सलमान खान भ्रामक विज्ञापन मामले में: कोटा कंज्यूमर कोर्ट में ताजा अपडेट, सभी आरोपों का खंडन

कोटा कंज्यूमर कोर्ट में सलमान खान पर राजश्री पान मसाला के “केसर युक्त इलायची” के भ्रामक विज्ञापन का आरोप लगा। 9 दिसंबर को सलमान की टीम ने सभी आरोप खारिज करते हुए शिकायत को दुर्भावनापूर्ण और प्रताड़ना का हथियार बताया। हस्ताक्षर की FSL जांच व व्यक्तिगत पेशी की मांग को भी असंवैधानिक करार दिया। अगली सुनवाई 26 दिसंबर को होगी।

Dec 10, 2025 - 13:26
सलमान खान भ्रामक विज्ञापन मामले में: कोटा कंज्यूमर कोर्ट में ताजा अपडेट, सभी आरोपों का खंडन

10 दिसंबर 2025 बॉलीवुड के भाईजान सलमान खान एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार किसी फिल्म या विवादास्पद बयान के कारण नहीं, बल्कि राजश्री पान मसाला के विज्ञापन को लेकर दायर भ्रामक विज्ञापन की शिकायत के चलते। कोटा (राजस्थान) जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (कंज्यूमर कोर्ट) में 9 दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई में सलमान खान और कंपनी की ओर से सभी आरोपों का कड़ा खंडन किया गया। सलमान की कानूनी टीम ने शिकायत को 'दुर्भावनापूर्ण' और 'प्रताड़ना का हथियार' करार दिया, जबकि परिवादी पक्ष ने हस्ताक्षरों की FSL (फॉरेंसिक साइंस लैब) जांच और सलमान की व्यक्तिगत पेशी की मांग की। अगली सुनवाई 26 दिसंबर को निर्धारित है।यह मामला न केवल सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की जिम्मेदारी पर सवाल उठाता है, बल्कि उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 के तहत विज्ञापनों की सत्यता पर भी बहस छेड़ रहा है। आइए, इस मामले को विस्तार से समझते हैं—शुरुआत से लेकर ताजा विकास तक।

मामले की शुरुआत: 3 नवंबर 2025 को नोटिस जारी शिकायत का आधार: भाजपा नेता और राजस्थान हाईकोर्ट के वकील इंद्रमोहन सिंह हनी (जिन्हें कभी-कभी 'हनी' या 'प्रदीप इंस्ट्रक्टर सिंह हनी' के नाम से भी उल्लेख किया जाता है) ने कोटा कंज्यूमर कोर्ट में याचिका दायर की। आरोप था कि सलमान खान द्वारा एंडोर्स किए गए राजश्री पान मसाला के विज्ञापन 'केसर युक्त इलायची' और 'केसर युक्त पान मसाला' के नाम पर भ्रामक हैं।मुख्य दावे:5 रुपये के सस्ते पाउच में असली केसर (जिसकी कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलो है) मिलना व्यावहारिक रूप से असंभव है। इससे उपभोक्ता भ्रमित हो रहे हैं।ऐसे विज्ञापन युवाओं को तंबाकू उत्पादों की लत लगाने का काम कर रहे हैं, जो मुंह के कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बन सकते हैं। सलमान खान, जो करोड़ों युवाओं के रोल मॉडल हैं, ऐसे हानिकारक उत्पाद को बढ़ावा देकर गलत संदेश दे रहे हैं। मांगी गई राहत:स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों के विज्ञापनों पर तत्काल रोक।सलमान खान को मिले सभी राष्ट्रीय पुरस्कार (जैसे पद्म श्री) वापस लिए जाएं। कंपनी पर जुर्माना और मुआवजा। कोर्ट का कदम: कोर्ट ने सलमान खान और राजश्री पान मसाला कंपनी को नोटिस जारी कर 27 नवंबर तक जवाब मांगा।  परिवादी के वकील रिपुदमन सिंह ने कहा, "सलमान जैसे सितारे विदेशों में कोल्ड ड्रिंक तक नहीं बढ़ावा देते, लेकिन यहां तंबाकू उत्पादों का प्रचार कर रहे हैं। यह युवाओं के लिए घातक है।"

