महिला आरक्षण से बदलेगा खेल या पुरानी ताकतें रहेंगी कायम? राजस्थान बार काउंसिल चुनाव में 234 उम्मीदवार, 29 अप्रैल को किसके हाथ आएगी कुर्सी!
84 हजार वकील, पहली बार महिला आरक्षण और जबरदस्त मुकाबला… चुनाव तो खत्म, लेकिन असली खेल अब शुरू होगा। 29 अप्रैल को खुलेंगे नतीजों के पिटारे—कौन मारेगा बाजी, कौन रह जाएगा पीछे? जानिए पूरी खबर विस्तार से…
राजस्थान में अधिवक्ताओं की सबसे बड़ी संस्था Bar Council of Rajasthan के चुनाव इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक और बेहद दिलचस्प बन गए हैं। लगभग तीन साल की देरी और करीब आठ साल बाद हो रहे इन चुनावों ने पूरे प्रदेश के वकील समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार चुनाव में पहली बार महिला अधिवक्ताओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। 23 सदस्यीय काउंसिल में से 5 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। यही नहीं, बाद में दो महिला सदस्यों को नामित भी किया जाएगा, जिससे कुल 25 सदस्यों में 7 महिलाएं शामिल होंगी। ऐसे में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या महिला आरक्षण चुनावी समीकरण बदलता है या फिर पारंपरिक लॉबी अपना दबदबा कायम रखती है।
इस चुनाव में कुल 23 पदों के लिए 234 प्रत्याशी मैदान में हैं, जो इसे बेहद प्रतिस्पर्धी बना देता है। प्रदेशभर से 84,247 से अधिक अधिवक्ता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इसके लिए राजस्थान के विभिन्न जिलों में 258 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहा।
अगर क्षेत्रवार प्रभाव की बात करें तो Jaipur इस चुनाव का केंद्र बना हुआ है, जहां सबसे अधिक करीब 22 हजार अधिवक्ता मतदाता हैं। यहां का रुझान काफी हद तक पूरे चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकता है। वहीं Sri Ganganagar जिले में भी चुनाव को लेकर खासा उत्साह देखा गया, जहां 5 प्रत्याशी मैदान में हैं और 1665 मतदाताओं ने अपने वोट डाले। जिले में कुल 9 मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण मतदान हुआ।
चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। ये चुनाव Supreme Court of India द्वारा गठित कमेटी की निगरानी में कराए जा रहे हैं। मतदान से 36 घंटे पहले ही प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके साथ ही मतदान केंद्र के 200 गज के दायरे में किसी भी प्रकार का प्रचार पूरी तरह निषिद्ध रहा।
सुरक्षा के लिहाज से भी व्यापक इंतजाम किए गए थे। मतदान केंद्रों पर मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर रोक रही, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को रोका जा सके।
मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतपेटियां संबंधित जिला जजों के पास सुरक्षित रखवाई गई हैं। इसके बाद इन्हें कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच जोधपुर भेजा जाएगा, जहां 29 अप्रैल से मतगणना शुरू होगी।
अब पूरा वकील समुदाय और राजनीतिक हलकों की नजरें 29 अप्रैल पर टिकी हैं। यह चुनाव सिर्फ प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि आने वाले वर्षों में अधिवक्ताओं की आवाज कौन उठाएगा और किस दिशा में बार काउंसिल काम करेगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या महिला आरक्षण इस बार सत्ता का समीकरण बदल देगा या फिर अनुभव और पुरानी पकड़ एक बार फिर भारी पड़ेगी? इसका जवाब 29 अप्रैल को सामने आ जाएगा।