बीकानेर इंटरनेशनल कैमल फेस्टिवल 2026: भव्य शुरुआत, परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम
बीकानेर में 9 जनवरी 2026 से शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव के पहले दिन हेरिटेज वॉक से शानदार आगाज हुआ। नेशनल चेस प्लेयर युक्ति हर्ष ने लाखों के गहनों और 16 शृंगार के साथ मिस मरवण में हिस्सा लिया। एक युवक ने 20 किलो की भारी पगड़ी पहनकर सबका ध्यान खींचा। प्ले ग्रुप के बच्चे भी रैंप पर उतरे। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी वॉक में शामिल हुए। यह उत्सव राजस्थानी परंपरा, संस्कृति और ऊंटों का अनोखा जश्न है।
राजस्थान के बीकानेर में 9 जनवरी 2026 से शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव (Camel Festival) ने पहले ही दिन अपनी रंगीन छटा बिखेर दी। 'केसरिया बालम पधारो म्हारे देश...' की मधुर धुन के साथ आगाज हुआ इस तीन दिवसीय उत्सव में (9 से 11 जनवरी तक) देसी-विदेशी पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
हेरिटेज वॉक से हुआ शानदार आगाज
सुबह लक्ष्मीनाथ मंदिर से रामपुरिया हवेली तक 4 किलोमीटर लंबी हेरिटेज वॉक निकाली गई। इस दौरान केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल कलाकारों के साथ पैदल चले। विधायक जेठानंद व्यास और कलेक्टर नम्रता वृषणि भी मौजूद रहीं। शहर की पुरानी गलियों और हवेलियों में राजस्थानी परिधान में सजी महिलाओं और कलाकारों की मौजूदगी ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया।
मिस मरवण, मिस्टर बीकाणा और ढोला-मारू में धूम
दोपहर में मुख्य आकर्षण रहा मिस्टर बीकाणा, मिस मरवण और ढोला-मारू प्रतियोगिता।50 से ज्यादा महिलाएं 16 शृंगार करके पारंपरिक वेशभूषा में रैंप पर उतरीं।खास बात: बीकानेर की नेशनल चेस प्लेयर युक्ति हर्ष भी इसमें शामिल हुईं। उन्होंने लाखों रुपये के गहनों और पूरे 16 शृंगार के साथ खूब सुर्खियां बटोरीं।
20 किलो की पगड़ी का कमाल
मिस्टर बीकाणा प्रतियोगिता में एक युवक ने 20 किलो की भारी पगड़ी बांधकर सबका ध्यान खींचा। पिछले साल पवन व्यास ने 22 किलो की 2500 फीट लंबी पगड़ी मात्र 22 मिनट में बांधी थी, जिसकी चर्चा आज भी है। इस बार भी पगड़ी बांधने की कला ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बच्चे भी नहीं रहे पीछे
फेस्टिवल में प्ले ग्रुप के छोटे-छोटे बच्चे भी राजस्थानी अंदाज में हाथ पकड़कर रैंप पर उतरे। एक महिला ने तलवार थामे पारंपरिक पोशाक में रैंप वॉक किया। ये पल उत्सव की मासूमियत और जीवंतता को दर्शाते हैं।
उत्सव का सार
यह महोत्सव बीकानेर की परंपरा, स्वाद और संस्कृति का अनोखा संगम है। ऊंटों को अलग-अलग सज्जा और अंदाज में पेश किया जा रहा है। लोक नृत्य, घूमर, स्थानीय व्यंजन और ऊंटों की फर कटिंग (जिसमें 25 हजार रुपये से ज्यादा खर्च आता है) जैसे कार्यक्रम पर्यटकों को लुभा रहे हैं।