फतेहपुर के पूर्व विधायक दिलसुख राय चौधरी का निधन: क्षेत्र में शोक की लहर, राजनीतिक करियर सरपंच से शुरू होकर विधायक तक पहुंचा
सीकर जिले के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व कांग्रेस विधायक और किसान नेता दिलसुख राय चौधरी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनका राजनीतिक करियर सरपंच से शुरू होकर विधायक तक पहुंचा था। वे 1990 में विधायक चुने गए थे और पंचायती राज एवं सहकारिता में सक्रिय योगदान दिया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया। क्षेत्र में शोक की लहर है।
सीकर जिले के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक और किसान नेता दिलसुख राय चौधरी का गुरुवार देर रात निधन हो गया। वे काफी लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे सीकर जिले, विशेषकर फतेहपुर और लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व विधायक चौधरी का अंतिम संस्कार शुक्रवार दोपहर उनके पैतृक गांव घस्सू में पूरे सम्मान के साथ संपन्न कर दिया गया। बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी, राजनीतिक नेता और समर्थक अंतिम दर्शन के लिए उमड़े।कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने चौधरी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। डोटासरा ने उन्हें एक समर्पित जनसेवक और किसान हितैषी नेता बताया। इसके अलावा विधायक हाकम अली खान सहित फतेहपुर क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने पूर्व विधायक को श्रद्धांजलि अर्पित की। क्षेत्रवासियों का कहना है कि चौधरी जी हमेशा लोगों की समस्याओं के लिए उपलब्ध रहते थे और पंचायत स्तर से लेकर विधानसभा तक जनसेवा में सक्रिय रहे।
दिलसुख राय चौधरी का राजनीतिक सफर दिलसुख राय चौधरी का राजनीतिक करियर बेहद जमीनी स्तर से शुरू हुआ था। वे वर्ष 1990 में फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे। इससे पहले वे लगातार 12 वर्षों तक जसरासर पंचायत के सरपंच रहे, जहां उन्होंने ग्रामीण विकास और स्थानीय मुद्दों पर महत्वपूर्ण कार्य किए।चौधरी का पंचायती राज और सहकारिता क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान रहा। वे दो बार निर्विरोध रूप से सहकारी समिति के अध्यक्ष चुने गए थे। उनकी पत्नी विमला देवी भी पंचायत समिति सदस्य रह चुकी हैं, जबकि वे स्वयं और उनकी पत्नी दोनों ने पंचायत समिति में सेवा दी। परिवार में राजनीतिक विरासत आगे बढ़ी और उनकी बहू भी पंचायत समिति सदस्य रह चुकी हैं।
किसान नेता के रूप में भी चौधरी की पहचान रही। वे किसानों के हितों के लिए हमेशा आवाज उठाते थे और क्षेत्रीय विकास में सक्रिय भूमिका निभाते थे। उनके निधन से कांग्रेस पार्टी को तो नुकसान हुआ ही, साथ ही सीकर जिले की राजनीति में एक बड़ा खालीपन महसूस किया जा रहा है।क्षेत्रवासियों और राजनीतिक हस्तियों का मानना है कि दिलसुख राय चौधरी जैसे नेता दुर्लभ होते हैं, जो सरपंच से विधायक तक के सफर में हमेशा जनता से जुड़े रहे। उनका जाना फतेहपुर और सीकर के लिए अपूरणीय क्षति है।