बाड़मेर में पंचायती राज पुनर्गठन: अब 610 ग्राम पंचायतें, 610 सरपंचों का होगा चयन – धोरीमन्ना और चौहटन में सबसे ज्यादा बदलाव
राजस्थान सरकार ने बाड़मेर जिले में पंचायती राज पुनर्गठन की अधिसूचना जारी की। 270 नई ग्राम पंचायतें बनने से जिले में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 340 से बढ़कर 610 हो गई। सबसे ज्यादा नई पंचायतें धोरीमन्ना (63) और चौहटन (69) में बनीं। अब जिले में 610 सरपंचों का चयन होगा, जिससे ग्रामीण शासन और विकास योजनाओं को मजबूती मिलेगी।
बाड़मेर, 21 नवंबर 2025: राजस्थान सरकार ने बाड़मेर जिले में पंचायती राज व्यवस्था के पुनर्गठन को मंजूरी देते हुए एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी कर दी है। इस पुनर्गठन के तहत जिले में कुल 270 नई ग्राम पंचायतों का गठन किया गया है, जिससे जिले की कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 340 से बढ़कर 610 हो गई है। इसका सीधा असर ग्रामीण स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ेगा, जहां अब 610 सरपंचों का चयन होगा। यह बदलाव ग्रामीण विकास, स्थानीय शासन और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पुनर्गठन की पृष्ठभूमि और प्रक्रिया; पंचायती राज विभाग द्वारा जारी की गई इस अधिसूचना के अनुसार, बाड़मेर जिले की 12 पंचायत समितियों में व्यापक पुनर्गठन किया गया है। विशेष रूप से आशिक बायतु पंचायत समिति सहित अन्य क्षेत्रों में जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर ग्राम पंचायतों का नवगठन किया गया। पहले जिले में 340 ग्राम पंचायतें कार्यरत थीं, लेकिन बढ़ती जनसंख्या और विकास की मांग को देखते हुए 270 नई पंचायतों का निर्माण आवश्यक हो गया था।यह पुनर्गठन 73वें संविधान संशोधन के अनुरूप है, जो पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाने पर जोर देता है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शासन को अधिक विकेंद्रीकृत और सुलभ बनाना है, ताकि गांव स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सके। अधिसूचना जारी होने के बाद, संबंधित क्षेत्रों में सीमांकन (डिमार्केशन) की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, और अब सरपंच चुनावों की तैयारी शुरू हो जाएगी।
सरपंच चुनावों पर प्रभाव; इस पुनर्गठन के सबसे बड़े परिणामस्वरूप बाड़मेर जिले में अब 610 सरपंचों का चयन होगा, जबकि पहले यह संख्या 340 थी। सरपंचों के अलावा, पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों की संख्या में भी मामूली वृद्धि हो सकती है। चुनाव आयोग द्वारा जल्द ही नई वार्डों का परिसीमन किया जाएगा, और संभावित रूप से अगले साल होने वाले पंचायत चुनावों में ये बदलाव लागू होंगे।स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों का कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण मतदाताओं को अधिक प्रतिनिधित्व देगा, खासकर महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों को। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में सीमांकन को लेकर मामूली विवाद की आशंका जताई जा रही है, जिसे प्रशासन शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का आश्वासन दे रहा है।