Bikaner: आफत बनकर बरसी बारिश, मंडी में भीगा अनाज, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
बीकानेर अनाज मंडी में अचानक हुई बारिश ने किसानों की फसल को बर्बाद कर दिया। खुले में रखा इसबगोल, जीरा और सरसों भीग गया, किसानों ने व्यवस्था पर सवाल उठाए।
राजस्थान के बीकानेर की कृषि उपज मंडी में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक हुई बारिश ने किसानों के सपनों को चंद मिनटों में बर्बादी में बदल दिया। जिस बारिश का किसान बेसब्री से इंतजार करता है, वही इस बार उनके लिए आफत बनकर बरसी।
बारिश ने उजाड़े किसानों के अरमान
खेतों में हरियाली लाने वाली बारिश जब मंडी में पहुंची, तो हालात बिल्कुल उलट हो गए। खुले आसमान के नीचे रखा इसबगोल, जीरा और सरसों देखते ही देखते पानी में भीगने लगा। किसान अपनी फसल को बचाने के लिए भाग-दौड़ करते नजर आए, लेकिन तेज बारिश के सामने उनकी हर कोशिश नाकाफी साबित हुई।
बेबस किसान, भीगती मेहनत
किसी ने तिरपाल डालकर अनाज बचाने की कोशिश की, तो कोई भीगे हुए दानों को समेटता रहा। लेकिन बारिश इतनी तेज थी कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। किसानों की आंखों में अपनी मेहनत बिखरते देखने का दर्द साफ झलक रहा था।
मंडी की व्यवस्था पर उठे सवाल
कृषि उपज मंडी में टिन शेड होने के बावजूद कई किसानों को जगह नहीं मिल पाई। किसानों का आरोप है कि इन शेड्स पर व्यापारियों का कब्जा है, जिसके चलते उन्हें मजबूर होकर अपनी उपज खुले में रखनी पड़ती है। जैसे ही मौसम खराब होता है, सबसे बड़ा नुकसान किसानों को ही उठाना पड़ता है।
सिर्फ मौसम नहीं, सिस्टम भी जिम्मेदार
यह घटना केवल मौसम की मार नहीं, बल्कि व्यवस्था की खामियों को भी उजागर करती है। जहां सुरक्षित जगह पर रखा माल बच गया, वहीं खुले में रखी फसल पूरी तरह भीग गई। इससे किसानों का आर्थिक नुकसान तो हुआ ही, साथ ही उनका भरोसा भी कमजोर हुआ है।
टूटता भरोसा, बढ़ती चिंता
मंडी में भीगा अनाज सिर्फ फसल का नुकसान नहीं है, बल्कि उस भरोसे का भी है जो किसान व्यवस्था पर करता है। हर ऐसी घटना के बाद यह भरोसा थोड़ा और कम होता जाता है।