दहेज की लालच में पत्नी की हत्या: अलवर कोर्ट ने पति को 10 साल की सजा सुनाई, गहने उतारकर लूट का नाटक रचा
अलवर में दहेज की मांग पूरी न होने पर पति शाकिर ने पत्नी बस्सा की चुन्नी से गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या को लूट दिखाने के लिए गहने निकाले और 80 हजार रुपये व बाइक की डिमांड का मामला सामने आया। एडीजे कोर्ट ने आरोपी को 10 वर्ष कठोर कारावास व 10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।
राजस्थान के अलवर जिले में दहेज के कारण एक युवती की क्रूर हत्या का मामला सामने आया है, जिसमें आरोपी पति को अदालत ने दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह घटना दहेज प्रथा की क्रूरता और महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों को एक बार फिर उजागर करती है।
घटना का विवरण
मामला 5 दिसंबर 2021 की रात का है। अलवर के उद्योग नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव बंजिरका के निवासी शाकिर ने अपनी पत्नी बस्सा की दहेज की मांग पूरी न होने पर क्रूरता से हत्या कर दी। आरोपी ने बस्सा का गला चुन्नी से घोंटकर उसकी हत्या की। हत्या से पहले उसने पत्नी के साथ मारपीट भी की थी।
हत्या के बाद शाकिर ने घटना को छिपाने के लिए चालाकी भरा प्रयास किया। उसने मृतका के गले से सोने की हंसली उतार ली और घटना को लूटपाट का मामला दिखाने की कोशिश की। सुबह होते ही उसने परिवार और गांव वालों को गुमराह करते हुए कहा कि घर में चोरों ने लूट की घटना अंजाम दी है। इतना ही नहीं, आरोपी ने मृतका के पीहर पक्ष को सूचना दिए बिना ही अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी और शव को जल्द से जल्द दफनाने या जलाने की योजना बनाई।
पीहर पक्ष को कैसे मिली जानकारी और संदेह
गांव के एक व्यक्ति ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मृतका बस्सा के पिता कल्लू खां (निवासी महुआ खुर्द) को फोन कर बेटी की मौत की सूचना दी। जैसे ही पिता मौके पर पहुंचे, उन्होंने शव पर चोटों के निशान देखे और उन्हें तुरंत संदेह हुआ कि यह कोई सामान्य मौत या लूट की घटना नहीं है। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और बताया कि शादी के समय उन्होंने करीब 10 लाख रुपये खर्च किए थे, इसके बावजूद आरोपी शाकिर लगातार 80 हजार रुपये नकद और एक बाइक की मांग कर रहा था।
पुलिस जांच और सबूत
पुलिस ने मामले की गहन जांच की। मोबाइल लोकेशन ट्रेस करने पर पता चला कि हत्या के समय आरोपी शाकिर की लोकेशन घर पर ही थी, जो उसके झूठे दावे को खारिज करती है। जांच में यह भी सामने आया कि हत्या दहेज की मांग से जुड़ी थी और आरोपी ने जानबूझकर लूट का नाटक रचा था।
पुलिस ने जांच पूरी होने के बाद कोर्ट में चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील महेश मीणा ने मजबूत पक्ष रखा। मुकदमे में कुल 23 गवाह पेश किए गए और 31 दस्तावेजों के माध्यम से सबूत दिए गए।
कोर्ट का फैसला
अलवर की एडीजे कोर्ट संख्या-2 ने सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और दस्तावेजों की जांच के बाद आरोपी शाकिर को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं (हत्या और दहेज संबंधी अपराध) के तहत दोषी मानते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
यह ध्यान देने योग्य है कि आरोपी और मृतका बस्सा की शादी घटना से महज एक साल पहले हुई थी। इतने कम समय में दहेज की मांग ने एक जिंदगी छीन ली।