सांगानेर की 848 रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत: कॉमर्शियल कोर्ट का सीज और कुर्की का आदेश रद्द

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के सांगानेर में स्थित 848 रंगाई-छपाई टेक्सटाइल फैक्ट्रियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने जयपुर कॉमर्शियल कोर्ट के 14 फरवरी 2025 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें CETP प्लांट के बकाया भुगतान के कारण इन फैक्ट्रियों को सीज और कुर्क करने का निर्देश था। हाईकोर्ट ने कहा कि निष्पादन अदालत अपनी सीमाओं से बाहर नए दायित्व तय नहीं कर सकती। मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए कॉमर्शियल कोर्ट को वापस भेजा गया है, जिससे हजारों मजदूरों और कारोबारियों का रोजगार बच गया।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
March 21, 2026 • 6:23 PM  15
र
राजस्थान
NEWS CARD
Logo
सांगानेर की 848 रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत: कॉमर्शियल कोर्ट का सीज और कुर्की का आदेश रद्द
“सांगानेर की 848 रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत: कॉमर्शियल कोर्ट का सीज और कुर्की का आदेश रद्द”
Favicon
Read more on thekhatak.com
21 Mar 2026
https://www.thekhatak.com/sanganer-848-dyeing-printing-factories-get-relief-from-rajasthan-high-court-commercial-court-seizure-attachment-order-quashed-cetp-dispute
Google News
Copied
सांगानेर की 848 रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत: कॉमर्शियल कोर्ट का सीज और कुर्की का आदेश रद्द

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रसिद्ध सांगानेर इलाके में स्थित रंगाई-छपाई की 848 टेक्सटाइल फैक्ट्रियों के मालिकों को राजस्थान हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। हाईकोर्ट ने जयपुर कॉमर्शियल कोर्ट के 14 फरवरी 2025 के उस विवादास्पद फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जिसमें इन फैक्ट्रियों को सीज करने और उनकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए गए थे।

यह फैसला कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) से जुड़े बकाया भुगतान के विवाद पर आधारित था। हाईकोर्ट ने पहले ही इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी, और अब विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने इसे स्थायी रूप से खारिज कर दिया है। मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस जयपुर कॉमर्शियल कोर्ट को भेज दिया गया है।

हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश और टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि निष्पादन (एग्जिक्यूशन) कार्यवाही के दौरान अदालत अपनी अधिकार सीमाओं से बाहर जाकर नए दायित्व तय नहीं कर सकती। कोर्ट ने कॉमर्शियल कोर्ट को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह सभी पक्षकारों को उचित सुनवाई का पूरा अवसर दे और निष्पादन प्रक्रिया तक ही सीमित रहते हुए फैसला सुनाए।

विवाद की जड़: CETP प्लांट का निर्माण और बकाया भुगतान

सांगानेर की रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों से निकलने वाले रसायनिक अपशिष्ट पानी को ट्रीट करने के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) का निर्माण प्रस्तावित था। इसके लिए मैसर्स सांगानेर एनवायरो प्रोजेक्ट डवलपमेंट कंपनी गठित की गई थी, जिसमें केंद्र सरकार 50 प्रतिशत, राज्य सरकार 25 प्रतिशत और सांगानेर रंगाई-छपाई एसोसिएशन के सदस्य 25 प्रतिशत हिस्सेदार थे।

साल 2016 में इस प्लांट का टेंडर करीब 145 करोड़ रुपये में एडवेंट एंवायरकेयर टेक्नोलॉजी कंपनी को मिला था। कंपनी ने काम शुरू किया, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद लागत बढ़कर 159 करोड़ रुपये हो गई। एसोसिएशन और सरकार ने कंपनी को करीब 129 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन बीच में विवाद हो गया। कंपनी ने काम बंद कर दिया और बकाया राशि के लिए अहमदाबाद में मुकदमा दायर किया।

कॉमर्शियल कोर्ट ने बकाया वसूली के लिए फैक्ट्रियों को सीज और कुर्क करने का आदेश दिया था। हालांकि, सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि कॉमर्शियल कोर्ट राज्य सरकार या प्राइवेट व्यक्तियों से वसूली के निर्देश नहीं दे सकती। कुर्की का आदेश केवल डवलपमेंट कंपनी के खिलाफ दिया जा सकता है, न कि एसोसिएशन के व्यक्तिगत सदस्यों (फैक्ट्रियों) के खिलाफ।

एसोसिएशन के सदस्य का बयान

सांगानेर रंगाई-छपाई एसोसिएशन के सदस्य घनश्याम कूलवाल ने बताया कि प्लांट के बकाया काम को अब राज्य सरकार अपने स्तर पर पूरा करा रही है। फैक्ट्रियां लंबे समय से इस विवाद के कारण अनिश्चितता में थीं, और हाईकोर्ट का फैसला उनके लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

Digital Archives

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter