कोटा: नॉर्दन बाईपास हाईवे बना किसानों का 'सुखाने का मैदान', बारिश से भीगी फसल को सड़क पर फैलाकर सुखा रहे

कोटा के नॉर्दन बाईपास हाईवे पर बारिश से भीगी फसलों को सुखाने के लिए किसान सड़क का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है।

Nov 7, 2025 - 12:48
कोटा: नॉर्दन बाईपास हाईवे बना किसानों का 'सुखाने का मैदान', बारिश से भीगी फसल को सड़क पर फैलाकर सुखा रहे

कोटा, 7 नवंबर 2025: राजस्थान के कोटा जिले में रंगपुर से नयागांव तक बनाए जा रहे नॉर्दन बाईपास हाईवे के निर्माणाधीन हिस्से को स्थानीय किसान इन दिनों एक अनोखे काम में इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले दिनों हाड़ौती क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण कटी हुई फसलें भीग गईं, जिन्हें सुखाने के लिए किसान इस हाईवे की सड़क को ही अपना 'सुखाने का मैदान' बना चुके हैं। गेहूं, सरसों और अन्य फसलों की बालियां सड़क पर बिछी नजर आ रही हैं, जिससे यातायात तो प्रभावित हो रहा है, लेकिन किसानों के लिए यह मजबूरी बन गई है।

बारिश ने बिगाड़ा खेल, फसल हुई पानी-पानी;  हाड़ौती क्षेत्र, जिसमें कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़ जिले शामिल हैं, में अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में अप्रत्याशित बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, कोटा में पिछले 10 दिनों में सामान्य से 200% अधिक वर्षा दर्ज की गई। इससे रबी फसलों की कटाई के दौरान हजारों हेक्टेयर में खड़ी या कटी फसलें पानी में डूब गईं। किसानों का कहना है कि गेहूं और सरसों की फसलें खेतों में ही भीगकर खराब हो गईं। रंगपुर गांव के किसान रामस्वरूप मीणा बताते हैं, "हमने मेहनत से फसल काटी थी, लेकिन बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। खेतों में पानी भर गया, फसल सूखने का कोई जगह नहीं बची। मंडी ले जाएं तो व्यापारी भीगी फसल को या तो खरीदते नहीं या 500-600 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर लेते हैं, जबकि सूखी फसल 2200-2500 रुपये क्विंटल बिकती है।"इसी तरह नयागांव के पास के किसान सुनील कुमार कहते हैं, "हमारे पास ट्रैक्टर-ट्रॉली हैं, लेकिन घर के आंगन या छत पर इतनी फसल सुखाना असंभव है। हाईवे की चौड़ी सड़क धूप में गर्म हो जाती है, जिससे फसल जल्दी सूखती है।"

हाईवे पर फसल की 'चादर', यातायात में बाधा;  नॉर्दन बाईपास हाईवे कोटा शहर के ट्रैफिक जाम से राहत देने के लिए बनाया जा रहा है। यह रंगपुर से शुरू होकर नयागांव, कुन्हाड़ी होते हुए आगे जाता है। फिलहाल इसका कुछ हिस्सा निर्माणाधीन है और वाहनों की आवाजाही कम है। किसान इसी हिस्से का फायदा उठा रहे हैं। सुबह से शाम तक सड़क पर गेहूं की बालियां, सरसों के ढेर और चने की फसल फैली रहती है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इससे हाईवे को नुकसान पहुंच रहा है और यातायात बाधित हो रहा है। कोटा ग्रामीण थाना प्रभारी ने बताया, "हमने किसानों को समझाया है कि सड़क पर फसल सुखाना गैरकानूनी है और दुर्घटना का खतरा बढ़ाता है। लेकिन किसान मजबूरी बता रहे हैं। हम पेट्रोलिंग बढ़ा रहे हैं और वैकल्पिक जगह सुझा रहे हैं।"

मंडी में ओने-पौने दाम, किसानों की मजबूरी;  कोटा की अनाज मंडी में भीगी फसल की समस्या गंभीर है।

"भीगी फसल में नमी ज्यादा होती है, जो स्टोरेज में खराब हो जाती है। इसलिए हम कम दाम देते हैं या रिजेक्ट कर देते हैं। सूखी फसल की मांग ज्यादा है।" पिछले सप्ताह मंडी में गेहूं का भाव 2100-2300 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन भीगी फसल 1000-1500 रुपये में ही बिकी।किसान संगठनों ने सरकार से मुआवजा और सुखाने की वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष ने कहा, "सरकार को ग्राम पंचायतों में सामुदायिक सुखाने के केंद्र बनाने चाहिए। बारिश से प्रभावित किसानों को तुरंत राहत दी जाए।"

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.