने पहुंचे और वीडियो कॉल पर उससे बातचीत करवाई।

लीला की कहानी सिर्फ संघर्ष तक ही सीमित नहीं है। जब हादसा हुआ था, तब बिजली विभाग की ओर से उसे करीब 5 लाख रुपये का इंश्योरेंस मिला था। उसके पिता ने यह रकम बेटी की पढ़ाई के लिए एक निजी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी में जमा कर दी, लेकिन 2017-18 में वह सोसाइटी बंद हो गई और पूरा पैसा डूब गया।

हाल ही में बाड़मेर के समाजसेवी और भामाशाह स्वर्गीय तनसिंह चौहान के पुत्र जोगेंद्र सिंह और राजेंद्र सिंह ने लीला की मदद के लिए आगे बढ़कर 11 लाख रुपये का चेक देकर आर्थिक सहयोग किया।

आज लीला संघर्ष, हिम्मत और उम्मीद की एक ऐसी मिसाल बन चुकी है, जो दिखाती है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, सपने अगर जिंदा रहें तो इंसान उन्हें किसी न किसी तरीके से पूरा कर ही लेता है।

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