13 साल पुराने केस में निर्णायक घड़ी! आसाराम की सजा पर हाईकोर्ट जल्द सुनाएगा फैसला!
जोधपुर स्थित राजस्थान उच्च न्यायालय में नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले में सजा काट रहे आसाराम की अपील पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने सभी दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस बहुचर्चित केस में अंतिम निर्णय का इंतजार है।
जोधपुर स्थित राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्यपीठ में नाबालिग से यौन उत्पीड़न के चर्चित मामले में सजा काट रहे आसाराम की अपील पर सुनवाई एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अब अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
बहस पूरी, अब फैसले की घड़ी
मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ, जिसमें जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल हैं, ने बचाव पक्ष की सभी दलीलें सुन ली हैं। बचाव पक्ष ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती देते हुए कई कानूनी तर्क पेश किए। बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है, जो आने वाले समय में सुनाया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2013 का है, जब नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में ट्रायल कोर्ट ने आसाराम को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसी फैसले के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर अब अंतिम निर्णय का इंतजार है।
स्वास्थ्य आधार पर मिलती रही राहत
आसाराम फिलहाल जोधपुर सेंट्रल जेल में सजा काट रहे हैं, लेकिन बीते वर्षों में स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते उन्हें कई बार अंतरिम जमानत भी दी गई है। उनकी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को लेकर बचाव पक्ष लगातार राहत की मांग करता रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई सुनवाई
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई में तेजी लाई थी, ताकि लंबे समय से लंबित इस मामले का जल्द निपटारा किया जा सके।
अब सबकी नजर फैसले पर
देशभर में चर्चित इस मामले में अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। कोर्ट का निर्णय न केवल इस केस की दिशा तय करेगा, बल्कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी एक महत्वपूर्ण संदेश देगा।