हरिदेव जोशी पत्रकारिता यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में क्यों हुआ बवाल? सारा इस्माइल ने खुद बताई वजह!

जयपुर के हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में बड़ा बवाल हो गया जब प्रशासन ने केवल 12 गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों को ही मंच पर बुलाकर डिग्री दी और बाकी करीब 276 छात्रों को नीचे बैठा रखा। इससे नाराज छात्रों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध के बाद उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा दोबारा मंच पर आए और सभी छात्रों को डिग्री दी गई। इसी दौरान छात्रा सारा इस्माइल ने व्यंग्य करते हुए कहा, “एचजेयू का बेइज्जती करने के बाद इज्जत देने का बहुत-बहुत शुक्रिया।” उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर उपेक्षा और समय बर्बादी का आरोप लगाया।

Mar 26, 2026 - 17:07
हरिदेव जोशी पत्रकारिता यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में क्यों हुआ बवाल? सारा इस्माइल ने खुद बताई वजह!

जयपुर में हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (HJU) के तृतीय दीक्षांत समारोह के दौरान बुधवार को बड़ा बवाल हो गया। कार्यक्रम राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) के ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ, जिसमें राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। करीब 276 छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान करने का कार्यक्रम था, लेकिन सिर्फ लगभग 12 गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों को ही मंच पर बुलाकर डिग्री दी गई। बाकी छात्रों को नीचे बैठे रहना पड़ा, जिससे उन्होंने भारी नाराजगी जताई और नारेबाजी शुरू कर दी।

छात्रों का आरोप था कि पूरे बैच को उपेक्षित किया गया। उन्होंने कुलगुरु प्रो. नंदकिशोर पांडेय के खिलाफ नारे लगाए। स्थिति इतनी बिगड़ी कि कार्यक्रम बीच में रुक गया। छात्रों की मांग पर उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा दोबारा मंच पर लौटे और घोषणा की कि सभी छात्रों को मंच पर बुलाकर डिग्री दी जाएगी। इसके बाद बारी-बारी से छात्रों को मंच पर बुलाया जाने लगा।

सारा इस्माइल का तंज भरा बयान

इसी दौरान एक छात्रा सारा इस्माइल जब डिग्री लेने मंच पर पहुंचीं, तो उन्होंने गुस्से और व्यंग्य के साथ कहा, “एचजेयू का बेइज्जती करने के बाद इज्जत देने का बहुत-बहुत शुक्रिया।” यह कहते हुए उन्होंने हाथ भी झटक दिए। यह 15 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया। छात्रा की यह टिप्पणी पूरे बैच की नाराजगी का प्रतीक बन गई।

सारा इस्माइल ने खुद मीडिया को पूरी कहानी बताई। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ने छात्रों का काफी समय बर्बाद किया। पहले तो कार्यक्रम का आयोजन ठीक से नहीं किया गया, सिर्फ चुनिंदा गोल्ड मेडलिस्टों को ही सम्मान दिया गया, जिससे बाकी छात्रों को अपमानित महसूस हुआ। बाद में विरोध के बाद जब डिग्री देने की प्रक्रिया शुरू हुई, तब “इज्जत” दी जा रही थी। सारा ने इसे “बेइज्जती के बाद इज्जत” का तंज कहा।

छात्रों की नाराजगी की वजह

डिग्री वितरण में भेदभाव: पूरे बैच (लगभग 276 छात्र) में से केवल 12 गोल्ड मेडलिस्टों को शुरू में मंच पर बुलाया गया। बाकी छात्र परिवारों के साथ नीचे बैठे रहे।समय की बर्बादी: छात्रों ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दीक्षांत समारोह को ठीक से मैनेज नहीं किया, जिससे उनका पूरा दिन प्रभावित हुआ।उपेक्षा का अहसास: पत्रकारिता जैसे क्षेत्र में पढ़ रहे छात्रों को खुद “बेइज्जती” महसूस हुई, जबकि वे भविष्य में मीडिया और जनसंचार के क्षेत्र में काम करने वाले हैं।इस घटना ने यूनिवर्सिटी प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। सोशल मीडिया पर लोग छात्रा सारा इस्माइल की हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ इसे “बदतमीजी” भी बता रहे हैं। कुलगुरु पर भी आलोचना हो रही है कि उन्होंने कार्यक्रम को सुचारू रूप से नहीं चलाया।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.