सर्दियों में रजाई या कंबल से मुंह ढंककर सोने की आदत: आरामदायक लगती है, लेकिन कितनी सुरक्षित?

सर्दियों में ठंड से बचने के लिए रजाई या कंबल से मुंह ढंककर सोना आरामदायक लगता है, लेकिन इससे ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है और CO2 दोबारा सांस में चली जाती है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, स्वस्थ वयस्कों में गंभीर खतरा कम है, लेकिन सुबह सिरदर्द, थकान, नींद खराब होना और त्वचा-अस्थमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शिशुओं, बच्चों और सांस की बीमारी वालों के लिए यह खतरनाक है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि मुंह-नाक खुला रखें और ब्रिदेबल कंबल या आई मास्क जैसे विकल्प अपनाएं।

Dec 14, 2025 - 16:14
सर्दियों में रजाई या कंबल से मुंह ढंककर सोने की आदत: आरामदायक लगती है, लेकिन कितनी सुरक्षित?

सर्दियां आते ही ठंड से बचने के लिए कई लोग रजाई या कंबल में पूरा मुंह छिपाकर सोने लगते हैं। यह आदत बहुत आरामदायक और सुरक्षित महसूस होती है – अंधेरा हो जाता है, ठंड नहीं लगती, और नींद जल्दी आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकती है? हाल के वर्षों में कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों और रिसर्च ने इस पर चिंता जताई है। आइए विस्तार से समझते हैं कि मुंह ढंककर सोने से क्या होता है, कितने जोखिम हैं, और डॉक्टर क्या सलाह देते हैं।

क्यों होती है यह आदत आम? ठंड से बचाव: सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिए लोग पूरा सिर ढंक लेते हैं। अंधेरा और शांति: रजाई के नीचे रोशनी और आवाज कम हो जाती है, जो नींद लाने में मदद करती है। बचपन की आदत: कई लोग बचपन से ऐसा करते आ रहे हैं, क्योंकि यह सुरक्षित और cozy लगता है। लेकिन रजाई या कंबल के नीचे एक छोटा-सा जगह बन जाती है, जहां हवा का प्रवाह सीमित हो जाता है।

क्या होता है मुंह ढंककर सोने से? वैज्ञानिक तथ्यजब आप मुंह और नाक ढंककर सोते हैं, तो आप सांस से निकली हुई हवा को बार-बार अंदर लेते हैं। इसे रीब्रीदिंग (Rebreathing) कहते हैं। इससे:ऑक्सीजन का स्तर कम होता है: सामान्य हवा में ऑक्सीजन करीब 21% होती है। रजाई के नीचे यह जल्दी 18-19% तक गिर सकती है। कुछ अध्ययनों में यह 16-18% तक भी दर्ज किया गया है। कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) बढ़ जाती है: सांस से निकली CO2 दोबारे अंदर जाती है, जो 0.04% से बढ़कर 1-4% तक हो सकती है। नमी और गर्मी बढ़ना: मुंह-नाक के आसपास नमी जमा हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया और धूल आसानी से सांस में चले जाते हैं। एक पुराने लेकिन महत्वपूर्ण अध्ययन (1990 के दशक का) में पाया गया कि एक या दो कंबल से सिर ढंकने पर ऑक्सीजन 20.9% से 18% तक गिर जाती है और CO2 2% तक बढ़ जाती है – सिर्फ एक मिनट में! हालांकि, यह स्वस्थ वयस्कों में बहुत गंभीर नहीं होता, क्योंकि शरीर खुद कंबल हटा लेता है अगर CO2 ज्यादा बढ़ जाए। लेकिन लंबे समय तक ऐसा करने से नींद की क्वालिटी प्रभावित होती है।नोट: सोशल मीडिया पर वायरल दावा कि "ऑक्सीजन 20% तक कम हो जाती है" थोड़ा अतिरंजित है। ऑक्सीजन का प्रतिशत 2-4% तक कम होता है (21% से 17-19%), न कि 20% कम। लेकिन प्रभाव निश्चित रूप से पड़ता है।

संभावित स्वास्थ्य जोखिम स्वस्थ वयस्कों में यह आदत जानलेवा नहीं है, लेकिन नियमित करने से ये समस्याएं हो सकती हैं:सुबह सिरदर्द और चक्कर आना: CO2 बढ़ने से ब्रेन पर दबाव पड़ता है, जिससे सुबह उठते ही सिर भारी लगता है। थकान और बेचैनी: नींद पूरी होने के बावजूद ताजगी नहीं मिलती, क्योंकि ऑक्सीजन की सप्लाई कम रहती है। सांस लेने में तकलीफ या घुटन: खासकर अगर कंबल मोटा हो या एयरटाइट जैसा। त्वचा की समस्याएं: नमी से मुंहासे, एलर्जी या इंफेक्शन बढ़ सकता है। नींद की क्वालिटी खराब: बार-बार नींद टूट सकती है, क्योंकि शरीर ऑक्सीजन की कमी महसूस कर जगाता है। आस्थमा या सांस की बीमारियों का बढ़ना: पहले से अस्थमा, COPD या स्लीप एप्निया वाले लोगों के लिए बहुत खतरनाक – ऑक्सीजन लेवल और गिर सकता है। लंबे समय के जोखिम: कुछ ब्लॉग्स में डिमेंशिया या ब्रेन डैमेज का जिक्र है, लेकिन यह सिद्ध नहीं है। हालांकि, लगातार कम ऑक्सीजन ब्रेन हेल्थ पर असर डाल सकता है।

खास खतरा किसके लिए? शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए: SIDS (Sudden Infant Death Syndrome) का जोखिम बढ़ता है। इसलिए कभी कंबल से मुंह न ढंकें। बुजुर्गों या सांस की बीमारी वालों के लिए: हार्ट या लंग्स पर अतिरिक्त बोझ।

डॉक्टरों और विशेषज्ञों की सलाह ज्यादातर स्लीप स्पेशलिस्ट कहते हैं: मुंह और नाक को हमेशा खुला रखें। ताजी हवा में सांस लेना जरूरी है। अगर ठंड लगती है, तो रूम हीटर या गर्म कपड़े इस्तेमाल करें, न कि मुंह ढंकें। अमेरिस्लीप और अन्य स्वास्थ्य साइट्स की सलाह: हेल्दी एडल्ट्स में गंभीर रिस्क कम है, लेकिन नींद की क्वालिटी खराब होती है। बच्चों और बीमार लोगों में बिल्कुल अवॉइड करें। अगर आपको सुबह हैडेक, थकान या सांस की दिक्कत महसूस हो, तो डॉक्टर से जांच करवाएं – हो सकता है स्लीप एप्निया हो। 

बेहतर विकल्प क्या हैं? आई मास्क इस्तेमाल करें: अंधेरा चाहिए तो स्लीप मास्क लगाएं। कान में ईयरप्लग: शोर से बचाव के लिए। सांस लेने योग्य कंबल: कॉटन या ब्रिदेबल फैब्रिक वाले इस्तेमाल करें। रूम का तापमान सेट करें: 18-22 डिग्री आइडियल है। सिर ऊंचा रखें: तकिए से सिर थोड़ा ऊंचा करें, हवा बेहतर आएगी। वेंटिलेशन: कमरे में थोड़ी खिड़की खुली रखें। 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.