राजस्थान के जालोर में चौधरी समाज की पंचायत का विवादास्पद फैसला: महिलाओं और बेटियों के स्मार्टफोन उपयोग पर प्रतिबंध

राजस्थान के जालोर जिले में चौधरी (पटेल) समाज की सुंधामाता पट्टी पंचायत ने 15 से 24 गांवों की बहू-बेटियों, युवतियों और छात्राओं के लिए स्मार्टफोन (कैमरे वाले मोबाइल) के उपयोग पर 26 जनवरी 2026 से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। महिलाएं केवल की-पैड फोन इस्तेमाल कर सकेंगी, और सार्वजनिक समारोह या पड़ोसी के घर भी फोन ले जाना मना होगा। फैसले का तर्क है कि महिलाओं के फोन से बच्चे ज्यादा स्क्रीन टाइम लेते हैं, जिससे उनकी आंखें खराब हो सकती हैं। इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं, कई लोग इसे महिलाओं की स्वतंत्रता पर अंकुश बता रहे हैं, जबकि कुछ समर्थन कर रहे हैं। मामला विवादास्पद हो गया है और जिला प्रशासन जांच कर रहा है।

Dec 24, 2025 - 11:19
राजस्थान के जालोर में चौधरी समाज की पंचायत का विवादास्पद फैसला: महिलाओं और बेटियों के स्मार्टफोन उपयोग पर प्रतिबंध

राजस्थान के जालोर जिले में सुंधा माता पट्टी के चौधरी (पटेल) समाज की पंचायत ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने व्यापक बहस छेड़ दी है। समाज के बुजुर्गों और पंचों ने 15 से 24 गांवों (विभिन्न रिपोर्टों में संख्या भिन्न) की बहू-बेटियों, युवा लड़कियों, स्कूली छात्राओं और यहां तक कि कॉलेज जाने वाली महिलाओं के लिए स्मार्टफोन (कैमरे वाले मोबाइल) के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 26 जनवरी 2026 से लागू होगा। महिलाएं अब केवल साधारण की-पैड फोन का इस्तेमाल कर सकेंगी, जो सिर्फ कॉलिंग के लिए होंगे।

इसके अलावा, कड़े नियम लागू किए गए हैं: सार्वजनिक समारोह, शादी-विवाह, सामाजिक आयोजन या पड़ोसी के घर जाते समय भी कोई मोबाइल फोन साथ ले जाना प्रतिबंधित रहेगा।पढ़ाई के लिए जरूरी होने पर स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियों को स्मार्टफोन घर पर ही इस्तेमाल करने की छूट मिल सकती है, लेकिन बाहर ले जाना मना होगा।यह फैसला 21 दिसंबर को गाजीपुरा (या गजीपुर) गांव में हुई समाज की बड़ी बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता 14 पट्टी के समाज अध्यक्ष सुजनाराम चौधरी ने की। प्रस्ताव कर्णोल गांव के देवाराम ने रखा, जिसे पंच हिम्मताराम ने पढ़कर सुनाया और सर्वसम्मति से पास किया गया। प्रभावित गांवों में गाजीपुरा, पावली, कालड़ा, मनोजियावास, राजीकावास, दातलावास, राजपुरा, कोड़ी, सिदरोड़ी, आलड़ी, रोपसी, खानादेवल, साविधर, भीनमाल की हाथमी की ढाणी और खानपुर आदि शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में गांवों की संख्या 24 से ज्यादा बताई गई है।

फैसले के पीछे दिया गया तर्क समाज अध्यक्ष सुजनाराम चौधरी ने इस प्रतिबंध की वजह बताते हुए कहा कि घर में महिलाओं के पास स्मार्टफोन होने से छोटे बच्चे इसका ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी आंखों की रोशनी खराब होने का खतरा रहता है। महिलाएं घरेलू कामों में व्यस्त रहती हैं, इसलिए बच्चों को चुप कराने के लिए फोन दे देती हैं। यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उठाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि पुरुषों के मोबाइल उपयोग या उनकी आंखों की सुरक्षा पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया।

गांव की महिलाओं की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं गाजीपुरा गांव और आसपास की महिलाओं से जब इस फैसले पर राय ली गई, तो मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ महिलाएं इसे सही ठहरा रही हैं, तो कुछ ने असुविधा और पिछड़ने की आशंका जताई है। समाज अध्यक्ष सुजनाराम की पत्नी लाछी देवी, जो खुद दो बार सरपंच रह चुकी हैं, ने फैसले का समर्थन किया। वे गाय के लिए चारा तैयार करते हुए बोलीं कि महिलाएं घर में रहती हैं, जबकि पुरुष बाहर काम के लिए जाते हैं, इसलिए पुरुषों को मोबाइल की जरूरत ज्यादा है। मोबाइल से महिलाओं और बच्चों की आंखें खराब हो जाती हैं, इसलिए पंचों का यह फैसला सही है।

सुजनाराम के बेटे नरसा की पत्नी गरीया ने कहा कि वे मोबाइल पर रील्स और सीरियल देखती हैं, लेकिन अब घर में फैसला हो गया है तो वे भी स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करेंगी। गरीया दसवीं पास हैं, खेती का काम करती हैं और ट्रैक्टर भी चला सकती हैं (पीहर में), लेकिन ससुराल में ऐसा संभव नहीं।सुजनाराम की पोती पिंकी, जो 10वीं तक पढ़ी हैं और अब खेती करती हैं, ने कहा कि उनका भाई बाहर दूसरे राज्य में है, लेकिन की-पैड फोन से बात कर लेंगी। वे समाज के आदेश का पालन करेंगी।

दूसरी ओर, कुछ महिलाओं ने असहमति जताई: गांव की झमका देवी ने कहा कि आज के समय में स्मार्टफोन बहुत जरूरी है, खासकर पढ़ने वाली बच्चियों के लिए। वे खुद सोशल मीडिया इस्तेमाल करती हैं और बेटी की पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन दिलाया है। उनके पति टीचर हैं।अन्य महिलाओं का कहना था कि पंचों को मोबाइल उपयोग पर बैन लगाने का अधिकार नहीं है। परिवार के कई सदस्य दूसरे राज्यों में काम करते हैं, उनसे वीडियो कॉल कैसे करेंगे? भाई बाहर हैं, तो संपर्क कैसे रखेंगे?

व्यापक विवाद और आलोचना यह फैसला सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे महिलाओं की स्वतंत्रता पर अंकुश और पिछड़ेपन को बढ़ावा देने वाला बता रहे हैं। एक ओर सरकार डिजिटल इंडिया और महिलाओं को सशक्त बनाने की योजनाएं चला रही है (जैसे लखपति दीदी योजना में टैबलेट वितरण), वहीं ऐसे सामुदायिक फैसले महिलाओं को तकनीक से दूर कर रहे हैं। कुछ संगठनों ने इसे 21वीं सदी में अस्वीकार्य बताया और जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।जालोर जिला कलेक्टर ने मामले की जानकारी होने की बात कही है और जांच की जा रही है। दोनों प्रमुख पार्टियां (बीजेपी और कांग्रेस) ने भी इस पर हैरानी जताई है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.