सुप्रीम कोर्ट के CJI की आपत्ति के बाद NCERT की क्लास 8 किताब में 'ज्यूडीशियल करप्शन' वाले चैप्टर पर बिक्री रोक; किताब वेबसाइट से हटाई गई, हिस्सा हटाने की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एनसीईआरटी की नई कक्षा 8 सोशल साइंस किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले सेक्शन पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे संस्था को बदनाम करने की सोची-समझी कोशिश बताया। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका को किसी को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी और उन्होंने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए खुद देखने की बात कही। इसके बाद एनसीईआरटी ने किताब की बिक्री रोक दी, इसे वेबसाइट से हटा दिया गया और विवादित हिस्सा हटाने की तैयारी है। सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे उठाया था, जिसमें सिर्फ ज्यूडिशियरी पर फोकस करने को चुनौती दी गई।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
February 25, 2026 • 4:50 PM  16
भ
भारत
NEWS CARD
Logo
सुप्रीम कोर्ट के CJI की आपत्ति के बाद NCERT की क्लास 8 किताब में 'ज्यूडीशियल करप्शन' वाले चैप्टर पर बिक्री रोक; किताब वेबसाइट से हटाई गई, हिस्सा हटाने की तैयारी
“सुप्रीम कोर्ट के CJI की आपत्ति के बाद NCERT की क्लास 8 किताब में 'ज्यूडीशियल करप्शन' वाले चैप्टर पर बिक्री रोक; किताब वेबसाइट से हटाई गई, हिस्सा हटाने की तैयारी”
Favicon
Read more on thekhatak.com
25 Feb 2026
https://www.thekhatak.com/sc-cji-suryakant-objects-ncert-class-8-book-judicial-corruption-chapter-sale-stayed-suo-motu
Google News
Copied
सुप्रीम कोर्ट के CJI की आपत्ति के बाद NCERT की क्लास 8 किताब में 'ज्यूडीशियल करप्शन' वाले चैप्टर पर बिक्री रोक; किताब वेबसाइट से हटाई गई, हिस्सा हटाने की तैयारी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने NCERT की नई क्लास 8 सोशल साइंस टेक्स्टबुक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' (Judicial Corruption) पर दिए गए सेक्शन पर गहरी नाराजगी जताई है। CJI ने इसे "सोचा-समझा कदम" और "संस्था को बदनाम करने की कोशिश" करार दिया, साथ ही कहा कि न्यायपालिका को किसी को भी बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने इस मामले को खुद देखने की बात कही और संकेत दिया कि सुप्रीम कोर्ट इस पर स्वत: संज्ञान (suo motu) ले सकता है।

इसके बाद NCERT ने किताब की बिक्री पर रोक लगा दी है। किताब अब NCERT की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है, और ऑफलाइन बिक्री भी 24 फरवरी 2026 से बंद कर दी गई। सूत्रों के अनुसार, किताब के इस विवादित हिस्से को हटा दिया जाएगा।

विवाद की शुरुआत और किताब का कंटेंट

NCERT ने 23 फरवरी 2026 को क्लास 8 की नई सोशल साइंस किताब 'Exploring Society: India and Beyond – Part 2' जारी की थी, जो अकादमिक सेशन 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जानी थी। यह किताब NCF (National Curriculum Framework) और NEP-2020 के तहत तैयार की गई है।

इसमें चैप्टर 'The Role of the Judiciary in Our Society' के अंदर दो मुख्य सेक्शन हैं:Justice Delayed is Justice Denied — इसमें न्याय में देरी को इंसाफ न मिलने के समान बताया गया है। आंकड़े दिए गए हैं:सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81,000 पेंडिंग केस, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबॉर्डिनेट कोर्ट्स में 4 करोड़ 70 लाख केस। Corruption in the Judiciary — यहां न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार का जिक्र है। किताब में लिखा है कि लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग स्तरों पर करप्शन का सामना करते हैं, जिससे गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच और मुश्किल हो जाती है।

किताब में यह भी बताया गया है:जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं, जो कोर्ट के अंदर और बाहर उनके व्यवहार को नियंत्रित करता है।अकाउंटेबिलिटी के लिए Centralized Public Grievance Redress and Monitoring System (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें ली जाती हैं। 2017-2021 के बीच 1,600 से ज्यादा शिकायतें मिलीं।गंभीर मामलों में संसद इम्पीचमेंट मोशन से जज को हटा सकती है, जिसमें जज को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलता है।

केंद्र और राज्य सरकारें ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने, टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और करप्शन के खिलाफ तेज कार्रवाई कर रही हैं।किताब में पूर्व CJI बी.आर. गवई के जुलाई 2025 के बयान का भी जिक्र है, जिसमें उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और गलत कामों से पब्लिक ट्रस्ट प्रभावित होता है, लेकिन पारदर्शिता और अकाउंटेबिलिटी से इसे बहाल किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में मामला कैसे उठा?

23 फरवरी को किताब जारी होने के बाद सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि किताब में सिर्फ न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार का जिक्र है, जबकि ब्यूरोक्रेसी, राजनीति या अन्य क्षेत्रों पर एक शब्द भी नहीं। बच्चों को ऐसा पढ़ाया जा रहा है जैसे भ्रष्टाचार सिर्फ ज्यूडिशियरी में ही है, जो निंदनीय है।

बुधवार (25 फरवरी 2026) को CJI सूर्यकांत की बेंच (जिसमें जस्टिस विपुल एम. पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे) ने इस पर सुनवाई की। CJI ने कहा:"दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।""यह एक सोचा-समझा फैसला लगता है।""मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा।""बार और बेंच दोनों से बहुत सारे कॉल, मैसेज आ रहे हैं। सभी हाईकोर्ट जज परेशान हैं।"जस्टिस बागची ने कहा कि किताब में संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) की अखंडता का अभाव लगता है।

अब क्या होगा?

CJI ने कानून अपना काम करने की बात कही है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि विवादित हिस्सा (judiciary corruption वाला सेक्शन) किताब से हटा दिया जाएगा। NCERT की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन किताब की बिक्री रोककर और वेबसाइट से हटाकर तुरंत कदम उठाए गए हैं।

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

Digital Archives

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter