कोटा में बिजली कंपनी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: उपभोक्ताओं पर गलत देनदारियां थोपने, खुद रकम वसूलने और सरकारी उपकरणों को खुर्द-बुर्द करने का खुलासा

कोटा में बिजली कंपनी KEDL पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। उपभोक्ता संरक्षण समिति ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कहा कि कंपनी ने हजारों उपभोक्ताओं पर फर्जी VCR थोपकर लाखों-करोड़ों की अवैध वसूली की, जयपुर डिस्कॉम के करोड़ों के उपकरण खुर्द-बुर्द किए और सरकारी खजाने को चूना लगाया। समिति ने उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

Dec 11, 2025 - 16:06
कोटा में बिजली कंपनी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: उपभोक्ताओं पर गलत देनदारियां थोपने, खुद रकम वसूलने और सरकारी उपकरणों को खुर्द-बुर्द करने का खुलासा

कोटा, 11 दिसंबर 2025: राजस्थान के कोटा शहर में बिजली आपूर्ति का जिम्मा संभाल रही कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (KEDL) पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय बिजली उपभोक्ता संरक्षण समिति ने जिला कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। समिति के संयोजक हिम्मत सिंह हाड़ा ने आरोप लगाया है कि KEDL ने न केवल उपभोक्ताओं पर मनमानी देनदारियां थोपी हैं, बल्कि सरकारी संपत्ति को भी लूटा है। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है और उपभोक्ताओं में कंपनी के खिलाफ गुस्सा भड़क गया है।

कंपनी को सौंपी गई जिम्मेदारियां: वादे अधूरे, विरोध का दौर जारी समिति के संयोजक हिम्मत सिंह हाड़ा ने ज्ञापन के दौरान बताया कि वर्ष 2016 में राजस्थान सरकार ने KEDL को कोटा क्षेत्र में बिजली वितरण सेवाओं को सुधारने का महत्वपूर्ण जिम्मा सौंपा था। इस समझौते के तहत कंपनी को निम्नलिखित कार्यों का दायित्व दिया गया था:सेवाओं में सुधार: बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता बढ़ाना और उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित निस्तारण।मेंटिनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर: पुरानी लाइनों का रखरखाव, अंडरग्राउंड केबलिंग का कार्यान्वयन।बिजली चोरी और लॉस नियंत्रण: अवैध कनेक्शन रोकना और ट्रांसमिशन लॉस को कम करना।हालांकि, हाड़ा के अनुसार, कंपनी इन शर्तों पर आज तक खरी नहीं उतरी। ट्रायल अवधि से लेकर अब तक (लगभग 9 वर्षों में) उपभोक्ताओं ने बार-बार विरोध प्रदर्शन किए हैं। समिति ने कई अवसरों पर कंपनी की अव्यवस्थाओं को राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के समक्ष उजागर किया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हाड़ा ने कहा, "कंपनी ने वादों को धोखा दिया है। उपभोक्ता आज भी बिजली कटौती, मीटर रीडिंग की अनियमितताओं और बिलिंग त्रुटियों से जूझ रहे हैं।"

जयपुर डिस्कॉम के करोड़ों के उपकरणों पर हाथ साफ: भुगतान का गलत दावा ज्ञापन में सबसे गंभीर आरोप जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) से संबंधित है। हिम्मत सिंह ने दावा किया कि KEDL ने JVVNL के करोड़ों रुपये मूल्य के सरकारी उपकरणों को खुर्द-बुर्द कर लिया। इन उपकरणों में शामिल हैं:कंडक्टर और वायर: बिजली लाइनों के लिए आवश्यक तारें।पोल: बिजली के खंभे।ट्रांसफार्मर: वोल्टेज नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण उपकरण।कंपनी ने इन सामग्रियों को हटाकर नष्ट या बेच दिया, लेकिन इसके बदले में JVVNL को भुगतान का दावा गलत तरीके से कर लिया। यह कार्य सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है, जिससे राज्य के बिजली विभाग को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। समिति ने मांग की है कि इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

हजारों उपभोक्ताओं पर अवैध विजिलेंस चेकिंग रिपोर्ट (VCR): मनमानी वसूली का खेल KEDL पर सबसे बड़ा आरोप उपभोक्ताओं के खिलाफ गलत विजिलेंस चेकिंग रिपोर्ट (VCR) तैयार करने का है। VCR बिजली चोरी या अनियमित उपयोग की जांच के लिए जारी की जाती है, लेकिन कंपनी ने इसका दुरुपयोग किया। हाड़ा ने बताया:अवैध VCR का भरपूर इस्तेमाल: कंपनी ने हजारों उपभोक्ताओं पर जबरन VCR थोप दी, जिसमें बिजली चोरी का झूठा आरोप लगाया गया।भारी वसूली: इन रिपोर्टों के आधार पर उपभोक्ताओं से लाखों-करोड़ों रुपये वसूल लिए गए। लेकिन यह राशि JVVNL के खाते में जमा नहीं की गई, बल्कि कंपनी ने खुद हड़प ली।अतिरिक्त लोड का बहाना: कई उपभोक्ताओं को उनके कनेक्शन में अतिरिक्त लोड दिखाकर मनमाने नोटिस जारी किए गए। इससे बिजली बिलों में बिना वजह वृद्धि हो गई।एक कंक्रीट उदाहरण के तौर पर, हाड़ा ने वर्ष 2018 के मामले का जिक्र किया। कोटा के सम्राट सैनी जैसे कई उपभोक्ताओं को गलत VCR देकर 90 लाख रुपये से अधिक की देनदारी थोप दी गई। सैनी का मामला तो कोर्ट में पहुंचा, लेकिन समिति का दावा है कि ऐसे हजारों केस अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में लंबित हैं। इसके अलावा, KEDL के खिलाफ दर्ज कई मुकदमों में जांच एजेंसियां कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा पाईं, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा और टूट गया।मीटर रीडिंग और

शिकायतों पर लापरवाही: उपभोक्ता सुरक्षा को खतरा ज्ञापन में मीटर संबंधी अनियमितताओं पर भी रोशनी डाली गई। हाड़ा ने आरोप लगाया कि:तेज रीडिंग: बिजली मीटरों की रीडिंग जानबूझकर तेज दिखाई जाती है, जिससे उपभोक्ताओं के बिल फूल जाते हैं।खराबी की शिकायतें अनसुनी: मीटर खराब होने या गड़बड़ी की शिकायतों पर निष्पक्ष जांच नहीं की जाती।फर्जी स्टाफ का सहारा: कंपनी फर्जी तकनीकी कर्मचारियों को तैनात करती है, जो उपभोक्ताओं की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। इससे बिजली दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है।समिति ने इन प्रथाओं को "संगठित भ्रष्टाचार" करार दिया और कहा कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

ज्ञापन के बाद संभावित कदम: जांच और कार्रवाई की मांग जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में समिति ने तत्काल निम्नलिखित मांगें की हैं:KEDL की सभी गतिविधियों की स्वतंत्र जांच। अवैध VCR और वसूलियों की राशि का ऑडिट।प्रभावित उपभोक्ताओं को मुआवजा और बकाया राशि की वापसी।JVVNL उपकरणों की गुमशुदगी की FIR दर्ज कराना।कंपनी के अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमे चलाना।कलेक्टर ने ज्ञापन प्राप्त करने के बाद आश्वासन दिया है कि मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और उच्च अधिकारियों को सूचित किया जाएगा। हालांकि, उपभोक्ता समिति सतर्क है और यदि शीघ्र कार्रवाई न हुई तो बड़े स्तर पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.