RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जैसलमेर चादर महोत्सव में पहुंचे: ऑटो रिक्शा से सोनार किले में प्रवेश, पार्श्वनाथ जैन मंदिर में दर्शन-पूजन

आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 6 मार्च 2026 को जैसलमेर पहुंचे, जहां उन्होंने ऑटो रिक्शा से सोनार किले में प्रवेश कर पार्श्वनाथ जैन मंदिर में दादा गुरुदेव की पावन चादर के दर्शन किए। वे 6-8 मार्च तक चलने वाले तीन दिवसीय चादर महोत्सव के मुख्य अतिथि हैं, जिसमें 871 साल बाद चादर का अभिषेक, स्मारक सिक्का-डाक टिकट लोकार्पण, पुस्तक विमोचन और 7 मार्च को 1.08 करोड़ श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ होगा।

Mar 6, 2026 - 11:30
RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जैसलमेर चादर महोत्सव में पहुंचे: ऑटो रिक्शा से सोनार किले में प्रवेश, पार्श्वनाथ जैन मंदिर में दर्शन-पूजन

राजस्थान के ऐतिहासिक शहर जैसलमेर में शुक्रवार को एक खास धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन की शुरुआत हुई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत तीन दिवसीय 'चादर महोत्सव' में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए जैसलमेर पहुंचे। उनके आगमन ने इस महोत्सव को और भी विशेष बना दिया, जहां हजारों श्रद्धालु दादा गुरुदेव श्री जिनदत्त सूरी की 871 वर्ष पुरानी पावन चादर के दर्शन और अभिषेक के लिए एकत्र हुए हैं।

डॉ. मोहन भागवत ने जैसलमेर पहुंचते ही सोनार दुर्ग (जैसलमेर किला) में प्रवेश किया। यहां उन्होंने सादगी का अनुपम उदाहरण पेश करते हुए ऑटो रिक्शा (या ई-रिक्शा) से किले के देशहरा चौक तक सफर किया। किले की संकरी गलियों में वाहन चलाने की सीमित सुविधा के कारण यह व्यवस्था की गई थी, जो उनके सरल और जन-सुलभ व्यक्तित्व को दर्शाती है।

किले पहुंचने के बाद डॉ. भागवत ने पार्श्वनाथ जैन मंदिर में दर्शन-पूजन किए। यहां उन्होंने जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार का अवलोकन किया और दादा गुरुदेव की पावन चादर एवं अन्य धरोहरों के दर्शन किए। मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान उन्होंने गहन श्रद्धा भाव से समय व्यतीत किया। यह मंदिर और ज्ञान भंडार जैन धर्म की प्राचीन विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जहां दादा गुरुदेव से जुड़ी कई पवित्र वस्तुएं संरक्षित हैं।

चादर महोत्सव का महत्व और कार्यक्रम

यह तीन दिवसीय चादर महोत्सव (6 से 8 मार्च 2026) देदांसर मेला ग्राउंड में आयोजित हो रहा है। इसका मुख्य आकर्षण 871 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दादा गुरुदेव श्री जिनदत्त सूरी की पावन चादर का विधिवत अभिषेक और सार्वजनिक दर्शन है। जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ संघ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं।

महोत्सव के दौरान कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम होंगे:

दादा गुरुदेव की स्मृति में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट का लोकार्पण।'दादा गुरुदेव' नामक पुस्तक का विमोचन।7 मार्च को विश्व स्तर पर 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक 'दादागुरु इकतीसा पाठ' का आयोजन, जो एक विश्व रिकॉर्ड बनाने की दिशा में है।धर्म सभा, शोभायात्रा और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम।डॉ. मोहन भागवत मुख्य कार्यक्रम में शामिल होकर इन गतिविधियों का शुभारंभ करेंगे और अपने उद्बोधन में आध्यात्मिकता, एकता और सांस्कृतिक विरासत के महत्व पर प्रकाश डालेंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दादा गुरुदेव श्री जिनदत्त सूरी (11वीं शताब्दी) जैन धर्म के महान आचार्य थे। उन्होंने जैसलमेर में फैली महामारी के दौरान अपनी चादर का छिड़काव कर चमत्कारिक रूप से रोग को समाप्त किया था। यह चादर तब से चमत्कारी मानी जाती है और लंबे समय बाद अब इसका विधिवत अभिषेक हो रहा है। महोत्सव के लिए जैसलमेर के होटल पूरी तरह बुक हैं, और शहर में भव्य तैयारियां की गई हैं।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.