बांसवाड़ा के जवाहर नवोदय विद्यालय में 13 वर्षीय छात्रा शिवानी की मौत: परिजनों का आरोप - स्कूल प्रशासन की लापरवाही और गलत/हैवी दवाइयों से लीवर-किडनी डैमेज
बांसवाड़ा के जवाहर नवोदय विद्यालय लोधा में 13 वर्षीय छात्रा शिवानी यादव की मौत स्कूल प्रशासन की कथित लापरवाही से हुई। परिजनों के आरोप हैं कि बुखार पर 500-500 mg की हैवी टैबलेट्स देकर लीवर सूजा और किडनियां डैमेज हो गईं। स्कूल ने समय पर घर नहीं भेजा और देरी से सूचना दी। 21 जनवरी को इलाज के दौरान मौत हुई, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज।
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में लोधा स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV Lodha) में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। कक्षा 7 की 13 वर्षीय छात्रा शिवानी यादव (पुत्री दिलीप यादव, निवासी दानपुर) की बीमारी के दौरान स्कूल प्रशासन की कथित लापरवाही और गलत दवा देने से मौत हो गई। परिजनों ने स्कूल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बच्ची को 500-500 mg की भारी टैबलेट्स दी गईं, जिसके कारण उसका लीवर पूरी तरह सूज गया और दोनों किडनियां डैमेज हो गईं। बच्ची ने 21 जनवरी 2026 को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
घटना का समयक्रम और परिजनों के आरोप
14 जनवरी 2026: शिवानी के पिता दिलीप यादव ने स्वस्थ अवस्था में बच्ची को स्कूल छोड़ा था।15-16 जनवरी: बच्ची की तबीयत खराब हुई। स्कूल स्टाफ ने वार्डन को घर भेजने की सलाह दी, लेकिन वार्डन ने मना कर दिया और कहा कि "कोई गंभीर बीमारी नहीं है, छुट्टी देने की जरूरत नहीं।"बुखार और दवा: परिजनों के अनुसार, सोमवार को बुखार आने पर स्कूल की एक शिक्षिका या नर्स ने बच्ची को भारी डोज (500 mg) की टैबलेट्स दीं। दवा लेने के तुरंत बाद पेट में असहनीय दर्द शुरू हो गया।19 जनवरी: तबीयत और बिगड़ी। स्कूल प्रशासन ने पहले निजी अस्पताल और फिर एमजी अस्पताल में इलाज कराया, लेकिन परिजनों को देरी से सूचना दी। शाम को फोन पर बताया गया कि "सामान्य सर्दी-जुकाम और बुखार है, आकर ले जाओ।" जब परिजन पहुंचे तो बच्ची बुखार से तप रही थी, शरीर लाल हो रहा था और हालत नाजुक थी।घर ले जाने के बाद: 19 जनवरी को परिजनों ने बच्ची को घर ले जाया। एक दिन घर पर रखने के बाद हालत ज्यादा बिगड़ी तो निजी अस्पताल ले गए, फिर प्राथमिक उपचार के बाद गुजरात के हिम्मतनगर अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान 21 जनवरी को मौत हो गई।परिजनों का कहना है कि ओवरडोज या गलत दवा के असर से महज 24 घंटे में लीवर सूज गया और किडनियां फेल हो गईं। छात्रों और स्टाफ के कहने के बावजूद स्कूल ने समय पर घर नहीं भेजा।
स्कूल प्रशासन का पक्ष
स्कूल प्रिंसिपल अब्दुल हमीद ने बताया कि जैसे ही बच्ची की तबीयत बिगड़ी, स्कूल ने गंभीरता से लिया। स्कूल नर्स ने एमजी अस्पताल ले जाकर दवाई करवाई और परिजनों को सूचना देकर उन्हें सौंप दिया। स्कूल का दावा है कि उन्होंने तुरंत इलाज की व्यवस्था की।
पुलिस कार्रवाई
सदर थाना सीआई रूपसिंह के अनुसार:19 जनवरी को स्कूल में तबीयत बिगड़ी, परिजन उसे घर ले गए।बाद में निजी अस्पताल → हिम्मतनगर (गुजरात) जहां मौत हुई।परिजनों ने गुरुवार (22 जनवरी 2026 के आसपास) दोपहर में सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए।पुलिस ने मामला दर्ज किया है और पोस्टमॉर्टम की कार्यवाही कर रही है। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों का प्रदर्शन और मांग
मौत के बाद परिजनों ने कलेक्ट्री में प्रदर्शन किया और स्कूल प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। बच्ची के चाचा शांतिलाल यादव ने कहा कि स्कूल की लापरवाही से बच्ची की जान चली गई। वे न्याय की मांग कर रहे हैं।