27 नवंबर 2025: सलमान का पहला जवाब—'कपटपूर्ण शिकायत' सलमान की ओर से मुंबई के वकील पराग महेश्वरी ने कोर्ट में विस्तृत जवाब दाखिल किया।मुख्य तर्क:शिकायत पूरी तरह बेबुनियाद और खारिज योग्य है, क्योंकि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन की जांच का अधिकार केवल केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) को है, न कि किसी व्यक्ति को।विज्ञापन 'केसर युक्त पान मसाला' का नहीं, बल्कि 'सिल्वर कोटेड इलायची' का है। सलमान ने कभी गटखा या तंबाकू उत्पाद को एंडोर्स नहीं किया।सलमान न तो उत्पाद के निर्माता हैं, न विक्रेता, न सर्विस प्रोवाइडर। वे केवल ब्रांड एंबेसडर हैं, इसलिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते।यह जवाब कोर्ट में स्वीकार किया गया, लेकिन परिवादी पक्ष ने इसे चुनौती दी।

27 नवंबर को परिवादी की काउंटर-अर्जी: हस्ताक्षरों पर सवाल इंद्रमोहन सिंह हनी और रिपुदमन सिंह की ओर से एक एप्लीकेशन दाखिल की गई।मांगें:सलमान के दाखिल जवाब और वकालतनामा पर हस्ताक्षरों की FSL जांच कराई जाए, क्योंकि वे 'असली नहीं लगते'।अगली सुनवाई पर सलमान खान को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया जाए।परिवादी का दावा: दस्तावेजों में हेरफेर की आशंका है, और सलमान की मौजूदगी से मामले की गहराई समझ आएगी।

9 दिसंबर 2025: कोर्ट में कड़ा खंडन—'प्रताड़ना का उद्देश्य' सुनवाई का विवरण: सलमान की ओर से मुंबई के एडवोकेट पराग महेश्वरी और राजश्री कंपनी की ओर से दिल्ली के एडवोकेट वरुण ने पेशी दी। दोनों ने परिवादी की सभी मांगों का विरोध जताया।सलमान पक्ष के मुख्य तर्क (वकील पराग महेश्वरी के हवाले से):"यह शिकायत दुर्भावनापूर्ण और केवल प्रताड़ित करने के उद्देश्य से दायर की गई है। शिकायतकर्ता अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर तुच्छ, निराधार और गैरकानूनी आपत्तियां उठा रहा है।"हस्ताक्षर सलमान के ही हैं—इन्हें उनके पैन कार्ड और पासपोर्ट से मिलाया जा सकता है। कोई फॉरेंसिक जांच की जरूरत नहीं।व्यक्तिगत पेशी के लिए कोई कानूनी आधार नहीं: उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 या किसी अन्य कानून में ऐसा प्रावधान नहीं है। कोर्ट को बिना सबूत के 'अंदाजे और कल्पनाओं' पर जांच का अधिकार नहीं।शिकायत गलत सबूतों पर टिकी है; सलमान ने कभी हानिकारक उत्पाद को प्रमोट नहीं किया। कंपनी पक्ष: एडवोकेट वरुण ने उत्पाद को 'सुरक्षित' बताया और विज्ञापन को CCPA-अनुमोदित कहा।कोर्ट का फैसला: दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद, परिवादी की 27 नवंबर वाली एप्लीकेशन पर आदेश सुरक्षित रखा। अगली तारीख 26 दिसंबर 2025 तय की गई।

कानूनी विशेषज्ञों की राय: क्या होगा 26 दिसंबर को? ज्यादातर वकीलों का मानना है कि हस्ताक्षर जांच या व्यक्तिगत पेशी की मांग कमजोर है, क्योंकि उपभोक्ता कोर्ट में ऐसे प्रावधान सीमित हैं। यदि कोर्ट शिकायत को खारिज करता है, तो यह सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट के लिए मिसाल बनेगा। हालांकि, यदि FSL जांच की इजाजत मिली, तो मामला लंबा खिंच सकता है। CCPA की भूमिका भी अहम होगी।समानांतर मामला: जोधपुर कंज्यूमर कोर्ट में भी इसी तरह की शिकायत पर 16 दिसंबर को सुनवाई है।

 2 पॉइंट में पूरा मामला समझें भ्रामक विज्ञापन का आरोप: 5 रुपये के पाउच में 'केसर युक्त' दावा झूठा, युवाओं को कैंसर की ओर धकेल रहा। सलमान को नोटिस, पुरस्कार वापसी की मांग।सलमान का बचाव: केवल 'सिल्वर कोटेड इलायची' एंडोर्स किया, गटखा नहीं। शिकायत दुर्भावनापूर्ण, कोर्ट में खंडन। नेक्स्ट हियरिंग: 26 दिसंबर। 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.