13 साल से कोमा में रहे हरीश राणा के लिए इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एम्स दिल्ली में लाइफ सपोर्ट हटाने की तैयारी...

गाजियाबाद के 32 वर्षीय हरीश राणा, जो 2013 के हादसे के बाद पिछले 13 साल से स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में थे, उनके लिए इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद उन्हें एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाया जा रहा है। यह भारत में इच्छामृत्यु का पहला व्यावहारिक मामला माना जा रहा है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
March 15, 2026 • 11:22 AM  11
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राजस्थान
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13 साल से कोमा में रहे हरीश राणा के लिए इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एम्स दिल्ली में लाइफ सपोर्ट हटाने की तैयारी...
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15 Mar 2026
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13 साल से कोमा में रहे हरीश राणा के लिए इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एम्स दिल्ली में लाइफ सपोर्ट हटाने की तैयारी...

गाजियाबाद के रहने वाले 32 वर्षीय हरीश राणा के लिए इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद उन्हें शनिवार को एम्स दिल्ली में शिफ्ट किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी में लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एम्स के पैलिएटिव केयर विभाग में डॉक्टरों की एक विशेष टीम हरीश की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। यहां उनका दर्द कम करने के लिए पेन मैनेजमेंट किया जा रहा है और किसी भी तरह का नया लाइफ सपोर्ट नहीं दिया जाएगा।

डॉक्टरों का कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत धीरे-धीरे फीडिंग ट्यूब और अन्य मेडिकल सपोर्ट हटाए जाएंगे, ताकि मरीज को प्राकृतिक तरीके से मृत्यु मिल सके।

विशेषज्ञ समिति रखेगी पूरी प्रक्रिया पर नजर

एम्स दिल्ली प्रशासन ने इस संवेदनशील मामले को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी हरीश राणा की स्थिति और लाइफ सपोर्ट हटाने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी।

पैलिएटिव केयर में डॉक्टरों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीज को किसी तरह की अतिरिक्त पीड़ा न हो और उसकी अंतिम अवस्था सम्मानजनक तरीके से पूरी हो सके।

पिता अशोक राणा का भावुक बयान

हरीश के पिता अशोक राणा ने बताया कि एम्स में विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में लाइफ सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे के शरीर में सांस लेने, खाना देने और मल-त्याग के लिए कई नलियां लगी हुई हैं।

उन्होंने भावुक होकर कहा कि 13 साल तक बेटे को इस हालत में देखने के बाद अब उसे सम्मानजनक विदाई देने का समय आ गया है। हालांकि वे खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बेटे को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई देता है।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ — जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन — ने हरीश राणा के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था।

अदालत ने क्लिनिकली असिस्टेड न्यूट्रिशन एंड हाइड्रेशन (CANH) को मेडिकल ट्रीटमेंट माना और विशेष परिस्थितियों में इसे हटाने की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि किसी मरीज को लंबे समय तक असहनीय पीड़ा में रखना उचित नहीं है और उसे गरिमा के साथ जीवन समाप्त करने का अधिकार भी है।

इस फैसले को भारत में “राइट टू डाई विद डिग्निटी” के सिद्धांत से जोड़ा जा रहा है और इसे पैसिव यूथेनेशिया का पहला व्यावहारिक मामला माना जा रहा है।

समाज में छाया भावुक माहौल

हरीश राणा की स्थिति की खबर जैसे-जैसे लोगों तक पहुंची, उनके परिवार और सोसाइटी में भावुक माहौल बन गया। पिछले कई दिनों से लोग दूर-दूर से परिवार से मिलने और उन्हें हिम्मत देने के लिए आ रहे थे।

अब जब इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तो आसपास के लोग भी गमगीन हैं और परिवार के साथ सहानुभूति जता रहे हैं। 13 साल तक उम्मीद और संघर्ष के बाद अब परिवार बेटे को अंतिम विदाई देने की तैयारी में है।

2013 में हादसे के बाद बदल गई थी जिंदगी

हरीश राणा मूल रूप से गाजियाबाद के रहने वाले हैं। साल 2013 में जब वे पंजाब यूनिवर्सिटी में बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे, उसी दौरान एक हादसे में चौथी मंजिल से गिर गए थे।

इस दुर्घटना में उनके सिर में गंभीर चोट आई, जिसके बाद वे स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में चले गए। इसके साथ ही वे क्वाड्रिप्लेजिया यानी पूरे शरीर के लकवे का शिकार हो गए थे।

उस समय से वे कोमा जैसी स्थिति में थे और उन्हें सांस लेने, भोजन देने और शरीर की अन्य जरूरतों के लिए लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। डॉक्टरों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उनके ठीक होने की संभावना बेहद कम है।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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