AAP छोड़ BJP में शामिल हुए राघव चड्ढा का बड़ा आरोप: बोले- पार्टी में टॉक्सिक माहौल, चंद लोगों के हाथों में सिमटी
AAP छोड़कर BJP में शामिल हुए राघव चड्ढा ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि AAP अब टॉक्सिक माहौल वाली पार्टी बन गई है, जहां काम करने और बोलने की आजादी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 7 सांसदों का पार्टी छोड़ना इस बात का संकेत है कि पार्टी अपने मूल उद्देश्यों से भटक चुकी है। इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में BJP की ताकत बढ़ गई है और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने पार्टी छोड़ने के बाद अपना पहला वीडियो जारी कर कई बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि AAP अब अपने मूल उद्देश्यों से भटक चुकी है और कुछ “करप्ट और कॉम्प्रोमाइज्ड” लोगों के हाथों में सिमट गई है, जो देशहित के बजाय निजी फायदे के लिए काम कर रहे हैं।
राघव चड्ढा ने कहा कि पार्टी के अंदर का वर्क एनवायरनमेंट “टॉक्सिक” हो चुका था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें काम करने और संसद में बोलने तक से रोका जाता था। उनके मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों से वे इस माहौल को महसूस कर रहे थे और अंततः पार्टी छोड़ना ही सही विकल्प लगा।
उन्होंने कहा, “मैं गलत हो सकता हूं, लेकिन अगर 7 सांसद एक साथ पार्टी छोड़ रहे हैं, तो क्या सभी गलत हो सकते हैं?” चड्ढा ने यह भी कहा कि वे AAP के फाउंडिंग मेंबर रहे हैं और उन्होंने अपने जीवन के 15 साल इस पार्टी को दिए, लेकिन अब यह वह पार्टी नहीं रही जिसके उद्देश्य से इसकी शुरुआत हुई थी।
तीन विकल्प थे, तीसरा चुना
राघव चड्ढा ने बताया कि उनके सामने तीन विकल्प थे— राजनीति छोड़ देना, पार्टी में रहकर सुधार की कोशिश करना, किसी अन्य दल के साथ जुड़कर सकारात्मक राजनीति करना, उन्होंने तीसरा विकल्प चुनते हुए BJP में शामिल होने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि वे अब भी जनता के मुद्दों को पूरी ऊर्जा के साथ उठाते रहेंगे और समाधान भी निकालने की कोशिश करेंगे।
7 सांसदों का साथ छोड़ना
राघव चड्ढा के साथ कुल 7 राज्यसभा सांसदों ने AAP से दूरी बनाई है। इनमें अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी, हरभजन सिंह, डॉ. संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। राज्यसभा में इन सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद अब BJP के कुल सांसदों की संख्या 113 हो गई है।
सुरक्षा को लेकर भी विवाद
AAP छोड़ने के बाद सुरक्षा को लेकर भी घटनाक्रम तेज हो गया है।पंजाब सरकार ने पहले हरभजन सिंह की सुरक्षा हटाई, जिसके बाद केंद्र ने उन्हें CRPF सुरक्षा दे दी।राघव चड्ढा की Z+ सुरक्षा भी हटाई गई थी, जिसे बाद में केंद्र सरकार ने बहाल किया।अशोक मित्तल को भी केंद्र की ओर से Y कैटेगरी सुरक्षा प्रदान की गई है।
पार्टी में बढ़ता विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के बीच AAP और BJP के बीच सियासी तनाव बढ़ गया है।पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति Droupadi Murmu से मिलने का समय मांगा है। वहीं AAP सांसद संजय सिंह ने इन नेताओं की सदस्यता रद्द करने की मांग की है।पिछले कुछ दिनों में पंजाब में AAP नेताओं के घरों के बाहर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं, जहां कुछ जगहों पर उन्हें “गद्दार” तक कहा गया।
आगे की राजनीति पर नजर
राघव चड्ढा का यह कदम न सिर्फ AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, बल्कि राज्यसभा की राजनीति में भी इसका असर दिख रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि इस राजनीतिक बदलाव का असर आने वाले समय में किस तरह सामने आता है।