अजमेर कब्रिस्तान विवाद में नया मोड़: पाक नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका, जानिए पूरा मामला

अजमेर के बोहरा समाज कब्रिस्तान विवाद में पाक नेटवर्क से जुड़े अली अकबर उर्फ बाबू का नाम खरीदार के रूप में सामने आया। एजेंसियां जांच में जुटी, धार्मिक संपत्ति और फंडिंग के सूत्रों की हो रही पड़ताल।

Apr 5, 2026 - 09:56
अजमेर कब्रिस्तान विवाद में नया मोड़: पाक नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका, जानिए पूरा मामला

अजमेर कब्रिस्तान विवाद में नया मोड़: पाक आतंकी नेटवर्क से जुड़े अली अकबर का नाम सामने

अजमेर के फॉयसागर रोड स्थित बोहरा समाज के कब्रिस्तान विवाद में एक नया मोड़ आया है। ताजा दस्तावेजों में पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क से जुड़े अली अकबर उर्फ़ बाबू का नाम खरीदार के रूप में सामने आया है। इस खुलासे के बाद प्रशासन और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हो गई हैं।

विवाद का इतिहास

बोहरा समाज के कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जे और रजिस्ट्री को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। दाऊदी बोहरा पंचायत ने इस रजिस्ट्री को वक्फ ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी। फिलहाल इस मामले में स्टे लगा हुआ है।

अली अकबर और उसके कनेक्शन

अली अकबर हरियाणा के अंबाला में विस्फोटक सामग्री के साथ गिरफ्तार हो चुका है। उस पर पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क के संपर्क होने के आरोप लगे हैं। जांच एजेंसियां उसकी फंडिंग और संपर्कों की विस्तृत जांच कर रही हैं।

परिवार की स्थिति और जमीन का रहस्य

गिरफ्तारी के बाद अली अकबर के परिजनों ने आर्थिक तंगी का दावा किया था। बताया गया कि ऑटो रिक्शा और मोबाइल की किस्तें बकाया थीं। लेकिन विवादित कब्रिस्तान जमीन की रजिस्ट्री में उसका नाम सामने आने से कई सवाल उठ गए हैं। अब यह आशंका जताई जा रही है कि वह किसी बड़े भू-माफिया या नेटवर्क के लिए फ्रंटमैन के रूप में काम कर रहा हो।

धमकी और हिंसक घटनाएं

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अली अकबर ने अजमेर के पीसांगन के एक व्यापारी को जान से मारने की धमकी भी दी थी। इस पर पीसांगन थाना पुलिस ने उसे शांति भंग की धारा में गिरफ्तार किया था।

जांच की मांग

दाऊदी बोहरा पंचायत के सचिव शब्बीर सागर वाला ने बताया कि आरोपियों ने जेसीबी मशीन लगाकर कब्रिस्तान की जमीन समतल करने की कोशिश भी की थी। इसे पुलिस ने समय रहते रोका। अब पूरे मामले की गहन जांच की मांग उठ रही है ताकि धार्मिक संपत्ति के दुरुपयोग और संभावित नेटवर्क का पूरा सच सामने आ सके।

निष्कर्ष:
अजमेर कब्रिस्तान विवाद अब केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। अली अकबर के पाकिस्तानी नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी ने इसे सुरक्षा और आतंकवाद के एंगल तक पहुंचा दिया है। प्रशासन और एजेंसियां मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की जांच में जुट गई हैं।

Kashish Sain Bringing truth from the ground