राजस्थान में उभर रहा नया 'इंडस्ट्रियल सिटी'! 243 करोड़ की बिजली-पानी व्यवस्था, 1200+ प्लॉट तैयार – पश्चिमी राजस्थान बनेगा औद्योगिक पावरहाउस.

राजस्थान के जोधपुर-पाली-मारवाड़ में दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत JPMIA परियोजना अंतिम चरण में है। यह राज्य की पहली 'रेडी टू इन्वेस्ट टाउनशिप' होगी, जो एक नया इंडस्ट्रियल सिटी बनेगा। पहले चरण में 1279 प्लॉट, 243 करोड़ की बिजली-पानी व्यवस्था, भूमि अधिग्रहण पूरा होने वाला है। 2028 तक तीन चरणों में विस्तार से पश्चिमी राजस्थान औद्योगिक हब बनेगा, रोजगार और निवेश बढ़ेगा।

Nov 10, 2025 - 16:48
राजस्थान में उभर रहा नया 'इंडस्ट्रियल सिटी'! 243 करोड़ की बिजली-पानी व्यवस्था, 1200+ प्लॉट तैयार – पश्चिमी राजस्थान बनेगा औद्योगिक पावरहाउस.

जोधपुर-पाली-मारवाड़ क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के तहत शुरू हो रही जोधपुर-पाली-मारवाड़ इंडस्ट्रियल एरिया (जेपीएमआईए) परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से यह प्रोजेक्ट पश्चिमी राजस्थान को एक विशाल औद्योगिक हब में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हाल ही में इसकी समीक्षा की और इसे क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर बताया। यह राजस्थान की पहली 'रेडी टू इन्वेस्ट टाउनशिप' होगी, जो सिर्फ औद्योगिक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक पूर्ण इंडस्ट्रियल टाउनशिप और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित की जाएगी। इसमें उद्योग, व्यापार, आवासीय सुविधाएं और आधुनिक अवसंरचना का एकीकृत मॉडल होगा – इसे सचमुच एक 'नया शहर' कहा जा सकता है!

भूमि अधिग्रहण और चरणबद्ध विकास

रीको (RIICO) और एनआईसीडीसी (NICDIT) की संयुक्त कंपनी राजस्थान इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (रिडको) इस प्रोजेक्ट को संभाल रही है।

फेज-ए (प्रथम चरण): 642 हेक्टेयर क्षेत्र में निर्माण शुरू करने के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम में है। 

फेज-बी: 1086 हेक्टेयर के लिए भूमि अधिग्रहण की सुनवाई पूरी हो चुकी है, अवार्ड जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में।

सी: वर्ष 2028 तक 1373 हेक्टेयर का विस्तार प्रस्तावित।

तीनों चरण पूरे होने पर कुल क्षेत्रफल हजारों हेक्टेयर में फैलेगा, जो पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र बनेगा और देश के प्रमुख लॉजिस्टिक कॉरिडोर से सीधे जुड़ेगा। 

1200 से ज्यादा औद्योगिक प्लॉट और सुविधाएं

पहले चरण में कुल 1279 औद्योगिक भूखंड तैयार किए जा रहे हैं:छोटे उद्योग: 435 प्लॉट 

मध्यम उद्योग: 615 प्लॉट

बड़े उद्योग: 229 प्लॉट

उद्योगों को 'प्लग एंड प्ले' मॉडल में सुविधाएं मिलेंगी, जैसे:

बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सड़क नेटवर्क 

सुचारु बिजली-पानी आपूर्ति

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट

आईसीटी इंफ्रास्ट्रक्चर

मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब 

बिजली-पानी पर 243 करोड़ का निवेशपानी: राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल से 48 एमएलडी पानी स्वीकृत, इसके लिए 155.85 करोड़ रुपए आवंटित।

बिजली: कांकाणी उपकेंद्र से सप्लाई के लिए 87.21 करोड़ रुपए की परियोजना मंजूर।

इसके अलावा अंडरपास, लॉजिस्टिक हब और दो नए राष्ट्रीय राजमार्गों से संबंधित कार्य प्रक्रियाधीन हैं। कुल मिलाकर बिजली-पानी पर करीब 243 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

विशेषज्ञों की राय: रोजगार और निवेश का नया दौर

राजेंद्र मेहता (सचिव, जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन): "यह प्रोजेक्ट जोधपुर सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए क्रांतिकारी साबित होगा। निवेश का माहौल बनेगा और हजारों रोजगार सृजित होंगे।" 

सुरेश विश्नोई (प्रांत सचिव, लघु उद्योग भारती): "उद्योगों की दो बड़ी जरूरतें – जमीन और परिवहन – यहां पूरी हो रही हैं। दो नए हाईवे स्वीकृत होने से कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।"

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना उद्योगों को सकारात्मक माहौल देगी और जल्द धरातल पर उतरनी चाहिए, जिससे सभी सेक्टरों पर पॉजिटिव असर पड़ेगा।

यह परियोजना न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि पश्चिमी राजस्थान को राष्ट्रीय मानचित्र पर एक मजबूत औद्योगिक गंतव्य बनाएगी। निवेशक और उद्यमी अब इंतजार कर रहे हैं – जल्द ही यह 'नया शहर' हकीकत बनेगा!