आपके मोबाइल में छिपा हो सकता है 'कंगाल' करने वाला यह लिंक, नागौर में हुआ वो खुलासा जिसके तार जुड़े हैं देशभर से, जानिए क्या है पूरा मामला!
क्या आपके फोन पर भी आया है रातों-रात अमीर बनाने वाला वो 'खतरनाक लिंक'? सावधान! नागौर के एक बंद कमरे से चल रहे 'अदृश्य लूट' के साम्राज्य ने सिर्फ 28 दिन में 92 लाख रुपए डकार लिए। जानने के लिए इसे अभी पढ़ें
नागौर। अगर आप टेलीग्राम या वॉट्सऐप पर आने वाले "घर बैठे कमाई" के मैसेज को किस्मत बदलने वाला मौका मान रहे हैं, तो रुक जाइए। नागौर कोतवाली पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है जिसने महज 28 दिनों में करीब 92 लाख रुपए की डिजिटल डकैती डाली है। यह गिरोह मोबाइल स्क्रीन के पीछे छिपकर लोगों की मेहनत की कमाई को 'जीरो' कर रहा था।
'रोलेक्स फेयर प्ले' का खूनी खेल
पुलिस जांच में सामने आया कि ठगों ने ‘रोलेक्स फेयर प्ले’ नाम का एक फर्जी गेमिंग एप तैयार किया था। गिरोह के सदस्य लोगों को लुभावने लिंक भेजकर जाल में फंसाते थे। खेल की शुरुआत में यूजर्स को "फर्जी जीत" दिखाकर उनका भरोसा जीता जाता था। जैसे ही यूजर को यकीन हो जाता कि वह पैसा कमा रहा है, उससे सट्टे के नाम पर बड़ी रकम जमा करवाई जाती। एप का पूरा रिमोट कंट्रोल ठगों के पास था, जो पलक झपकते ही यूजर का बैलेंस साफ कर देते थे।
किराए के कमरे से चल रहा था करोड़ों का सिंडिकेट
कोतवाली थानाधिकारी वेदपाल शिवरान की टीम ने सूचना के आधार पर हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में एक किराए के मकान पर दबिश दी। वहां का नजारा देख पुलिस भी दंग रह गई। एक छोटे से कमरे से दो युवक, सुनील और सुखवीर, पूरे देश में ठगी का जाल फैलाए हुए थे। पुलिस ने मौके से 2 लैपटॉप और 9 हाई-टेक मोबाइल बरामद किए हैं।
57 बैंक खातों का रहस्यमयी जाल
साइबर थाना प्रभारी DSP धरम पुनियां के अनुसार, गिरोह ने ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए 57 संदिग्ध बैंक खातों का इस्तेमाल किया। ये खाते और सिम कार्ड फर्जी दस्तावेजों पर खरीदे गए थे या किराए पर लिए गए थे। इन खातों के तार देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह घोटाला सिर्फ नागौर तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों की नेशनल लेवल की ठगी हो सकती है।
कैसे बचें इस डिजिटल जाल से?
पुलिस ने आमजन को चेतावनी दी है कि:
-
अनजान टेलीग्राम या वॉट्सऐप लिंक पर क्लिक न करें।
-
"रातों-रात अमीर बनें" जैसे ऑफर पूरी तरह फर्जी होते हैं।
-
किसी भी एप में अपनी बैंक डिटेल्स या आईडी-पासवर्ड शेयर न करें।
फिलहाल, गिरोह का मास्टरमाइंड फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। जब्त किए गए डिवाइस से कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।