बाड़मेर सरस दूध डेयरी परिसर में लगी भीषण आग: हवा से फैली लपटें, मची अफरा-तफरी, स्थानीय लोगों ने लगाई सफाई की लापरवाही पर उंगली
बाड़मेर के सरस दूध डेयरी परिसर में सोमवार दोपहर सूखी घास-फूस और बबूल की झाड़ियों में लगी आग तेज हवा से विकराल हो गई, जिससे आसपास अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने पशुओं को बचाया और फायर ब्रिगेड की मदद से एक घंटे बाद आग पर काबू पाया। निवासियों ने डेयरी प्रबंधन पर 10 साल से सफाई न करवाने का आरोप लगाया, जिससे ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। कोई हताहत नहीं, लेकिन छप्पर जल गए।
बाड़मेर, राजस्थान: सोमवार दोपहर बाड़मेर शहर के सरस दूध डेयरी परिसर में अचानक आग लग गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग शुरुआत में बबूल के पेड़ों, झाड़ियों और घास-फूस में लगी, लेकिन तेज हवा के कारण यह जल्द ही विकराल रूप धारण कर गई। आसपास बसी आबादी में दहशत फैल गई और लोगों ने तुरंत अपने पशुओं को सुरक्षित स्थान पर हटाया।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, दोपहर करीब 2 बजे आग की शुरुआत हुई। कुछ ही मिनटों में लपटें इतनी ऊंची हो गईं कि दूर से दिखाई देने लगीं। लोगों ने आग की लपटें देखते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। शुरुआती प्रयासों में स्थानीय लोग पानी और रेत डालकर आग बुझाने की कोशिश करते रहे। थोड़ी देर बाद सिविल डिफेंस और नगर परिषद की फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।
फायर ब्रिगेड ने एक गाड़ी से डेयरी परिसर के अंदर और दूसरी से पीछे की तरफ से आग पर पानी डालना शुरू किया। स्थानीय लोगों की मदद से करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूर्ण रूप से काबू पा लिया गया। जहां-जहां धुआं निकल रहा था, वहां अतिरिक्त पानी डालकर सुनिश्चित किया गया कि आग दोबारा न भड़के।
नगर परिषद के फायरमैन जगदीश कुमार ने बताया, "आग लगने के सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। हमने दो फायर ब्रिगेड गाड़ियों से दोनों तरफ से आग बुझाई। अब स्थिति नियंत्रण में है और जहां धुआं बाकी है, वहां पानी डालकर पूरी तरह बुझा रहे हैं।"
स्थानीय लोगों की नाराजगी और सफाई की शिकायत
आग बुझने के बाद स्थानीय निवासियों ने सरस दूध डेयरी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि डेयरी परिसर में बबूल के पेड़, घास-फूस और कचरा इतनी मात्रा में जमा है कि वहां जंगल जैसी स्थिति बन गई है। स्थानीय निवासी भवानी ने कहा, "डेयरी के पीछे जंगल टाइप बना हुआ है। पास में 100-150 घरों की आबादी है। डेयरी की दीवार के पास छप्परे बने हुए हैं, जहां गायों को रखा जाता है। वे छप्परे भी इस आग में जल गए। हमने डेयरी वालों को कई बार सफाई करवाने के लिए कहा, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जाता। दीवार के पास 60-70 घर हैं और पिछले 10 सालों से यहां सफाई नहीं हुई है।"लोगों का आरोप है कि ऐसी लापरवाही के कारण छोटी आग भी बड़ी तबाही मचा सकती है, क्योंकि आसपास घनी आबादी और पशुशाला हैं। यदि सफाई नियमित रूप से होती तो आग इतनी तेजी से नहीं फैलती।
आग का कारण और प्रभाव
आग लगने का सटीक कारण अभी पता नहीं चल सका है। संभावना जताई जा रही है कि सूखी घास-फूस या बबूल की झाड़ियों में किसी छोटी चिंगारी या अन्य कारण से आग लगी होगी, जो हवा से तेज हो गई। घटना में कोई मानवीय हताहत की सूचना नहीं है, लेकिन कुछ छप्पर और आसपास की वनस्पति जलकर खाक हो गई।