चूल्हे-चौके से 'पावरलिफ्टिंग' के मंच तक; बाड़मेर की अनीता राठी ने दुनिया में मनवाया अपनी शक्ति का लोहा

बाड़मेर की 44 वर्षीय अनीता अर्जुन राठी ने घरेलू जिम्मेदारियों और सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर पावरलिफ्टिंग में इतिहास रच दिया है। तीन बच्चों की माँ (डॉक्टर, इंजीनियर और MBA) अनीता ने अमेरिका में 65 देशों के बीच विश्व में चौथी रैंक हासिल की और अब तक 15 पदक जीत चुकी हैं। पति और कोच के सहयोग से बाड़मेर की पहली महिला नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट बनीं अनीता की कहानी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति की एक अनुपम मिसाल है।

Mar 7, 2026 - 11:03
Mar 7, 2026 - 11:18
चूल्हे-चौके से 'पावरलिफ्टिंग' के मंच तक; बाड़मेर की अनीता राठी ने दुनिया में मनवाया अपनी शक्ति का लोहा

"जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का, फिर देखना फिजूल है कद आसमान का।" राजस्थान के बाड़मेर जिले की अनीता अर्जुन राठी ने इन पंक्तियों को हकीकत में बदल दिया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में अनीता की कहानी उन करोड़ों महिलाओं के लिए एक मशाल है, जो घर की चारदीवारी और सामाजिक बंदिशों के बीच अपने सपनों को कहीं ओझल कर देती हैं। 44 वर्ष की उम्र में, जब समाज अक्सर महिलाओं को 'ठहराव' की सलाह देता है, तब अनीता ने 'पावरलिफ्टिंग' जैसे कठिन खेल को चुनकर अपनी शक्ति का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया है।

कोच का मार्गदर्शन और पति का अटूट विश्वास

अनीता की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके पति अर्जुन राठी एक मजबूत ढाल बनकर खड़े रहे। एक ऐसे समाज में जहाँ पुरुषों का समर्थन अक्सर सीमित होता है, अर्जुन राठी ने न केवल अनीता को प्रोत्साहित किया, बल्कि घर और खेल के बीच संतुलन बनाने में उनका पूरा साथ दिया। साथ ही, उनके कोच के तकनीकी प्रशिक्षण और निरंतर सपोर्ट ने अनीता की मेहनत को सही दिशा दी। कोच के विश्वास और पति के समर्पण ने ही अनीता को घरेलू मोर्चे और अंतरराष्ट्रीय रिंग—दोनों जगह 'चैंपियन' बनाया।

पारिवारिक जिम्मेदारी: एक आदर्श माँ की भूमिका

अनीता राठी ने कभी भी अपनी खेल की महत्वाकांक्षाओं को अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने अपनी ममता और अनुशासन से अपने तीनों बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनाया है। उनकी परवरिश का ही परिणाम है कि आज उनका एक बच्चा डॉक्टर, दूसरा इंजीनियर और तीसरा MBA कर समाज की मुख्यधारा में अपना योगदान दे रहे हैं। घर की पूरी जिम्मेदारी संभालते हुए, बच्चों को उच्च शिक्षित करना और साथ ही खुद को एक एथलीट के रूप में स्थापित करना, अनीता के अद्भुत समय-प्रबंधन (Time Management) को दर्शाता है।

विश्व पटल पर भारत का गौरव: 65 देशों के बीच चौथी रैंक

अनीता के करियर का सबसे ऐतिहासिक क्षण मई 2024 में आया, जब उन्होंने टेक्सास, अमेरिका में आयोजित 'वर्ल्ड बेंचप्रेस पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप' में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस वैश्विक महाकुंभ में दुनिया के 65 शक्तिशाली देशों के एथलीट शामिल थे। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच अनीता ने '57 किग्रा मास्टर 1 श्रेणी' में पूरे विश्व में चौथी रैंक (4th Rank) हासिल की। इसी महीने उनकी इन असाधारण सेवाओं और उपलब्धियों के लिए उन्हें प्रतिष्ठित 'नेशनल अटल अवार्ड' से भी नवाजा गया।

15 पदकों का स्वर्णिम सफर

साल 2019 में सामान्य फिटनेस के लिए जिम शुरू करने वाली अनीता ने मई 2022 से पावरलिफ्टिंग को अपना जुनून बनाया। मात्र 4 साल के पेशेवर सफर में उन्होंने पदकों की झड़ी लगा दी:

स्वर्णमयी सफलता (5 Gold): उन्होंने कोटा, अलवर, फलौदी और हाल ही में जनवरी 2026 में हरियाणा नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर बाड़मेर की पहली महिला गोल्ड मेडलिस्ट पावरलिफ्टर होने का गौरव पाया।

रजत और कांस्य की चमक: औरंगाबाद, बैंगलोर, केरल, गोवा और भरतपुर जैसे राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय मंचों पर उन्होंने कुल 8 रजत (Silver) और 2 कांस्य (Bronze) पदक अपने नाम किए।

महिला दिवस पर संदेश: उम्र महज एक आंकड़ा है

बाड़मेर की यह 'सुपरमॉम' आज राजस्थान की हर उस बेटी और बहू के लिए प्रेरणा है जो कुछ बड़ा करना चाहती हैं। महिला दिवस पर उनका संदेश स्पष्ट है—"अपनी पहचान को कभी मरने न दें। उम्र, समाज या जिम्मेदारी कभी आपके सपनों में बाधा नहीं बन सकती, बशर्ते आपके पास संकल्प की शक्ति और परिवार का साथ हो।"

अनीता अर्जुन राठी की यह यात्रा केवल शारीरिक शक्ति की जीत नहीं, बल्कि एक महिला के अडिग आत्म-सम्मान और अदम्य साहस की जीत है।

Ashok Shera "द खटक" एडिटर-इन-चीफ